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5.8.18

कर्ण रोग , कर्ण पीप,बहरेपन की जानकारी और उपचार

                                                       
                             
कान कैसे करते हैं काम ?

दरअसल कान के तीन हिस्से होते हैं।
1- आउटर ईयर
2- मिडल ईयर
3- इनर ईयर
इसमें आउटर ईयर वातावरण से ध्वनि तरंगों के रूप में आवाजों को ग्रहण करता है। और यह तरंगें कैनाल से होकर ईयरड्रम तक पहुंचती हैं और इनकी वजह से ईयरड्रम कंपन करने लगता है। इस कंपन से मिडल ईयर में स्थित 3 बेहद छोटी हड्डियां गतिमान हो जाती हैं और इस गति के कारण कान के अंदर मौजूद द्रव हिलना शुरू हो जाता है। इनर ईयर में कुछ सुनने वाली कोशिकाएं होती हैं, जो इस द्रव की गति से थोड़ी मुड़ जाती हैं और इलेक्ट्रिक पल्स के रूप में संकेत दिमाग को भेजती हैं। ये संकेत ही हमें शब्दों और ध्वनियों के रूप में सुनाई देते हैं।

हियरिंग लॉस के प्रकार

हियरिंग लॉस यानी दो प्रॅकार, कंडक्टिव हियरिंग लॉस, सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस से हो सकता है।
कंडक्टिव हियरिंग लॉस
कंडक्टिव हियरिंग लॉस कान के बाहरी और बीच के हिस्से में हुई किसी क्षति या किसी बीमारी की वजह से हो सकता है। इसीलिए इसे बीमारी की वजह से होने वाला बहरापन भी कहा जाता है। इसके होने की कुछ वजहें निम्न प्रकार से हैं।
कानों से पस बहने या किसी इन्फेक्शन के कारण
कानों की हड्डी में कोई खराबी आने से
कान के पर्दे का क्षतिग्रस्त हो जाना
किसी कैंसर रहित ट्यूमर के कारण
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस कान के अंदर आई किसी खराबी के कारण हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब हियर सेल्स ठीक से काम नहीं करते या नष्ट होने लगते हैं। सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
बढ़ती उम्र
कुछ खास तरह की दवाएं। जैसे जेंटामाइसिन का इंजेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन आदि
कुछ बीमारियां जैसे डायबीटीज और असंतुलित हॉर्मोंस। इसके अलावा मेनिंजाइटिस, खसरा, कंठमाला आदि बीमारियां भी सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस का कारण बन सकती हैं।

अधिक शोर

इसके अलावा कई लोग कान साफ करने समय धातु की नुकीली चीज का इस्‍तेमाल करते हैं। इससे कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है।
कानों में जमा होने वाली वैक्स (मैल) के कारण भी लोगों को हियरिंग लॉस व बच्चों में डिलेड स्पीच हो सकता है। इसलिए कान में वैक्स जमा होने को गंभीरता से लेना चाहिए। और इसको डॉक्टर से साफ कराना चाहिए। इसके अलावा कान में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना समय बिताए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

ईयरफोन से रहें सावधान

नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ इस संदर्भ में बताते हैं कि ईयरफोन्स भी बहरे पन का कारण बन सकते हैं। इनके लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबेल तक कम हो सकती है। फलस्वरूप कान का पर्दा वाइब्रेट होने लगता है व दूर की आवाज सुनने में परेशानी होने लगती है। यहां तक कि इससे बहरापन भी हो सकता है। इसके अलावा ईयरफोन्स के अत्यधिक प्रयोग से कान में दर्द, सिर में दर्द या नींद न आना आदि समस्याएं हो सकती हैं। यही नहीं इनके कारण वर्टिगो, बहरापन और लैबिरिंथिस जैसी बीमारियां भी होने का खतरा हो सकता है।
सुनने की क्षमता में कमी जन्म से भी हो सकती है, इसीलिए पैदा होने के बाद प्रत्येक बच्चे की सुनने की क्षमता की जांच जरूर करानी चाहिए। लेकिन सामान्य बाल रोग विशेषज्ञ इस प्रकार की जांच नहीं करते हैं। इसके लिए किसी ईएनटी रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। याद रखिए सुनने की क्षमता ईश्‍वर की दी एक अनमोल कृति है। इसे यूं ही बेकार न करें। अपने कानों का पूरा खयाल रखें और किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर चिकित्‍सक से संपर्क करें।
सुनने की क्षमता में कमी जन्म से भी हो सकती है, इसीलिए पैदा होने के बाद प्रत्येक बच्चे की सुनने की क्षमता की जांच जरूर करानी चाहिए। लेकिन सामान्य बाल रोग विशेषज्ञ इस प्रकार की जांच नहीं करते हैं। इसके लिए किसी ईएनटी रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
कानों में जमा होने वाली वैक्स (मैल) के कारण भी लोगों को हियरिंग लॉस व बच्चों में डिलेड स्पीच हो सकता है। इसलिए कान में वैक्स जमा होने को गंभीरता से लेना चाहिए। और इसको डॉक्टर से साफ कराना चाहिए। इसके अलावा कान में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर बिना समय बिताए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
आवाजें सुनने के लिए कान जरूरी हैं, ये बात आपको भी पता है। मगर क्या आप जानते हैं कि कान आपके शरीर का संतुलन बनाने में भी मददगार होते हैं। कान बहने की समस्या शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग की कार्य प्रणाली को क्षतिग्रस्त कर देती है। आइए जानते हैं इस समस्या का कारण और इलाज।

गंभीर है कान बहने की समस्या

कान बहने की समस्या को हल्के ढंग से लेना सेहत के लिए भारी यानी नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस समस्या से कान के पर्दे में छेद हो जाता है और इससे रोगी बहरा भी हो सकता है। हम कान बहने की समस्या के प्रति सचेत तभी होते हैं, जब यह समस्या गंभीररूप धारण कर लेती है। कान बहने की समस्या के गंभीर परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि कानों की छोटी समस्याओं को भी नजरअंदाज न किया जाए।

अनदेखी ठीक नहीं

आमतौर पर कान से मवाद आने को मरीज गंभीरता से नहीं लेता। इसे अत्यंत गंभीरता से लेकर नाक, कान व गला विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए अन्यथा यह कभी-कभी गंभीर रोग जैसे मेनिनजाइटिस या दिमागी बुखार आदि को उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। कान में मवाद की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, किंतु प्राय: यह एक वर्ष से छोटे बच्चों या ऐसे बच्चों में ज्यादा होती है जो मां की गोद में ही रहते हैं यानी जो छोटे बच्चे बैठ नहीं सकते या करवट नहीं ले सकते।

कान से मवाद आने का कारण

कान से मवाद आने का स्थान मध्य कान (कान का मध्यवर्ती भाग) में संक्रमण है। मध्य कान में सूजन होकर, कान का पर्दा फटकर मवाद आने लगता है। मध्य कान में संक्रमण पहुंचने के तीन रास्ते हैं, जिसमें 80 से 90 प्रतिशत कारण गले से कान को जोड़ने वाली नली है। इसके अलावा नाक और गले की सामान्य सर्दी-जुकाम, टांसिलाइटिस, खांसी आदि कारणों से मध्य कान में संक्रमण पहुंच जाता है।

सर्जरी है कान बहने का इलाज

शुरुआती दौर में कान बहने का इलाज एंटीबॉयोटिक और ओरल दवाओं से किया जा सकता है, जो अस्थायी समाधान है। स्थायी समाधान के लिए रोगी को सर्जिकल प्रक्रियाओं की जरूरत होती है। सर्जरी की ये प्रक्रियाएं इस प्रकार हैं।

मायरिंगोप्लास्टी: 

एक सरल सर्जरी है। यह सर्जरी कान में हुए छोटे छेद की समस्या का बेहतर इलाज करती है। इसमें कान के पीछे की त्वचा को कान के नए पर्दे के रूप में लगाया जाता है।
टिम्पैनोप्लास्टी: यह सर्जरी आमतौर पर सामान्य बेहोशी की स्थिति में की जाती है। इस सर्जरी में पर्दे के साथ सुनने की हड्डी को भी बदला जाता है।

मसटॉइडेक्टमी: 

सर्जरी की यह प्रक्रिया सामान्य बेहोशी के तहत की जाती है। इस सर्जरी के माध्यम से कान के पीछे की जो हड्डी गल जाती है, उसे निकाल दिया जाता है।
कान सुनने के अलावा शरीर के संतुलन को भी बरकरार रखते हैं। इसलिए कान का स्वस्थ रहना जरूरी है, लेकिन बहरेपन की समस्या पीड़ित व्यक्ति के अलावा उसके परिजनों को भी परेशान करती है, लेकिन अब इससे छुटकारा संभव है। बहरेपन में सुनने की शक्ति के कम होने के अलावा व्यक्ति की सामजिक व मानसिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं, लेकिन अब इस समस्या को अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

क्यों होता है ऐसा

जब कोई व्यक्ति बोलता है, तो वह ध्वनि तरंगों के द्वारा हवा में एक कंपन पैदा करता है। यह कंपन कान के पर्दे और सुनने से संबधित तीन हड्डियों-मेलियस, इन्कस और स्टेप्स के द्वारा आंतरिक कान में पहुंचता है और सुनने की नस द्वारा आंतरिक कान से मस्तिष्क में संप्रेषित होता है। इस कारण हमें ध्वनि का अहसास होता है। यदि किसी कारण से ध्वनि की इन तरंगों में अवरोध पैदा हो जाए, तो बहरेपन की समस्या पैदा हो जाएगी। यदि अवरोध कान के पर्दे या सुनने की हड्डियों तक सीमित रहता है तो इसे कन्डक्टिव डेफनेस (एक प्रकार का बहरापन) कहते हैं। यदि अवरोध कान के आंतरिक भाग में या सुनने से संबन्धित नस में है, तो इसे सेन्सरी न्यूरल डेफनेस कहते हैं।
योग और प्राणायाम सिर्फ मांस‍पेशियों को लचीला बनाने के लिए ही किया जाता है। योग यह सांस लेने की तकनीकों का मेल है जो शरीर को कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। इससे हमारा शरीर फिट रहता है। आज हम आपको योग से कान की बीमारियों को दूर करने का तरीका बताएंगे। इस योगासन से कान की कई तरह की बीमारियां सही होती हैं। यहां तक कि योग से बहरापन भी काफी हद तक दूर हो सकता है। आइए जानते है कान के लिए कौन सा योग फायदेमंद हो सकता है।

ताड़ासन

ताड़ासन आपके कान के लिए बहुत ही उपयोगी आसन है। इसे नियमित रूप से करने से आपके पोस्चर में सुधार देखने को मिलता है। यह जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है तथा इससे पैर और कूल्हों में ताकत, शक्ति और गतिशीलता बढ़ जाती है।

कैसे करें

तड़ासन करने के लिए आप 4 से 6 इंच का गैप रखकर खड़े हो जाइए। इसके बाद दोनों भुजाओं को ऊपर की ओर उठाइए। इस दौरान अपनी आंखों को सामने पड़ने वाली किसी भी चीज पर अपनी दृष्टि जमा लीजिए। इसमें आपके शरीर का सारा भार आपकी पैरों की अंगुलियों पर होगा। कुछ समय तक इस अवस्था में रहने के बाद वापिस इस सामान्य में आ जाइए। इस आसन को आप कम से कम दस बार कीजिए। इस आसन के दौरान ऊपर उठते समय श्वास अंदर व नीचे की ओर आते समय बाहर लीजिए।

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