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प्रोस्टेट केन्सर के प्रमुख लक्षण और होम्योपैथिक मेडिसिन्स

                                       

कैंसर एक बीमारी है जिसमें शरीर में कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर निकलती हैं। जब कैंसर प्रोस्टेट में शुरू होता है, इसे प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। त्वचा के कैंसर के अलावा, अमेरिकी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर सबसे आम कैंसर है।प्रोस्टेट पुरुष प्रजनन प्रणाली का एक हिस्सा है, जिसमें लिंग, प्रोस्टेट और अंडकोष शामिल हैं। प्रोस्टेट मूत्राशय के नीचे और मलाशय के सामने स्थित है। यह एक अखरोट के आकार के बारे में है और मूत्रमार्ग (ट्यूब जो मूत्राशय से मूत्र को खाली करता है) के आसपास है। यह द्रव पैदा करता है जो वीर्य का एक हिस्सा बना देता है।प्रोस्‍टेट कैंसर केवल पुरुषों को होता है, क्‍योंकि प्रोस्‍टेट ग्रंथि पुरुषों में होती है। 
   उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्‍टेट कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में प्रोस्‍टेट कैंसर के मामले भारत सहित पूरे देश में बढ़ रहे हैं। कैंसर का यह प्रकार 60 से अधिक उम्र वाले पुरुषों के प्रोस्टेट ग्रंथि में होने की संभावना अधिक होती है। प्रोस्टेट ग्रंथि अखरोट के आकार की एक ऐसी होती है जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर होती है। इसका काम काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है। अगर इसके लक्षण शुरूआती दौर में पता चल जाये तो इसे गंभीर होने से बचाया जा सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर क्या है?

प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं में बनने वाला एक प्रकार का कैंसर है। यद्यपि पौरूष ग्रंथि में कई प्राकर की कोशिकाएँ पाई जाती है, लगभग सभी प्रोस्टेट कैंसर, ग्रंथि कोशिकाओं से विकसित करते है (एडिनोकार्सिनोमा)। अन्य प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर कम पाये जाते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर बहुत ही धीमी गति से बढ़ता है। ज्यादातर रोगियों में तब तक लक्षण नही दिखाई देते जब तक कि कैसर उन्नत अवस्था में नही पहुँचता। प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों में से अधिकांश अन्य कारणों से मरते हैं। कई मरीजों को तो ज्ञात ही नहीं होता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हैं। लेकिन एक बार प्रोस्टेट कैंसर विकसित हो जाता है और बाहर की तरफ फैलने लगता है तो यह खतरनाक हो जाता है।

टेस्टिकल्‍स में बदलाव

हालांकि टेस्टिकल्‍स में बदलाव टेस्टिकुलर कैंसर का संकेत हो सकता है। लेकिन प्रोस्‍टेट ग्रंथि में ही टेस्टिक्‍स होते हैं जो प्रोस्‍टेट कैंसर के कारण बदल सकते हैं। अगर आपके टेस्टिकल्‍स का आकार बढ़ रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके आलाव टेस्टिकल्‍स में किसी भी तरह का बदलाव प्रोस्‍टेट कैंसर से संबंधित हो सकता है। अपने टेस्टिकल्‍स की नियमित रूप से जांच कीजिए, टेस्टिकल्‍स की जांच आप स्‍वयं कर सकते हैं। अगर आपको किसी भी प्रकार का बदलाव दिखे तो इसकी जांच करायें।

खून निकला

प्रोस्‍टेट कैंसर के कारण पेशाब के साथ खून भी आयेगा, इसके अलावा मल के साथ भी खून निकल सकता है। प्रोस्‍टेट कैंसर के अलावा कोलेन, किडनी, ब्‍लैडर कैंसर में भी खून निकलता है। लगातार खून का निकलना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर कैंसर है तो इसके कारण खून मलाशय के द्वारा बाहर निकलता है। हालांकि यह समस्‍या 50 की उम्र के बाद होती है, लेकिन वर्तमान लाइफस्‍टाइल के कारण यह किसी भी उम्र में हो सकती है।

पेशाब करने में समस्‍या

पेशाब करने में समस्‍या ही प्रोस्‍टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण है। प्रोस्‍टेट ग्रंथि बढ़ने के कारण पेशाब करने में परेशानी होती है। रात में बार-बार पेशाब जाना, अचानक से पेशाब निकल आना, पेशाब रोकने में समस्‍या, आदि लक्षण प्रोस्‍टेट कैंसर में दिखाई पड़ते हैं। अगर पेशाब करने में समस्‍या कई दिनों तक बनी रहे तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें, यह कैंसर हो सकता है।

त्‍वचा में बदलाव

अगर शरीर के किसी भी हिस्‍से की त्‍वचा में किसी भी प्रकार का बदलाव हो तो चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए। त्‍वचा में असामान्य रूप से परिवर्तन होना कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की त्वचा बेवजह सांवली या काली पड़ने लगी हो तो इसे नजअंदाज न करें। त्वचा का पीला पड़ना भी प्रोस्‍टेट कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

वजन कम होना

अगर बिना किसी कारण के आपका वजन कम हो रहा है तो कैंसर का शुरूआती लक्षण हो सकता है। वजन कम करने वाले किसी प्रयास के बिना ही शरीर का वजन 10 पौंड से ज्यादा कम हो जाये तो इसे कैंसर के प्राथमिक लक्षण के रूप में देखा जा सकता है। कैंसर होने के बाद खाना अच्‍छे से नहीं पचता और पाचन क्रिया भी सही तरीके से काम नहीं करती है, जिसके कारण शरीर का वजन कम होने लगता है।

दर्द होना

अगर आप बहुत काम करते हैं और देर तक कुर्सी पर बैठते हैं तो कमर, पीठ आदि जगह दर्द होना सामान्‍य है। लेकिन बिना किसी समस्‍या के शरीर के किसी भी हिस्‍से में लगातार दर्द होना कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर लगातार पीठ में दर्द हो रहा हो तो यह कोलोरेक्‍टल या प्रोस्‍टेट कैंसर का कारण हो सकता है। इसके अलावा कमर के आसपास की मांसपेशियों में भी दर्द होता है। इससे नजरअंदाज न करें।

थकान और बुखार

प्रोस्‍टेट कैंसर होने पर व्‍यक्ति के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके कारण शरीर बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। सामान्‍य से फ्लू का भी बचाव शरीर नहीं कर पाता है। लगातार खांसी आना, बुखार होना, थकान की समस्‍या बने रहना, आदि प्रोस्‍टेट कैंसर के शुरूआती लक्षण हैं। इसके अलावा व्‍यक्ति के मुंह में भी बदलाव होता है।

पीएसए के जरिए होती है पहचान

प्रोस्टेट स्पेसीफिक एंटीजेन (पीएसए) ब्लड टेस्ट होता है। इसके जरिए प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती पहचान की जाती है। ब्लड में पीएसए की मात्रा शून्य-चार तक सामान्य मानी जाती है। यह मात्रा चार-दस के बीच हो तो इसका कारण संक्रमण माना जाता है जो दवाओं से ठीक हो सकता है। पीएसए 10-20 के बीच होने पर इसे कैंसर से संभावित लक्षण माना जाता है। वहीं पीएसए के मात्रा अगर 20 से अधिक है तो कैंसर की पुष्टि होती है। पीएसए जांच के बाद बायोप्सी और एमआरआइ के जरिए कैंसर की स्थिति और स्टेज का सही आंकलन किया जाता है।

दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए होम्योपैथी चिकित्सा

रेडिएशन थैरेपी, कीमोथैरेपी और हॉर्मोन थैरेपी जैसे परंपरागत कैंसर के उपचार से अनेकों दुष्प्रभाव पैदा होते हैं। ये दुष्प्रभाव हैं – संक्रमण, उल्टी होना, जी मितलाना, मुंह में छाले होना, बालों का झड़ना, अवसाद (डिप्रेशन), और कमज़ोरी महसूस होना। होम्योपैथी उपचार से इन लक्षणों और दुष्प्रभावों को नियंत्रण में लाया जा सकता है। रेडियोथेरिपी के दौरान अत्यधिक त्वचा शोध (डर्मटाइटिस) के लिए ‘टॉपिकल केलेंडुला’ जैसा होम्योपैथी उपचार और केमोथेरेपी-इंडुस्ड स्टोमाटिटिस के उपचार में ‘ट्राउमील एस माऊथवाश’ का प्रयोग असरकारक पाया जाता है। कैंसर के उपचार के लिए वनस्पति, जानवर, खनिज पदार्थ और धातुओं से प्राप्त 200 से भी अधिक होम्योपैथी दवाईयां उपयोग में लाई जाती हैं। कैंसर के उपचार के लिए उपयोग में आने वाली कुछ सामान्य औषधियों में एम्मोमिआ कार्ब, आस्टाकस फ़्लुविएटिलिस, एनाकरडिअम ओरिएंटेल, एंट्रसिनम, सिन्नामोमम, सिस्टक कैन, क़ाल्क आओड, क्यूबेबा, कोपैवा, कैम्फ़र, सिना, गैस्टिन, ग्रिंडेलिआ, हेडेरा हेलिक्स, हेलोडेर्मा, जबोरांडी, जुगलन रेजिआ, लेसर्टा, म्यूरेक्स, मायरिस्टिका सेब, मायरिका सेरि, नेट आर्स, नक्स मोस्चाटा, फ़ायसोस्टिग्मा, राफ़ागस, रयूटा, सिनापिस, स्क्रोहुलारिआ, टेयुरिनम, टेरेबिंथिना, यूरिआ, वेरेट एल्ब, विंका माइनोर शामिल हैं।
कैंसर नाम सुनते ही मन में डर बैठ जाता हैं, क्योकि कैंसर एक घातक रोग हैं। लाखों लोग हर वर्ष कैंसर के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं। कुछ इलाज न होने के कारण तो कुछ गलत इलाज के कारण, लेकिन सही समय पर इलाज से इसे ठीक किया जा सकता हैं। आईये जानने की कोशिश करते हैं कि कैंसर क्या हैं और किसको और कब होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.

क्या है कैंसर?

सामान्यत: हमारे शरीर में नई-नई कोशिकाओं (cells) का हमेशा निर्माण होता रहता है, परन्तु कभी-कभी इन कोशिकाओं की अनियंत्रित गति से वृद्धि होने लगती है और यही सेल्स जो अधिक मात्रा में होती हैं एक ट्यूमर के रूप में बन जाती हैं जो कैंसर कहलाता है। इसे कार्सिनोमा (carcinoma),नियोप्लास्म (neoplasm) और मेलेगनंसी (malignancy) भी कहते हैं। लगभग 100 प्रकार के कैंसर होते हैं, और सभी के लक्षण अलग-अलग होते हैं। एक अंग में कैंसर होने पर ये दूसरे अंगो में भी फैलने लगता हैं। सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते।
किसको होता हैं कैंसर
कैंसर किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। स्त्री, पुरुष, बच्चे किसी को भी हो सकता हैं।
कैंसर की ग्रेड
ग्रेड द्वारा पता किया जाता हैं कि ट्यूमर सेल्स नॉर्मल सेल्स से कितनी अलग हैं। कैंसर की ग्रेड निम्न प्रकार की होती हैं,
ग्रेड 1- इसमें कैंसर सेल नार्मल सेल के समान दिखती है, और यह धीरे-धीरे बढ़ता है।
ग्रेड 2- इसमें भी नॉर्मल सेल के समान होता है, परन्तु यह बहुत तेजी से बढ़ती हैं।
ग्रेड 3…इसमें कैंसर सेल बहुत तेजी से बढती हैं, और एब्नार्मल दिखती हैं।

होम्योपैथिक दवाएं

होम्योपथी से कैंसर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। यदि कैंसर जल्दी डायग्नोसिस हो जाए तो पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। यह एक सस्ता और बिना किसी तकलीफ के रोग को ठीक करने वाला उपचार होता है। होम्योपथी में कैंसर के लिए बहुत सारी दवाए हैं, परन्तु जानकारी के लिए यहां पर कुछ दवाओं के बारे में लिखा है जो कैंसर के लिए उपयोगी हैं। चूंकि कैंसर एक घातक रोग होता हैं, अत: स्वयं चिकित्सा न करें, किसी कुशल होम्योपैथ से ही इलाज कराएं।

कोनियम-मैक (CONIUM-MAC)

ट्यूमर पत्थर जैसा कठोर होता हैं। रात के समय सुई चुभने जैसा दर्द होता हैं। ब्रैस्ट कैंसर और ब्रैस्ट ट्यूमर दोनों में उपयोगी हैं। टेस्टिकल (Testicle) और यूट्रस(uterus) बढ़ जाते हैं।

आर्सेनिक-एल्बम (ARSENIC-ALBUM)

यह होम्योपैथिक दवा कैंसर के लिए बहुत अच्छी होती है। यह सीधे कैंसर की cells पर असर करती है। यह कैंसर को आगे बढ़ने से रोकती है। रोगी को हमेशा डर लगता है। कभी मरने का डर लगता है, कभी अकेले रहने का डर, कभी बीमारी का डर। पेशंट सोचता है की दवा खाना बेकार है। आत्महत्या करने के विचार आते हैं। अपने परिवार की बहुत ज्यादा चिंता रहती है। उसे हर वक्त यही चिंता लगी रहती है, कि उसके बच्चों और परिवार को कुछ हो न जाए। आर्स-अल्ब कैंसर रोगी के मन से डर को दूर करता है। तम्बाकू, शराब से होने वाले नुकसान को आर्स-अल्ब ठीक करता है। रोगी को बहुत बेचैनी रहती है। शरीर में जलन बहुत होती हैं। ठंड से तकलीफ होती है। शरीर में सुई चुभने जैसा दर्द होता हैं। सांस की तकलीफ, खून की उल्टी होना। अल्सर से बदबूदार स्त्राव होता है। घाव सड़ने से आर्स-अल्ब बचाती है।

थूजा (THUJA)

किसी भी प्रकार के ट्यूमर के लिए थूजा बहुत ही उपयोगी दवा हैं। यह वेक्सिन से होने वाले दुश्प्रभावो को दूर करती है। पेशेंट का बहुत तेजी से वजन कम होता जाता हैं। पेशेंट बहुत ज्यादा इमोशनल होता हैं, यहाँ तक की म्यूजिक सुन कर ही रोने लगता हैं। ट्यूमर में ऐसा दर्द होता है जैसे नाखून से नोचा जा रहा हो।ट्यूमर से पस और ब्लड आता रहता हैं। मस्से ,कारबंकल ,अल्सर,पोलिप ,सार्कोमा आदि में उपयोगी।

फ़ायटोलक्का (PHYTOLACCA)

यह ब्रेस्ट कैंसर या ब्रेस्ट ट्यूमर के लिए बहुत ही उपयोगी है। ट्यूमर बहुत ही कठोर और बैंगनी रंग का होता है और दर्द होता रहता हैं। यूट्रस के फिब्रोइड के लिए भी बहुत उपयोगी दवा है। दाईं ओवरी में दर्द होता है। निप्पल पर दरारें (CRACKS)और अल्सर हो जाते हैं। पीरियड्स के पहले ब्रेस्ट में तकलीफ होना।

कोनडूरेनगो (CUNDURANGO)

यह पेट के कैंसर के लिए उपयोगी दवा है। मुंह के चारों ओर दर्द भरी दरारें (CRACKS)हो जाती है। उल्टियां होती रहती हैं। पेट में अल्सर हो जाते हैं। जलन के साथ दर्द होता है। कैंसर और ट्यूमर हो जाते हैं।

साइलीसिया (SILICEA)

यह किसी भी प्रकार के फिब्रोइड, ट्यूमर या स्कार (SCAR) को ठीक करती है। यह धीरे-धीरे अपना काम करती है। ट्यूमर से गाढ़ा बदबूदार पस बहता रहता है। पेशेंट बहुत ही ज्यादा नर्वस होता है। नींद में चलने की आदत होती है। यह कैंसर के दर्द को कम करती है।

हेक्ला-लावा (HECLA-LAVA)

बोन कैंसर (OSTEOSARCOMA) में उपयोगी है। जबड़े की हड्डी में तकलीफ। सड़े दांत के कारण पूरे चेहरे में दर्द होना।

कैल्कैरिया-फ्लोर (CALCARIA-FLOR)

ब्रेस्ट में होने वाली कठोर गांठे या ट्यूमर में उपयोगी। यह दवा ट्यूमर को कैंसर में परिवर्तित होने से बचाती है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा



विशिष्ट परामर्श-



प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों (मूत्र    जलन , बूंद बूंद पेशाब टपकना, रात को बार -बार  पेशाब आना,पेशाब दो फाड़)  मे रामबाण औषधि है| प्रोस्टेट  केंसर की नोबत  नहीं आती| आपरेशन  से बचाने वाली औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|