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14.1.17

बुढ़ापे की बीमारियों का होम्योपैथीक इलाज // Homoeopathic treatment of geriatric diseases

    



बुढ़ापा अपने आप में एक अस्वास्थ्यकर अवस्था है। इस अवस्था में लोग कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं।
इनमें अल्जाइमर नाम की खास बीमारी है, जिसमें लोगों की स्मरण शक्ति धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। इसके अलावा कई तरह की शारीरिक और मानसिक अवस्थाएं कष्टकारक होती हैं। होम्योपैथी में वृद्धावस्था के लगभग सभी रोगों की दवाएं उपलब्ध हैं।
मानसिक लक्षण व उपचार जो वृद्धजन शाम के समय भयभीत रहते हैं, जिन्हें यह आशंका घेरे रहती है कि कोई दुर्भाग्य न आ जाए, भुलक्कड़, चिंताग्रस्त, उत्साहहीन, अवसादग्रस्त, जिन्हें समझया नहीं जा सकता, मोटे, थुलथुले शरीर वाले, मोटी सोच वाले, हर समय सर्दी से डरने व अधिक कपड़ों में लिपटे रहने वाले मिठाई प्रिय वृद्धजनों के लिए कैलकेरिया कार्ब-30 कारगर है।


*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

*मानसिक चोट से ग्रस्त, शोकमग्न, हाल खुश-हाल बेचैन, हाल प्रेम-हाल झगड़ा, ऐसे परस्पर विरोधी लक्षणों वाले बुजुर्गो को अटकने की शिकायत रहती है। खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही भूख लग जाती है, उनके लिए इग्नेशिया-200 रामबाण औषधि है जो शांत एवं प्रसन्नतायुक्त जीवन प्रदान करती है।
*घमंडी, उद्दंड, दूसरों को नफरत से देखने वाले, सभी को अपने से बहुत तुच्छ एवं छोटा समझने वाले, अत्यधिक काम भावना से ग्रसित, हर समय अपनी बढ़ाई करने वाले, हर समय ‘मैं ऐसा’, ‘मैं ऐसा’ कहने वाले, गर्म मौसम बर्दाश्त न करने वाले तथा मृत्यु भययुक्त व्यक्तियों के लिए प्लेटिना-30 एक महाऔषधि का काम करती है। 


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

एकांत भय, अकेले व अंधेरे में डरने, सोते समय भी कमरे में रोशनी जलाने वाले, पानी से डरने वाले, चमकीली चीजों से डर, भूतप्रेत दिखना,दीवार पर न होते हुए भी कीड़े रेंगते देखना, हंसाना, सीटी बजाना, चिल्लाना, गाली बकना, कभी-कभी दीन भाव से ईश्वर से प्रार्थना करना, पागल की तरह व्यवहार करना, ऐसे वृद्धजनों को स्ट्रामोनियम-1000 की एक ही मात्रा हमेशा के लिए ठीक करने की शक्ति रखती है। बहुत अधिक बोलने, बकवास करने वाले, ईष्र्यालु, समय स्थान एवं तारीख का कोई पता नहीं, नींद आने के तुरंत पहले, नींद के बीच में अथवा आधी रात को तकलीफ बढ़ जाना, हर समय गर्मी से परेशान वृद्धों के लिए लैकेसिस-200 अमृत के समान काम करती है।


फिशर होने के कारण लक्षण और उपचार

*सब पर संदेह करना, दवा पीने से मना करना जैसे उसे जहर दिया जा रहा हो, अपने पति/पत्‍नी,बेटा, बेटी पर भी अविश्वास करना, कल्पना करना कि लोग उसके पीछे पड़े हों, षड्यन्त्र कर रहे हों, लोगों को बात करते देख सोचना कि उसकी चुगली की जा रही है, पीछे मुड़कर देखना कि कोई पीछा तो नहीं कर रहा, अनिद्रा से ग्रसित बुजुर्गो के लिए हायोसिमस-30 अत्यंत लाभकारी है तथा सदा के लिए मस्तिष्क से संदेहशीलता को मिटा देता है।
शारीरिक लक्षण एवं उपचार मनुष्य के शरीर में जितनी लचक रहेगी, उतना ही वह जवान रहेगा।
होम्योपैथी में कुछ औषधियां शरीर के अंगों एवं मांसपेशियां को अधिक वर्षो तक लचीला रखती हैं, जिससे आदमी फुर्तीला एवं कार्यशील रह सकता है।
* थियोसिनामाइन 3एक्स धमनियों एवं नाड़ियों की कड़ेपन को समय-समय पूर्व आने से रोकने में सक्षम है। बार-बार पाखाना आना, थोड़े चिकने पाखाने के साथ जोर की आवाजें आना, शरीर में बेहद कमजोरी का अनुभव, हर समय चिड़चिड़ापन, जीवन का भूतकाल नशे एवं व्यसनों में व्यतीत, वर्तमान में भी नशे की लत न छोड़ सकने वाले तथा सर्दी में भयभीत वृद्धजनों के लिए नक्स वोमिका-30 अत्यंत लाभकारी साबित हुई है।


*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

*वृद्ध व्यक्तियों के जीवन में जब शारीरिक एवं मानसिक हृास की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो शक्तिहीनता, याददाश्त की कमी, हृदय रोग, प्रोस्टेट गं्रथि की सूजन आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं। जीना बोझ लगने लगता है, ऐसे में बरायटा कार्ब- 30 वृद्धजनों को उत्साहयुक्त जीवन देती है। पाचन क्रिया का मंद होना, लिवन में कमजोरी, पेट में हवा भरना, उठने पर कमर मानो टूट ही जाएगी ऐसी कमजोरी महसूस करना, शरीर में जीवन की शक्ति की कमी एवं दिनोंदिन शारीरिक क्षीणता आदि लक्षणयुक्त बुजुर्गो के लिए लाइकोपोडियम-200 नवजीवन देती है।
*सिर को दाएं-बाएं घुमाने से चक्कर लगना, माथे में सुन्नपन, पैर की ओर से लकवे का ऊपर की ओर बढ़ना, प्रोस्टेट ग्रंथि की सूजन से रुक- रुककर पेशाब होना, किसी गं्रथि का कड़ापन जैसे कैंसर, ट्यूमर आदि, दिन में खांसी नहीं पर रात में सूखी खांसी जैसे लक्षणों के लिए कोनियम- 30 सुबह-शाम फायदा पहुंचाती है।
*जैसे-जैसे आयु बढ़ती है, वैसे-वैसे शरीर में जकड़न बढ़ने लगती है।


स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

स्नायु, धमनियां, जोड़ एवं मांसपेशियां कड़ी होने लगती हैं, अधिक ठंड लगना, फिर भी ठंडा भोजन पसंद करना, बार-बार नक्सीर फूटना, बायीं तरफ लेटने से रोग बढ़ना ऐसे वृद्धजनों के लिए फॉस्फोरस-30 की एक मात्रा प्रति सप्ताह लेनी चाहिए। होम्योपैथी दवाएं बुढ़ापे में जीवनी शक्ति कमजोर पड़ने पर खासतौर पर कारगर साबित हुई हैं।
*अन्य चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं में स्ट्रांग केमिकल मौजूद रहते हैं, जिनकी जहरीली पाश्र्व क्रियाएं मौजूद रोग से भी अधिक हानिकारक सिद्ध होती हैं। यह गलत धारणा है कि होम्योपैथी दवाएं धीरे-धीरे काम करती हैं, जबकि आजकल उपलब्ध जर्मन हाई पोटेंसी दवाएं बिना किसी साइड इफेक्ट्स के अत्यंत शीघ्र रोग को मिटाने में सक्षम हैं तथा कम खर्च में रोगी को स्वस्थ कर देती हैं।


चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 

*बुढ़ापे का ध्यान आते ही मन सिहर जाता है। दांत विहीन मुंह चेहरे पर झुर्रियां, कमजोर शरीर, जोड़ों में दर्द, यही है बुढ़ापे की निशानी। बुढ़ापा आने का कारण है- भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी, क्षमता से अधिक मेहनत, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव, मानसिक तनाव आदि। यह सब ऐसी समस्याएँ है जो आदमी को समय से पहले बूढ़ा और लाचार बना देती है। बुढ़ापा आना शरीर की एक निश्चित प्रक्रिया है, शरीर की कोशिकाओं के काम करने की एक सीमा होती है जब यह सीमा समाप्त हो जाती है तब बुढ़ापा घेरने लगता है। बुढ़ापा निश्चित है। फिर भी हम कुछ सावधानी अपनाकर अपने रहन-सहन आहार-विहार में परिवर्तन कर इसे समय से पहले आने से रोक सकते है। होम्योपैथिक दवाइयाँ बुढ़ापे को समय से पूर्व आने से रोक सकने में सक्षम तो है ही साथ ही बुढ़ापे की तकलीफ को कम करने एवं उनसे छुटकारा दिलाने में भी लाभदायक है। *वृद्धावस्था का सबसे पहले असर त्वचा पर पड़ना शुरू होता है। विशेषकर चेहरे की त्वचा परात्वचा ढीली हो जाती है। इससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती है। इससे बचने के लिये आवश्यक है कि शरीर को गर्म हवा, तेज धूप, गंदगी से बचाएँ। व्यायाम करें खुली हवा में टहले। होम्योपैथी की सीपिया, सिकेल का साइलीसिया और सारसपरिला आदि दवाइयाँ बुढ़ापे की झुर्रियों से मुक्ति दिला सकती है। 


 30 दिनों में गंजापन दूर करने के अचूक उपाय

*जवानी का भरा-पूरा शरीर बुढ़ापे में कमजोर हो जाता है। शरीर में ताकत नहीं रहती। उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिये जरूरी है कि युवा अवस्था में संतुलित और पौष्टिक अहार लिया जाये। बुढ़ापे में शरीर की कमजोरी को दुरूस्त रखने के लिये अल्काल्फा क्यू एवं ऐबेना सेटाइवा क्यू का प्रयोग किया जा सकता है।
*वृद्धावस्था की एक बड़ी समस्या है भूलने की आदत चिकित्सीय भाषा में इसे सेनाइल डिमेन्सिया कहा जाता है। एसिडफास, लाइकोपोडियम, वैराइटाकार्व एवं एनाकार्डियम आदि दवाइयां चिकित्सक की सलाह पर ली जायें तो भूलने की समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
* वृद्धावस्था में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने की सम्भावना ज्यादा रहती है। इस रोग में पेशाब के समय दर्द आदि तकलीफें होती है। जब प्रोस्टेट ग्रंथि ज्यादा बढ़ जाती है तो एलोपैथिक चिकित्सक केवल आपरेशन का उपाय बताते है। जबकि होम्योपैथिक दवाईयों द्वारा इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। इस रोग में पेशाब में जलन, बूंद-बूंद कर पेशाब आना, पेशाब के समय दर्द आदि तकलीफें होती है। इस समस्या से निबटने में सेबाल सेरूलाटा क्यू, परेरा ब्रावा क्यू, मर्कसाल आदि दवाइयाँ काफी लाभप्रद है। 





*बुढ़ापे में अनेक लोगों की कमर झुक जाती है। इसका प्रमुख कारण है। शरीर की हड्डियों में भुरभुरापन आदि। यह कैल्शियम की कमी से होता है। यदि जवानी में कैल्शियम युक्त आहार पर्याप्त मात्रा में लिये जाएँ व साथ ही साथ कैल्फेरिया कास 6 एक्स प्रयोग किया जाये तो इस समस्या तथा इससे होने वाली तकलीफों से बचा जा सकता है।
*वृद्धावस्था में आर्थराइटिस, गठिया एवं जोड़ों के रोग घेर लेेते हंै। इसमें रसटाक्स, लीडम पाल, रूटा जी , अर्निका, ब्रायोनिया जैसी दवाइयाँ रामबाण की तरह असर करती है।
*वृद्धावस्था में रक्त धमनियों में मोटेपन की समस्या ज्यादा रहती है। चिकित्सीय भाषा में इसे आर्टिरयो स्क्लोरोसिस कहा जाता है। काली म्यूर, ब्राइटा म्योर, आरम नेट्रम म्यूरेटिकम जैसी होम्योपैथिक दवाइयाँ इस समस्या से निबटने में काफी कारगरहैं।


मिर्गी रोग के  प्रभावी उपचार 

* वृद्धावस्था में मोतियाबिंद की समस्या आम है। काफी लोग इससे पीडि़त रहते है। यदि समय से उपचार न कराया जाय तो अंधापन भी हो सकता है। सिनरेरिया मेरिटिमा सक्कस डालने की दवाई एवं कैल्केरिया फ्लोर एवं कोनियम खाने की होम्योपैथिक दवाइयाँ मोतियाबिंद होने से रोकती हैं।
* वृद्धावस्था में कुछ लोगो के कानो से सीटी की आवाजें आने लगती है। जिससे सुनने में काफी परेशानी होती है। इस समस्या के लिये थायोसिनमिनम होम्योपैथिक औषधि काफी फायदेमंद है। कम सुनाई पड़ने की समस्या में एम्ब्राग्रेसिया औषधि इस तकलीफ से छुटकारा दिलाने से सहायक होती है। बुढ़ापा कष्टदायक न हो। वह समय से पहले न आयें इसके लिये होम्योपैथिक दवाइयों का प्रयोग करें


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार