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18.1.17

डायबीटीज(मधुमेह)का होम्योपैथिक इलाज //Homeopathic treatment of diabetes

  


 आज के समय में न सिर्फ भारत अपितु समस्त विश्व में डायबीटीज एक बड़ी समस्या होती जा रही हैं। आम भाषा में इसे शक्कर की बीमारी भी कहते हैं। यह एक गंभीर रोग होता है, जो धीरे -धीरे शरीर के अन्य अंगों को भी क्षतिग्रस्त कर देता हैं। स्त्रियों और पुरुष में इसका अनुपात 1:2 होता है, अर्थात 1 स्त्री और 2 पुरुष। आइए जानते हैं कि डायबीटीज क्या है, क्यों और कैसे होती है? इसके क्या क्या लक्षण होते हैं और इसके क्या उपचार हैं|
क्या होती है डायबीटीज

हमारे शरीर में पेन्क्रियाज नाम की एक ग्रंथि होती हैं, जिसे हिन्दी में अग्नाशय कहते हैं। इस ग्रंथी से कुछ हार्मोन्स का स्त्राव होता हैं । इंसुलिन पेन्क्रियाज से स्त्रावित होने वाला एक महत्वपूर्ण हार्मोन है।
   इसी प्रकार हमारे भोजन मे कार्बोहाइड्रेट एक महवपूर्ण तत्व होता है जिससे हमें केलोरी और ऊर्जा प्राप्त होती है। कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर मे जाकर ग्लूकोज के छोटे छोटे कणों में बदल जाता है, और इसी ग्लूकोज को इंसुलिन शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ले जाता हैं, जिससे शरीर को प्राप्त ऊर्जा होती हैं। जब यह इंसुलिन शरीर में बनना बंद हो जाता है या इसकी मात्रा इतनी कम रहती हैं कि कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता है तो ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता है और रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है जिसे डायबीटीज कहते हैं।

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एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति में ग्लूकोज़ का स्तर

एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति में ग्लूकोज़ का स्तर भोजन के पूर्व 70 -100mg/dl और भोजन के पश्चात 120-140mg/dl होना चाहिए। यदि यह स्तर 140mg/dl से अधिक हो तो व्यक्ति को डायबिटिक माना जाता हैं।


डायबीटीज़ के कुछ कारण और होते हैं जैसे:
– इन्सुलिन की कमी
-हार्मोन्स में परिवर्तन
-तनाव
-गलत खान-पान
-उम्र
-मोटापा
-आलस और आरामदायक जीवनशैली
-कुपोषण
-दवाओं का अत्याधिक सेवन
डायबीटीज़ के प्रकार
डायबीटीज़ मुख्यतः 3 प्रकार की होती है।

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टाइप 1 डायबीटीज़

इसमें इन्सुलिन नामक हार्मोन शरीर में नहीं बन पाता है जिससे ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं दे पाता है। यह प्राय: किशोरावस्था में होती हैं।

टाइप 2 डायबीटीज़

इसमें इन्सुलिन तो बनता है परन्तु इतनी कम मात्रा में जिससे रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर अनियंत्रित हो जाता हैं। यह पीढ़ी दर पीढ़ी पाया जाता हैं। लगभग 90 % लोग टाइप 2 डायबीटीज़ से ही पीड़ित होते हैं।
गेस्टेसनल डायबीटीज़
यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबीटीज़ होती हैं।

डायबीटीज़ के लक्षण

-कोई घाव या चोट लगने पर देर से ठीक होना
-स्त्रियों में माहवारी सम्बधित कष्ट होना

-बार-बार पेशाब होना (रात के समय अधिक)
-प्यास अधिक लगना
-वजन कम होते जाना
-थकान व कमजोरी लगना
-पैर सुन्न होना
-मुँह में सूखापन लगना
-भूख अधिक लगना
– पूरे शरीर में खुजली होना

डायबीटीज़ का होम्योपैथिक उपचार
 
डायबीटीज़ एक गंभीर रोग है। यदि कई सालों तक रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ा रहे तो शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान होने लगता है, लेकिन इसे रोगी अपनी दैनिक दिनचर्या और खान-पान में सुधार करके तथा होम्योपैथिक दवाओं द्वारा इसे न सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है अपितु अन्य अंगो को भी क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता हैं। 
आर्स-एल्ब (ARS-ALBUM)
मुँह सूखा रहे, बार बार प्यास लगे, रोगी को मरने का डर लगे, पूरे शरीर में खुजली हो, डायबीटीज़ वालो का गैंग्रीन होने पर यह दवा उपयोगी हैं।
यूरेनियम-नाइट्रेट (URANIUM-NITRATE) 
मुँह और त्वचा में सूखापन, अत्याधिक भूख और प्यास लगना, पेशाब बहुत अधिक होना, कुपोषण के कारण होने वाली डायबीटीज़ होने पर यह दवा उपयोगी हैं।
एसिड-फॉस (ACID-PHOS)
रोगी को पेशाब बहुत अधिक मात्रा में आता हैं, और उसमे शर्करा की मात्रा बहुत होती है। रोगी कमजोरी महसूस करता हैं, हाथ-पैरों में दर्द रहता है, पेशाब दूधिया रंग का होता है, मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर रहता है। यह दवा डायबीटीज़ इनसेपिडस और डायबीटीज़ मेलिटस में उपयोगी है।

प्लम्बम –मेट(PLUMB-MET)
तेजी से वजन कम हो, कमजोरी लगे, याददाश्त कमजोर हो जाए, पैरो में पैरालिसिस हो, कब्ज, लगातार उल्टियां होती हैं| 
अर्जेंटम -नाइट्रिकम (ARGENTUM-NITRICUM)
 
बहुमूत्र के रोगी को मीठा खाने की बहुत इच्छा हो, जी मचलाना, उलटी हो जाना, डिप्रेशन रहना, बहुत ज्यादा पेशाब होना जिसमें शर्करा की मात्रा बहुत हो तो यह दवा उपयोगी है।

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नेट्रम–म्युर (NATRUM-MUR)
पूरे शरीर में डायबीटीज़ के कारण खुजली हो, त्वचा सूखी सी रहे, हर घंटे में पेशाब होने पर यह दवा उपयोगी है।
नेट्रम –सल्फ (NATRUM-SULPH)
रोगी को रात में बार बार पेशाब हो।
सीजीजियम- जम्बोलियम (syzygium-jambolanum)
अत्याधिक प्यास, कमजोरी, दुर्बलता, पेशाब की स्पेसिफिक-ग्रेविटी बढ़ी हुई, डायबीटीज़ के कारण होने वाले अल्सर, शरीर के ऊपरी भाग में छोटे-छोटे लाल रंग के दाने होने पर ये दवा दी जा सकती है।
नोट-होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर कर के रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतःबिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।

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