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6.5.17

थैलेसीमिया रोग की जानकारी और उपचार


थैलेसीमिया क्या है?
यह आनुवांशिक रोग जितना घातक है, इसके बारे में जागरूकता का उतना ही अभाव है। सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर मात्र 20 दिनों की हो जाती है। इसका सीधा प्रभाव शरीर में स्थित हीमोग्लोबीन पर पड़ता है।   
थैलेसीमिया रक्त सम्बन्धी वंशानुगत रोग है जिसमें आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम और लाल रक्त कणिकाएँ केवल थोड़ी मात्रा में ही होती हैं। हीमोग्लोबिन आपकी लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित प्रोटीन है जो उन्हें ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है। यह रोग वंशानुगत है, अर्थात आपके माता-पिता में कम से कम कोई एक इस रोग का वाहक रहा है। यदि वे दोनों थैलेसीमिया के वाहक हैं तो आपको इस रोग का 25% अधिक गंभीर रूप प्राप्त होता है। थैलेसीमिया के कारण उत्पन्न हीमोग्लोबिन की कम मात्रा और केवल कुछ लाल रक्त कणिकाओं की उपस्थिति, रक्ताल्पता उत्पन्न करती है और इस कारण आपको थकावट होती है।

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थैलेसीमिया के कई प्रकार होते हैं, जिनमें अल्फा-थैलेसीमिया, बीटा-थैलेसीमिया, कूलेस एनीमिया, और भूमध्यसागरीय एनीमिया हैं।
रोग अवधि
हम ठीक होने में लगने वाले समय का अंदाजा नहीं लगा सकते।
जाँच और परीक्षण रक्त परीक्षण
कम्पलीट ब्लड काउंट
रेटिक्यूलोसाईट काउंट
आयरन
अनुवांशिकता जाँच
प्रसव पूर्व परीक्षण
कोरिओनिक विलस सैंपलिंग
एम्नियोसेंटेसिस
डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाबQ1.थैलेसीमिया क्या है?थैलेसीमिया वंशानुगत विकार है जिसमें हीमोग्लोबिन का संश्लेषण दोषयुक्त होता है। यह रक्ताल्पता के रूप में प्रकट होता है।
Q2. मुझे थैलेसीमिया कैसे हो सकता है?
यदि आपके माता-पिता में से किसी एक अथवा दोनों को थैलेसीमिया रोग है, या वे इसके वाहक हैं, तो आपको भी ये रोग हो सकता है।
Q3.मुझे थैलेसीमिया है, ये कैसे पता चलेगा? थैलेसीमिया रक्ताल्पता के रूप में प्रकट होता है। रक्त का आयरन परीक्षण इसे रक्ताल्पता के अन्य रूपों से अलग बताता है। हीमोग्लोबिन के इलेक्ट्रोफोरेसिस से रोग निश्चित पता चलता है।

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Q4.थैलेसीमिया का उपचार क्या है?थैलेसीमिया के रोगियों को, रोग की गम्भीरता के आधार पर, बार-बार रक्त चढ़वाना पड़ता है। उन्हें आयरन की अधिक मात्रा को घटाने के लिए औषधियां भी लेनी होती हैं।
यदि तिल्ली (स्प्लीन) आकार में अत्यंत बढ़ गई है तो रक्त कणिकाओं के नष्ट होने को कम करने के लिए तिल्ली को शल्यक्रिया द्वारा हटाया जाता है।
थैलेसीमिया की नई उपचार पद्धति में, रोगी के किसी भाई-बहन के गर्भनाल में उपस्थित, रक्त कोशिका का प्रयोग होता है, जिसका लक्ष्य थैलेसीमिया का इलाज करना है।
Q5. क्या मैं थैलेसीमिया के साथ सामान्य जीवन जी सकता हूँ?मंद थैलेसीमिया के रोगी बिना किसी उपचार के सामान्य जीवन जी सकते हैं। लेकिन गंभीर थैलेसीमिया रोगियों को बार-बार रक्त चढ़वाना होता है और आयरन चेलेशान थेरेपी लेनी होती है, जो जीवन की गुणवत्ता को कम करते हैं।
Q6.थैलेसीमिया की अन्य समस्याएँ क्या हैं? थैलेसीमिया के रोगियों को बार-बार संक्रमण की संभावना होती है और अस्थि-मज्जा के विस्तार के कारण उनकी हड्डियाँ कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं। यह बच्चों में विकास को धीमा करता है और उनकी वयःसंधि भी विलंबित होती है।
यदि चेलेशान थेरेपी पर्याप्त और उचित नहीं है तो आयरन की अधिकता से ह्रदय, लिवर और भीतरी अंगों पर आयरन इकठ्ठा होने लगता है।

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Q7.मैं थैलेसीमिया को कैसे रोक सकता हूँ?
विवाह पूर्व जीन सम्बन्धी उचित सलाह द्वारा बच्चों में थैलेसीमिया को रोका जा सकता है। थैलेसीमिया वाहक व्यक्तियों के आपसी वैवाहिक सम्बन्ध को रोका जाना चाहिए। परहेज और आहार
लेने योग्य आहारकैल्शियम युक्त आहार अधिक मात्रा में लें। यह हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए अत्यंत जरूरी है। डेरी उत्पाद कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं। एक अतिरिक्त लाभ यह भी है कि डेरी उत्पाद शरीर के आयरन अवशोषण की क्षमता को कम करते हैं।
कैल्शियम के अवशोषण के लिए शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है। विटामिन डी अण्डों, डेरी उत्पादों और मछली में मिलता है।
इनसे परहेज करें तरबूज, पालक, खुबानी, हरी पत्तेदार, एस्पार्गस, आलू, खजूर, किशिमिस, ब्रोकोली, फलियाँ, मटर, सूखी फलियाँ, दालें
आयरन की अधिक मात्रा
दलिया
चाय, कॉफ़ी
मसाले

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योग और व्यायाम
व्यायाम नियमित करें और डॉक्टर से अपने लिए उचित व्यायाम कार्यक्रम की जानकारी लें।
घरेलू उपाय (उपचार)
अधिक मात्रा में रक्त चढ़वाने वाले लोगों को चेलेशान थेरेपी नामक उपचार की आवश्यकता होती है, ताकि शरीर के अधिक आयरन को हटाया जा सके।
यदि आप रक्त चढ़वा रहे हैं तो आपको आयरन के पूरक नहीं लेने चाहिए।
स्वास्थ्यवर्धक आहार लें।
संक्रमण ना होने दें। रोकथाम (बचाव)
अधिकतर मामलों में थैलेसीमिया को रोका नहीं जा सकता।
यदि आपको थैलेसीमिया है, या आप थैलेसीमिया जीन के वाहक हैं, तो पिता बनने के पूर्व जीन सम्बन्धी सलाहकार से मार्गदर्शन लें।
ध्यान देने की बातें
चेहरे की हड्डियों में विकृति आना।
शारीरिक विकास में कमी।
साँस लेने में कमी।
पीली त्वचा (पीलिया)।
डॉक्टर को कब दिखाएँ
यदि आपको या आपके बच्चे को थैलेसीमिया के निम्न में कोई लक्षण हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें:

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अत्यंत थकावट।
साँस लेने में कमी।
मुरझाये हुए से दिखाई देना।
चिड़चिड़ापन
त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)।
चेहरे की हड्डियों में विकृति। इस बीमारी में रोगी का शरीर पीला पड़ जाता है,
रोगी के शरीर में शुद्ध खून बनना बंद हो जाता है,
हड्डियों का विकास रूक जाता है,
सोचने विचारने की क्षमता कम हो जाती है,
बच्चों में शरीर के विकास की दर कम हो जाती है,
बड़ो में थकावट अधिक होने लगती है,
थोड़ी बहुत मेहनत के बाद चक्कर आने लगते है,

सर्वकल्प क्वाथ (sarvkalp kawath) :- ३०० ग्राम

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बनाने की विधि :- एक बर्तन में लगभग ४०० मिलीलीटर पानी लें | इस पानी में एक चम्मच सर्वकल्प क्वाथ की मिलाकर इसे मन्द अग्नि पर पकाएं | थोड़ी देर पकने के बाद जब इसका पानी १०० मिलीलीटर रह जाए तो पानी को छानकर सुबह के समय और शाम के समय खाली पेट पीये |
सामग्री : -
कुमारकल्याण रस (kumar kalyan rasa) :- १- २ ग्राम
प्रवाल पिष्टी (praval pisti) :- ५ ग्राम
कहरवा पिष्टी (kaharva pisti) :- ५ ग्राम
मुक्ता पिष्टी (mukta pisti) :- ५ ग्राम
गिलोय सत (giloy sat) :- १० ग्राम
प्रवाल पंचामृत (praval panchamrit) :- ५ ग्राम
इन सभी आयुर्वेदिक औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाए | अब इस मिश्रण की बराबर मात्रा में ६० पुड़ियाँ बना लें और किसी डिब्बे में बंद करके रख दें | रोजाना एक – एक पुड़ियाँ और शाम के समय खाना खाने से आधा घंटा पहले ताज़े पानी के साथ या शहद के साथ खाएं |
सामग्री : -
कैशोर गुगुल (Kaishor guggal ) :- ४० ग्राम
आरोग्यवर्धिनी वटी(aarogaya vardhini vati):- २० ग्राम
इन दोनों औषधीयों की एक – एक गोली रोजाना सुबह और शाम के खाना खाने के बाद लें | इस औषधि को हल्के गर्म पानी के साथ लें |


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सामग्री : -
धृतकुमारी स्वरस(Dhritkumari Savrasa) : - १० मिलीलीटर
गिलोय स्वरस (giloye Savrasa) :- १० मिलीलीटर
इन दोनों औषधियों में से किसी एक रस में गेहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर पीये | इस उपचार को रोजाना सुबह और शाम खाली पेट पीये | बहुत लाभ मिलेगा |

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