शरीर के लिए फायदेमंद दही लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शरीर के लिए फायदेमंद दही लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

13.1.17

शरीर के लिए फायदेमंद दही वसंत ऋतु मे हानिकारक क्यूँ



वसंत ऋतु
इस ऋतु में सूर्य की तीक्ष्णता बढ़ने से कफ पिघलने लगता है जिस कारण शरीर की अग्नि ख़ास तौर पर जठराग्नि मंद पड़ जाती है.
पथ्यापथ्य: जौ, शहद, आम का रस लेना इस ऋतु में हितकर है. किण्वित आसव, अरिस्ट अथवा काढ़ा या फिर गन्ने का रस लेना इस ऋतु में लाभकारी है. मुश्किल से पचने वाले ठोस , ठंडे, मीठे, अम्लीय, वसायुक्त, पदार्थ नही लेने चाहिए.

जीवनचर्या: 

व्यायाम, सुखी घर्षण वाली मालिश, नास्य, मालिश के बाद कपूर, चंदन और कुमकुम-युक्त पानी से स्नान, इस ऋतु में करने योग्य है. इस ऋतु में दिन में अतिरिक्त स्नान नही करना चाहिए.
    दही का भोजन के अंग एवं औषध के रूप में प्रचलन प्राचीनकाल से अनवरत चला आ रहा है। दही का शरीर को पोषण करने के साथ-साथ औषधीय प्रयोग भी है।
दही के गुणकर्मों के अनुसार आयुर्वेद में दही सेवन के तरीके एवं उसका किन व्यक्ति/ रोगी को सेवन निषेध एवं ऋतु अनुसार सेवन विधि का वर्णन विस्तृत रूप में प्राप्त होता है। परंतु वर्तमान समय में दही सेवन के तरीके, समय, प्रयोग आदि को अनदेखा किया जाता रहा। जिससे कफज रोग, जुकाम, कोलेस्ट्राल, मोटापा आदि बढ़ने में मदद मिलती है।
दही का प्रयोग कोलेस्ट्राल बढ़ने पर न करें क्योंकि दही में एक आयुर्वेदोक्त विशेष गुण 'अभिष्यंद' होता है। अभिष्यंद गुण/ कर्म, शरीर के स्रोतों (चेनल्स) धमनी आदि में अवरोध उत्पन्न करता है। अतः यह कोलेस्ट्रोल को और अधिक बढ़ाता है व धमनी में अधिक रुकावट उत्पन्न करता है। अभिष्यंद गुण के कारण ही इसे अतिसार रोग होने पर प्रयोग किया जाता है जिससे अतिसार बंद हो जाता है दही का भोजन के अंग एवं औषध के रूप में प्रचलन प्राचीनकाल से अनवरत चला आ रहा है। दही का शरीर को पोषण करने के साथ-साथ औषधीय प्रयोग भी है। दही के गुणकर्मों के अनुसार आयुर्वेद में दही सेवन के तरीके एवं.उसका किन व्यक्ति/रोगी को सेवन निषेध है।
   सामान्य जन में दही के प्रति यह धारणा होती है कि दही शीत होती है परंतु वास्तविकता यह है कि दही 'ऊष्ण' होता है। यह धारण इसलिए व्याप्त है कि दही कफ को बढ़ाता है एवं अभिष्यंदी होने से जुकाम आदि के लक्षण शरीर में उत्पन्न हो जाते हैं। ऊष्ण होने के कारण इसे ऊष्ण ऋतुओं में सेवन नहीं करना बताया है परंतु प्रायः सर्वजन इसका प्रयोग ग्रीष्म ऋतु में करते हैं। यदि ग्रीष्म ऋतु में प्रयोग करना भी है तो उसमें शक्कर आदि पदार्थ या आयुर्वेद में बताए पदार्थों को डालकर सेवन करना चाहिए या संस्कार करके प्रयोग करना चाहिए। संस्कार करने से दही या औषध आदि के गुण परिवर्तित हो जाते हैं। 'लस्सी' इसका श्रेष्ठ उदाहरण है एवं ग्रीष्म ऋतु में सेवन योग्य है। दही का प्रयोग हेमंत, शिशिर एवं वर्षा ऋतु में करना चाहिए।



आगामी बसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि बसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं। दही में अधिक कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन होता है एवं गुण-कर्मों के आधार पर यह अमृत तुल्य है परंतु अमृत का भी युक्ति से प्रयोग न करने पर वह विषतुल्य मारक हो जाता है एवं युक्तिपूर्वक विष का प्रयोग भी अमृत.तुल्य गुणकारी होता है अतः दही का प्रयोग उसके बताए गए प्रयोग निर्देशों के आधार पर करें।
निम्न परिस्थितियों में दही का सेवन कदापि न करें।
* पित्त विकार एवं कफ विकार
* रक्त विकार
* शोथ (सूजन)
* मेदोरोग (मोटापा)
* कोलेस्ट्रोल वृद्धि होने पर
दही में अधिक कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन होता है एवं गुण-कर्मों के आधार पर यह अमृत तुल्य है परंतु अमृत का भी युक्ति से प्रयोग न करने पर वह विषतुल्य मारक हो जाता है एवं युक्तिपूर्वक विष का प्रयोग भी अमृत तुल्य गुणकारी होता है
वैसे तो दही सबके लिये फायदेमंद होती है लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसे रात को खाने से बचना चाहिये। रात के वक्‍त दही शरीर में कफ दोष बढ़ाती है।
आयुर्वेद की माने तो रात के वक्‍त हमारे शरीर में कफ की प्राकृतिक प्रबलता बढ जाती है। इसलिये रात को दही का सेवन नहीं करना चाहिये क्‍योंकि यह समस्‍या को और भी ज्‍यादा बढा देगी जिससे पेट का रोग होगा।दही टेस्‍ट में खट्टी, तासीर में गर्म और पचाने में भारी होती है। यह वसा, ताकत, कफ, पित्त, पाचन शक्ति बढ़ाती है। शरीर में यदि सूजन आदि हो तो, दही खाने से हमेशा बचना चाहिये क्‍योंकि यह सूजन को और भी ज्‍यादा बढ़ा देती है। ध्‍यान दें, कि यह बात केवल खट्टी दही खाने के बारे में कही जा रही है।
खट्टी दही को कभी भी गरम कर के नहीं खाना चाहिये। दही को ना केवल रात में ही बल्‍कि बसंत में भी नहीं खाना चाहिये।पेट की समस्‍या हो या फिर पेशाब से संबन्‍धित समस्‍या, दही को शहद, घी, चीनी और आंवले के साथ खाने पर राहत मिलती है।
आयुर्वेद के नियम के अनुसार दही को जितना हो सके रात में खाने से बचना चाहिये। पर अगर आप को दही खानी ही खानी है तो दही खाते वक्‍त उसमें चुटकी भर काली मिर्च पावडर मिला लेना चाहिये। आप इसमें मेथी पावडर भी मिला सकते हैं।  

यह पेट से संबन्‍धित रोगों को भी दूर कर देगी।
रात को दही में शक्‍कर मिला कर बिल्‍कुल भी ना खाएं। दही की जगह पर आप बटर मिल्‍क यानी मठ्ठा या छाछ 

का सेवन करें तो अति उत्‍तम होगा।
दही, भारतीय थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. थाली में दही होने का मतलब है कि आपकी थाली स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्ट‍िक भी है.
हाल में हुई एक स्टडी के अनुसार, दही में मौजूद तत्व शरीर को कई तरीके से फायदा पहुंचाते हैं. ये प्रो-बायोटिक फूड कैल्शियम से भरपूर होता है. कैल्शियम की उपस्थिति दांत और हड्डियों को मजबूती देने का काम करती है.
कैल्शियम के साथ ही ये विटामिन और दूसरे ऐसे कई पोषक तत्वों से भी भरपूर है जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं. दही पाचन क्रिया के लिए भी बहुत कारगर है. य‍हां कुछ ऐसे ही कारणों का उल्लेख है जिससे ये साबित होता है कि दही खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है:
1. रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए
हर रोज एक चम्मच दही खाने से भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते हैं.
2. दांतों के लिए फायदेमंद
दही दांत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस उपस्थित होता है. ये हड्ड‍ियों की मजबूती के लिए भी बहुत फायदेमंद है. ये ऑस्ट‍ियोपोरोसिस और गठिया में राहत देने का काम करता है.
3. वजन घटाने में कारगर
दही में बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है. ये एक ऐसा तत्व है जो शरीर को फूलने नहीं देता है और वजन नहीं बढ़ने देने में सहायक होता है.
4. तनाव कम करने में
दही खाने का सीधा संबंध मस्त‍िष्क से है. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दही का सेवन करने वालों को तनाव की शिकायत बहुत कम होती है. इसी वजह से विशेषज्ञ रोजाना दही खाने की सलाह देते हैं.
5. ऊर्जा के लिए
अगर आप खुद को बहुत थका हुआ महसूस कर रहे हैं तो हर रोज दही का सेवन करना आपके लिए अच्छा रहेगा. ये शरीर को हाइड्रेटेड करके एक नई ऊर्जा देने का काम करता है


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि 

सेक्स का महारथी बनाने और मर्दानगी बढ़ाने वाले अचूक नुस्खे