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20.4.17

स्त्रियॉं की माहवारी(पीरियड्स) की समस्याओं के होम्योपैथिक उपचार





:   मासिक धर्म होना महिला के शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होता हैं. मासिक धर्म का पूरा चक्र 28 दिनों का होता हैं. कई महिलाओं को मासिक धर्म की अनियमितता की शिकायत रहती हैं. मासिक धर्म की अनियमितता का मतलब हैं. मासिक धर्म का समय पर न होना. किसी – किसी महिला को मासिक धर्म दो महीने में एक बार होते हैं तो किसी को एक महीने में दो तीन बार होते हैं. मसिक धर्म का अपने समय पर होना बहुत ही आवश्यक होता हैं. मासिक धर्म के शुरू होने की जैसे एक उम्र होती हैं. ठीक उसी प्रकार इसके समाप्त होने की भी उम्र होती हैं. किसी भी महिला को मासिक धर्म 32 साल तक होता हैं. जबसे महिला को मासिक धर्म होने शुरु होते तब से ही उसमे 32 साल जोड़ देने चाहिए. अर्थार्त इसके समाप्त होने तक महिला की उम्र 48, 49 या 50 हो सकती हैं. इससे पहले या बाद में मासिक धर्म के समाप्त होना मासिक धर्म की अनियमितता का सूचक होता हैं. यह अनियमितता महिला को कुछ शारीरिक व मानसिक कारणों से हो सकती हैं. तो चलिए इसके कारणों व लक्षणों के बारे में थोडा जान लेते हैं.
मासिक धर्म की अनियमितता के कारण
1. मासिक धर्म की अनियमितता महिला की किसी प्रकार की बिमारी के कारण भी हो सकती हैं. अगर कोई महिला एक महीने से अधिक समय तक बीमार हो तो उसे मासिक धर्म की अनियमितता की शिकायत हो सकती हैं.
2. अगर किसी महिला को थायराइड की बीमारी हैं. तो उसे भी मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या हो सकती हैं.
3. मासिक धर्म की अनियमितता गर्भावस्था की शुरुआत के कारण भी हो सकती हैं.

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5. कभी – कभी अधिक व्यायाम करने के कारण भी महिला को मासिक धर्म की अनियमितता की शिकायत हो जाती हैं. अधिक व्यायाम करने से महिला के शरीर में उपस्थित एस्ट्रोजन हार्मोन की संख्या में वृद्धि हो जाती हैं. जिससे मासिक धर्म रुक जाते हैं और महिला को मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या का सामना करना पड़ता हैं.4. अधिकतर स्त्रियां हमेशा परेशान रहती हैं. जिससे उनके उपर मानसिक दबाव व तनाव बढ़ जाता हैं. प्रत्येक महिला के शरीर में तिन प्रकार के हार्मोन होते हैं. एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन तथा टेस्टोंस्टेरोन आदि. इन तीनों में से अगर महिला अधिक तनाव में रहती हैं तो पहले दो हार्मोन पर सीधा असर पड़ता हैं. जिसके कारण महिला के मासिक धर्म में अनियमितता होनी शुरू हो जाती हैं.

6. मासिक धर्म की अनियमितता महिला के खानपान में असंतुलन के कारण भी हो जाती हैं. 
7. मासिक धर्म की अनियमितता महिला के शरीर का वजन बढने या घटने के कारण भी हो जाती है.
मासिक धर्म की अनियमितता के लक्षण
1. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला के गर्भाशय में दर्द होता हैं.
2. मासिक धर्म की अनियमितता से महिला को भूख कम लगती हैं.
3. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला के शरीर में दर्द रहता हैं. खासतौर महिला के स्तनों में, पेट में, हाथ – पैर में तथा कमर में.
4. मासिक धर्म की अनियमितता के होने पर महिला को अधिक थकान भी महसूस होती हैं.
5. मासिक धर्म के ठीक समय पर न होने के कारण महिला को पेट में कब्ज तथा दस्त की भी शिकायत हो जाती हैं.
6. मासिक धर्म की अनियमितता होने से महिला के शरीर में स्थित गर्भाशय में रक्त का थक्का बन जाता हैं.

मासिक धर्म की समस्याओं की होम्योपैथिक  दवा
 : 
नक्स वोमिका :इसके कुछ लक्षण पल्स के लक्षणों के विपरीत हैं। दुबला-पतला शरीर, क्रोधी, झगड़ालू, उग्र स्वाभाव, चिड़चिड़ापन, मेहनती, काम में लगी रहने वाली, तनाव से ग्रस्त रहने वाली महिला को मासिक स्राव जल्दी-जल्दी होता हो, देर तक होता रहे, ज्यादा मात्रा में हो, ठण्ड या ठण्डी हवा से रोग बढ़ता हो, तो ‘नक्सवोमिका’ 30 शक्ति की 5-6 गोली दिन में 3 बार लेनी चाहिए।
सीपिया : यह दवा दुबले-पतले शरीर वाली, लम्बे कद की, नाक और गालों पर झाई के दाग हों, कामकाज में रुचि न हो, उदासीन, विरक्त, दु:खी, अधीर, निराश, हतोत्साह, किसी से भी मोह न हो, गर्भाशय खिसकता-सा अनुभव करें, जैसे बाहर निकल पड़ेगा, गुदाद्वार में कुछ अड़ा हुआ-सा लगे, कब्ज हो, ठण्ड से रोग बढ़े, मासिक धर्म में रुकावट हो, मात्रा में कमी हो या देरी से हो, तो ‘सीपिया’ 30 शक्ति की 5-6 गोलियां दिन में 3 बार चूसनी चाहिए।
मैगफॉस : ऋतु स्राव के समय दर्द होता हो और पेट दबाने से या सेंक करने से आराम मिलता हो, तो मैगफॉस 30 शक्ति की 5-6 गोलियां चूसनी चाहिए। दर्द में लाभ न हो, तो दो घण्टे बाद फिर एक खुराक ले सकते हैं। दर्द दूर करने वाली यह श्रेष्ठ दवा है।
कैमोमिला : स्त्री का स्वभाव चिड़चिड़ा, क्रोधी और रूखा हो, बच्चों को डांटती-डपटती रहती हो, जरा-सी बात पर भड़क उठती हो और ऐसे स्वभाव की महिला को काले रंग का, थक्केदार टुकड़ों वाला ऋतु स्राव भारी मात्रा में होता हो, ऋतु स्राव के समय दर्द भी होता हो, तो ‘कैमोमिला’ 30 शक्ति की 5-6 गोलियां दिन में 3 बार लेनी चाहिए।
थ्लेस्पी बसf पेस्टोरिस :
जब किसी महिला को भारी मात्रा में रक्त स्राव हो, रुक-रुक कर हो, पर बन्द न होता हो, बहुत कष्ट और शूल के साथ हो, महिला की हालत संभल न रही हो, कमजोरी बढ़ रही हो, पेट में काट-सी चलती हो, तो ‘थ्लेस्पी बसf पेस्टोरिस’ के मूल अर्क की 10-10 बूंद आधा कप पानी में घोलकर दिन में 3 बार देने से आराम होता है।
हेमेमिलिस : बहत ज्यादा मात्रा में रक्त स्राव होना, स्राव का रंग काला होना, स्राव के साथ टुकड़े गिरना आदि लक्षणों पर किसी भी प्रकृति की महिला को ‘हेमेमिलिस’ के मदर टिंचर (मूल अर्क) या 6 शक्ति के टिंचर की 5-6 बूंद 2 बड़े चम्मच भर पानी में घोल कर 15-15 मिनट से 3-4 बार देने पर रक्त स्राव पर नियंत्रण हो जाता है। ग्रेफाइटिस : यदि महिला मोटी-ताजी और चर्बीयुक्त शरीर वाली हो, पल्सेटिला के गुण वाली हो, पर किसी त्वचा रोग से भी ग्रस्त हो, शीत प्रकृति वाली हो, शंकाग्रस्त रहती हो और अनियमित मासिक धर्म होता हो, देर से तथा कम मात्रा में होता हो, नियत समय पर न होता हो, पीले रंग वाला, पतला और हल्का पानी जैसा होता हो, तो ‘ग्रेफाइटिस’ 30 शक्ति की 5-6 गोलियां दिन में 3 बार चूसकर सेवन करनी चाहिए।
पल्सेटिला : यह दवा महिलाओं की मित्र-औषधि मानी जाती है, क्योंकि इस दवा के अधिकांश लक्षण नारियों के गुणों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए जिन पुरुषों में भी ये गुण पाये जाते हैं, उनके लिए भी पल्सेटिला उपयोगी सिद्ध होती है। लज्जा, नम्रता, सौम्यता, कोमलता, मृदुलता, अधीरता, व्याकुलता आदि पल्सेटिला के मानसिक गुण हैं। मोटापा, मांसलता, गुदगुदापन इसके शारीरिक लक्षण हैं। खुली हवा पसन्द करना, बन्द कमरे में परेशानी अनुभव करना, गर्मी से परेशानी और शीतलता से राहत होना, भूख-प्यास कम लगना, सहानुभूति मिलने या रो लेने से अच्छा अदूभव करता आदि पल्सेटिल के स्वभावगत लक्षण हैं। जो युवती या महिला मानसिक, शारीरिक और स्वभाव की दृष्टि से ऐसे लक्षणों वाली हो और उसका मासिक ऋतु स्राव अनियमित हो, ऋतु साव के समय दर्द हो, दर्द के समय ठण्ड लगे, दर्द का स्थान बदलता रहता हो और ऋतु स्राव के प्रारंभ मध्यकाल या अन्त में दर्द होता हो, कभी कम व कभी ज्यादा मात्रा में होता हो, कभी जल्दी व कभी देर से होता हो यानी हर दृष्टि से जब मासिक ऋतु स्राव अनियमित हो और दर्द भी हो, तो ‘पल्सेटिला’ 30 शक्ति में 5-6 गोलियां सुबह-दोपहर-शाम चूस लेनी चाहिए।
इपिकॉक : मासिक स्राव ज्यादा मात्रा में हो रहा हो और स्राव का रंग चमकीला लाल रंग वाला हो, जी मतली करता हो, सांस में भारीपन हो (या महिला दमा रोग से ग्रस्त हो), रहर-हकर ऋतु स्राव बढ़ जाता हो, गर्मी से रोग बढ़े और ठण्डी खुली हवा से आराम मालूम दे, तो ‘इपिकॉक’ 30 शक्ति 5-6 गोलियां दिन में 3 बार चूसनी चाहिए।
साइक्लामेन : पल्सेटिला के लक्षणों वाली महिला को यदि प्यास खूब लगती हो, खुली हवा पसन्द न हो, रोने से जी हल्का होता हो, एकान्त पसन्द करती हो, आत्मग्लानि का अनुभव करती हो, ऋतु स्राव के समय चक्कर आते हों, दुःखी, निराश और उदास रहे, मासिक धर्म के समय दर्द होता हो, तो इन लक्षणों वाली महिला को मासिक धर्म की अनियमितता दूर करने के लिए साइक्लामेन 30 दिन में 3 बार लेनी चाहिए।

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