हरड़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हरड़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

28.6.16

त्रिफला आयुर्वेद की महान औषधि



त्रिफला आयुर्वेद में कई रोगों का सटीक इलाज करता है। यह 3 औषधियों से बनता है। बेहड, आंवला और हरड इन तीनों के मिश्रण से बना चूर्ण त्रिफला कहा जाता है। ये प्रकृति का इंसान के लिए रोगनाशक और आरोग्य देने वाली महत्वपूर्ण दवाई है। जिसके बारे में हर इंसान को पता होना चाहिए। ये एक तरह की एन्टिबायोटिक है। त्रिफला आपको किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर मिल सकता है। लेकिन आपको त्रिफला का सेवन कैसे करना है और कितनी मात्रा में करना है ये भी आपको पता होना चाहिए। हाल में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है की त्रिफला के सेवन से कैंसर के सेल नहीं बढ़ते । त्रिफला के नियमित सेवन से चर्म रोग, मूत्र रोग और सिर से संबन्धित बीमारियां जड़ से ख़त्म करती है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

 *संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को ह्रदयरोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, नेत्ररोग, पेट के विकार, मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती। यह कोई 20 प्रकार के प्रमेह, विविध कुष्ठरोग, विषमज्वर व सूजन को नष्ट करता है। अस्थि, केश, दाँत व पाचन- संसथान को बलवान बनाता है। इसका नियमित सेवन शरीर को निरामय, सक्षम व फुर्तीला बनाता है।  गर्म पानी से सोते समय एक चम्मच लेने से क़ब्ज़ नही रहता!त्रिफला के फायदे-
*.रात को सोते वक्त 5 ग्राम (एक चम्मच भर) त्रिफला चुर्ण हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होती है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*.त्रिफला व ईसबगोल की भूसी दो चम्मच मिलाकर शाम को गुनगुने पानी से लें इससे कब्ज दूर होती है।
*इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।
सुबह पानी में 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण साफ़ मिट्टी के बर्तन में भिगो कर रख दें, शाम को छानकर पी लें। शाम को उसी त्रिफला चूर्ण में पानी मिलाकर रखें, इसे सुबह पी लें। इस पानी से आँखें भी धो ले। मुँह के छाले व आँखों की जलन कुछ ही समय में ठीक हो जायेंगे।
*शाम को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगो दे सुबह मसल कर नितार कर इस जल से आँखों को धोने से नेत्रों की ज्योति बढती है।
*एक चम्मच बारीक़ त्रिफला चूर्ण, गाय का घी 10 ग्राम व शहद 5 ग्राम एक साथ मिलाकर नियमित सेवन करने से आँखों का मोतियाबिंद, काँचबिंदु, द्रष्टि दोष आदि नेत्ररोग दूर होते हैं। और बुढ़ापे तक आँखों की रोशनी अचल रहती है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

*त्रिफला के चूर्ण को गौमूत्र के साथ लेने से अफारा, उदर शूल, प्लीहा वृद्धि आदि अनेकों तरह के पेट के रोग दूर हो जाते हैं।
त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है, त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियां आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं।
*चर्मरोगों में (दाद, खाज, खुजली, फोड़े-फुंसी आदि) सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना चाहिए।
*एक चम्मच त्रिफला को एक गिलास ताजे पानी में दो- तीन घंटे के लिए भिगो दे, इस पानी को घूंट भर मुंह में थोड़ी देर के लिए डाल कर अच्छे से कई बार घुमाये और इसे निकाल दे। कभी कभार त्रिफला चूर्ण से मंजन भी करें इससे मुँह आने की बीमारी, मुंह के छाले ठीक होंगे, अरूचि मिटेगी और मुख की दुर्गन्ध भी दूर होगी।
*त्रिफला, हल्दी, चिरायता, नीम के भीतर की छाल और गिलोय इन सबको मिला कर मिश्रण को आधा किलो पानी में जब तक पकाएँ कि पानी आधा रह जाए और इसे छानकर कुछ दिन तक सुबह शाम गुड या शक्कर के साथ सेवन करने से सिर दर्द कि समस्या दूर हो जाती है।

बवासीर  के  रामबाण  उपचार 

*त्रिफला एंटिसेप्टिक की तरह से भी काम करता है। इस का काढ़ा बनाकर घाव धोने से घाव जल्दी भर जाते है।
*त्रिफला पाचन और भूख को बढ़ाने वाला और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि करने वाला है।
*मोटापा कम करने के लिए त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर ले। त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर, शहद मिलाकर पीने से चरबी कम होती है।
*त्रिफला का सेवन मूत्र-संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में बहुत लाभकारी है। प्रमेह आदि में शहद के साथ त्रिफला लेने से अत्यंत लाभ होता है।
*त्रिफला की राख शहद में मिलाकर गरमी से हुए त्वचा के चकतों पर लगाने से राहत मिलती है।
*5 ग्राम त्रिफला पानी के साथ लेने से जीर्ण ज्वर के रोग ठीक होते है।
*5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गोमूत्र या शहद के साथ एक माह तक लेने से कामला रोग मिट जाता है।
*टॉन्सिल्स के रोगी त्रिफला के पानी से बार-बार गरारे करवायें।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

त्रिफला दुर्बलता का नास करता है और स्मृति को बढाता है। दुर्बलता का नास करने के लिए हरड़, बहेडा, आँवला, घी और शक्कर मिला कर खाना चाहिए।
*त्रिफला, तिल का तेल और शहद समान मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण कि 10 ग्राम मात्रा हर रोज गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट, मासिक धर्म और दमे की तकलीफे दूर होती है इसे महीने भर लेने से शरीर का सुद्धिकरन हो जाता है और यदि 3 महीने तक नियमित सेवन करने से चेहरे पर कांती आ जाती है।
*त्रिफला, शहद और घृतकुमारी तीनो को मिला कर जो रसायन बनता है वह सप्त धातु पोषक होता है। त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषकर नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। दृष्टि दोष, रतौंधी (रात को दिखाई न देना), मोतियाबिंद, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है और बाल काले, घने व मजबूत हो जाते हैं।
*डेढ़ माह तक इस रसायन का सेवन करने से स्मृति, बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

त्रिफला के नुकसान-
यदि आप त्रिफला का प्रयोग बिना डाक्टर के परामर्श के करते हैं तो इससे डायरिया हो सकता है। क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी करता है। और इंसान को डायरिया हो जाता है।
ब्लड प्रेशर-
त्रिफला का अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। और ब्लड प्रेशर के मरीजों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कई बार कुछ लोग पेट साफ करने के लिए त्रिफला का सेवन करने लगते हैं लेकिन ऐसे में वे नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करने लगते हैं जिस वजह से उन्हें अनिद्रा  और बेचैनी की समस्या हो सकती है।
*इसमें कोइे दो राय नहीं है कि त्रिफला सेहत के लिए बेहद असरकारी और फायदेमंद दवा है। 

पिपली के गुण प्रयोग लाभ 

2.6.16

एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार // Eczema home remedies



एक्जिमा (Eczema) सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है और इसके कारण कष्ट भी होता है | चिकित्सक अक्सर इसमें स्टेरॉयडल क्रीम (steroidal cream) लगाने की सलाह देते हैं | कई लोगों को स्टेरॉयड के उपयोग से कई तरह के साइड इफ़ेक्ट हो जाते हैं इसलिए स्टेरॉयड हमेशा सबके लिए उचित नहीं होते हैं | परन्तु अच्छी बात ये है कि यहाँ कई ऐसी चीजें हैं जिनसे खुजली, रूखापन और त्वचा में होने वाले परिवर्तन को ठीक किया जा सकता हैं |
*नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा। नीम्बू को बीच से आधा काटकर सीधे एक्जिमा पर लगायें | इससे कुछ बदलाव दिखाई देंगे | जलन होने की उम्मीद कर सकते है परन्तु जलन सिर्फ तब होती है जब आप इसे खुरचते है | नीम्बू आपकी त्वचा के अन्दर संचित हुई सूजन को हटाता है इसलिए जलन होती है | अधिकांशतः एक्जिमा वाली त्वचा के फट जाने से जलन होती है |
*खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
*गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
बार-बार नहाने से बचें, गुनगुने पानी का प्रयोग करें: बार-बार नहाने से त्वचा से नमी निकल जाती है और एक्जिमा को बदतर बना देती है | नहाने की एक सीमा रखें और अगर हो सके तो प्रत्येक 1 से 2 दिन शावर लें | भापयुक्त या ठंडा शावर लेने से बचें और 15 से 20 मिनट तक ही लें | खुद नरमी से थपथपाकर पोंछने के लिए साफ़ और सूखी टॉवेल इस्तेमाल करें |
*शावर के बाद मॉशसचराइज़र लगायें | अपनी त्वचा को नमी देने के लिए शिया (shea) बटर, एवोकेडो या केस्टर ऑइल लगायें | इस बात की सावधानी रखें कि एक्जिमा से पीड़ित लोग इन ऑयल्स को सहन कर सकें क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है और आपको पता लगाना है कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या हैं |
*टब में लम्बे समय तक न रहें, कभी-कभी पानी आपकी त्वचा को मुरझा सकता है | आप नहीं चाहेंगे कि आपका एक्जिमा उत्तेजित हो क्योंकि त्वचा में उत्तेजना से एक्जिमा की स्थिति में खुजली की सम्भावना बढ़ जाती है |
*खुजली होने पर गुनगुने पानी से नहाएं और तुरन्‍त बाद किसी माश्‍चराइजर या क्रीम का यूज न करते हुए ऑलिव ऑयल यानि जैतून के तेल का इस्‍तेमाल करें। अच्‍छे से हल्‍के - हल्‍के मालिश करने पर खुजली वाली जगह में आराम मिलेगा।
*एलोवेरा का प्रयोग करें: एलोवेरायुक्त उत्पाद खरीदने की बजाय एलोवेरा के वास्तविक पौधे से एलोवेरा लें | एक पत्ति को तोड़कर निचोड़ें और ज़ेल (gel) को निकालें | एक्जिमा से ग्रस्त त्वचा पर इस ज़ेल को लगायें और सूखने दें | कई बार इस्तेमाल के लिए इसकी पत्तियों को रेफ्रीजिरेटर में संग्रह करके रखा जा सकता है | शुद्ध एलोवेरा से कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होते, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर इसका उपयोग करना पूरी तरह से सुरक्षित है |एलोवेरा पौधे के ज़ेल-समान सार भाग का उपयोग हजारों सालों से मॉशसचराइज़र और सूजनविरोधी (anti-inflammatory) उपचार के रूप में किया जाता रहा है
 *कई लोगों ने एक्जिमा के इलाज़ में इसे प्रभावकरी पाया है क्योंकि यह खुजली को शांत करता है और रुखी, शल्कीय (flaky) त्वचा को नमी देता है |
*हरड़ को बारीक पीस लें। दो चम्‍मच हरड़ को दो गिलास पानी में उबाल कर रख लें। जहां भी खुजली हो, उस पानी को लगा लें कुछ देर में आराम मिल जाएगा।
*नारियल तेल प्रयोग करें: आर्गेनिक नारियल तेल (Organic cold pressed virgin coconut oil) का प्रयोग सामान्यतः मॉशसचराइज़र के रूप में किया जाता है

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने से मूत्र समस्या का बिना आपरेशन 100% समाधान

किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि



राम मिलता है।