चिरायते का काढ़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चिरायते का काढ़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

5.6.17

मलेरिया बुखार की घरेलू व होम्योपैथिक चिकित्सा




 यह रोग मादा एनिफेलिस मच्छर के काटने से होता है । इसका प्रकोप वर्षा के मौसम में अधिक होता है। इसमें प्रारम्भ में ठंड लगकर कॅपकॅपी आती है । ठण्ड के साथ शरीर में दर्द, बेचैनी, वमन, प्यास, हाथ-पैर ठंडे हैं । पसीना देकर बुखार उतरता है पर कभी-कभी 23 दिन छोड़कर आने लगता है।
इपिकाक 30-
 मलेरिया ज्वर में डॉ० जाह का उल्लेख करते हुये डॉ० नैश लिखते हैं कि अगर किसी दवा का विशेष लक्षण समझ में न आये तों मलेरिया ज्वर की प्रारम्भिक अवस्था में इपिकाक का प्रयोग करना चाहिये। लगती । इसे 30 शक्ति या आवश्यकता के अनुसार उच्च शक्ति में भी दिया जा सकता है । 
अर्टिका यूरेन्स Q- 
डॉ० बर्नेट, मलेरिया ज्वर की अवस्था में इस दवा को दिया करते थे। उन्होंने मलेरिया ज्वर से पीड़ित कई रोगियों को अर्टिका यूरेन्स मूल अर्क में देकर सफलतापूर्वक ठीक किया था । आगे वे यह भी लिखते हैं कि इस दवा से अनेक रोगी ठीक नहीं होते अतः नैट्रम म्यूर भी देनी पड़ सकती हैं । इससे मलेरिया पूरी तरह ठीक हो जाता है । रक्त परीक्षण कराकर रोग समाप्त होने की सन्तुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिये ।
मलेरिया के ताप को कम करने के लिये- 
मलेरिया ऑफिसिनेलिस 1xमलेरिया के तेज बुखार को कम करने के लिये इसका सेवन कराने से तुरन्त ताप कम हो जाता है ।
पुराने मलेरिया ज्वर में- 


एजाडिरेक्टा इण्डिका Q, 1x, 2x-
 
नीम से निर्मित इस दवा का प्रयोग सदियों से मलेरिया निवारण में होता आया हैं। कुनैन के अपव्यवहार के कारण होने वाली विकृति में भी यह एक उत्तम व सफल दवा हैं । इसको दिन में दो-तीन बार प्रयोग करना चाहिये, कुछ ही दिनों में लाभ होगा|

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

नैट्रम म्यूर 30, 200– 

नमक से बनी यह एक ऐसी औषधि है जिसका प्रभाव जहाँ शरीर के पोषण लवण विकारों पर होता है वहीं मानसिक रोगियों पर भी यह सफलतापूर्वक कार्य करती है । इतना ही नहीं, साधारण नमक के लवण से बनी इस दवा में मलेरिया प्रतिरोधी अद्भुत क्षमता होती है जिसके कारण मलेरिया ज्वर में यह अच्छा काम करती है । इसके रोगी को 10-11 बजे के बीच ठंड लगकर ज्वर आता है। ऐसी स्थिति में इसकी छ: गोली एक काँच की बोतल में डालकर पानी भर दें, फिर बोतल हिलाकर एकएक चम्मच पानी दिन में दो-तीन बार देते रहना चाहिये । पानी देने से पूर्व बोतल को हिला लें । गर्भवती स्त्रियों पर उच्चशक्ति का प्रयोग नहीं करना चाहिये । यदि एलोपैथिक दवाओं या कुनैन के प्रयोग से मलेरिया बुखार दब जाये और बाद में इसके उद्भेद नजर आयें और बुखार पुनः आ जाये तो ऐसी अवस्था में यह दवा सफलतापूर्वक कार्य करती है और एलोपैथिक दवाओं के दुष्परिणामों को ठीक कर देती है ।




मलेरिया के होमियोपैथिक दवाओ में निम्नलिखित दवाएं शामिल है —
Cinchona.[Cinch]
Arsenicum.[Ars]
Nux vomica. [Nux-v]
Natrum muriaticum. [Nat-m]
Eupatorium perfoliatum. [Eup-per]
Ipecac. [Ip]
Chininum sulphuricum. [Chin-s]
Gelsemium. [Gels]
मलेरिया से बचने के प्राकृतिक एवं घरेलू तरीके (Malaria Natural and Home remedies in Hindi)
*चिरायते का काढ़ा 1 कप दिन में 3 बार कुछ दिनों तक नियमित पीने से मलेरिया रोग के सारे कष्टों में शीघ्र आराम मिलता है।
*लहसुन की 4 कलियों को छीलकर घी में मिला लें और इसका सेवन करें। एैसा करने से मलेरिया की ठंड उतर जाती है।
*मलेरिया बुखार के लिए गिलोय, पपीता पत्ते, एलोवेरा/मुसब्बर वेरा का रस और बकरी का दूध देना लाभप्रद होता है।
*ढाक : ढाक के बीजों की गिरी (10 ग्राम) और करंजवा के बीजों के गिरी (10 ग्राम) को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुखा लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले यह 1 गोली पानी के साथ लेने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
*सुबह-सुबह खाली पेट तुलसी के 4 से 5 पत्तों को अच्छि तरह से चबाकर खाएं । 10 ग्राम तुलसी के पत्तों और 7 काली मिर्चों को पानी में पीसकर सुबह और शाम पीने से मलेरिया बुखार ठीक होता है ।
*सौंठ और पिसा धनिया को चूर्ण बराबर मात्रा में पानी के साथ लेने से भी मलेरिया बुखार में आराम मिलता है ।
10 ग्राम गरम पानी और उसमें 2 ग्राम हींग डालकर उसका लेप बनाएं। अब इस लेप को हाथ और पैरों के नाखूनों पर लगाएं। 4 दिनों तक एैसा करने से रोगी जल्दी ठीक हो जाता है।
*पिसी हुई काली मिर्च और नमक को नींबू में लगाकर मलेरिया के रोगी को चूसने को दें। एैसा करने स बुखार की गर्मी उतर जाती है।
*गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिलाकर 40-80 मिलीलीटर की मात्रा में रोज सेवन करने से मलेरिया में लाभ होता है ! यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।
*मलेरिया के बुखार होने पर प्याज का रस बेहद फायदेमंद होता है। 4 काली मिर्च का पाउडर, 4 मिली प्याज का रस मिलाकर दिन में 3 बारी पीएं।
*प्याज के रस में एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीते रहने से भी मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
*हरड़ का चूर्ण (10 ग्राम) को 100 मिलीलीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना ले। यह काढ़ा दिन में 3 बार पीने से मलेरिया रोग में फायदा होता है।
*फलों का रस, दूधश् दही, लाइट जल्दी पचने वाली चीजें सेवन करें । विटामिन-सी युक्त, आयरन, इलेक्टक्रेलाइट, ओआररस लेते रहें जो कि शरीर को बुखार से थ्रोमबोसाटोपनिया होने से बचाने में सहायक है।  

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा