18.8.24

अनिद्रा के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय nind ke gharelu upchar

 




अनिद्रा (Insomnia) से परेशान व्यक्ति को रात में काफ़ी देर तक बिस्तर पर पड़े रहने से भी नींद नहीं आती है। आयुर्वेद की माने तो यह किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं बल्कि किसी दूसरे रोग से या फिर मानसिक असंतुलन से होने वाली समस्या है।
बता दें कि इसके अलग-अलग कारण जैसे अत्यधिक चिंता, तनाव, मन में कोई न कोई बात सोचते रहना, डर, पाचन तंत्र ठीक न होना हो सकते हैं। इस समस्या में एक बार जागने पर दोबारा सोने में भी बहुत ज़्यादा मुश्किल होने लग जाती है।
आज के समय में लोग इस तनाव भरी स्थिति को दूर करने के लिए काफ़ी दवाइयों का सेवन करते नज़र आते हैं जो उनके शरीर में किडनी और लीवर को नुक़सान पहुंचा सकती हैं। अगर अनिद्रा (insomnia) नींद नहीं आने के कारण के और लक्षणों को अच्छे से जान लिया जाए तो आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार की सहायता से इस समस्या को जल्दी दूर किया जा सकता है।

आयुर्वेद में अनिद्रा क्या होती है- What is Insomnia in Ayurveda

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार अगर आपके शरीर में तीनों दोष यानी वात, पित्त और कफ संतुलित हैं तो आपको किसी भी प्रकार की बीमारी हानि नहीं पहुंचा सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब वात दोष असंतुलित रहने लग जाए तो व्यक्ति अनिद्रा से ग्रसित रहने लग जाता है। वर्तमान समय में लोगों का खान-पान और जीवनशैली बहुत खराब हो गई है जिसके चलते वह अनिद्रा जैसी अनेक समस्याओं से परेशान रहने लग जाता है।
अनिद्रा (Insomnia) नींद नहीं आने के कारण

अगर आप इस समस्या को जड़ से ख़त्म करना चाहते हैं तो आपको इसके मुख्य कारणों की जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको उन्ही के बारे में बताने जा रहे हैं, सही समय पर इनके उपर ध्यान देकर आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा अनिद्रा से बचा जा सकता है।आज के समय में लोग आर्थिक परेशानी, पारिवारिक और निजी ज़िन्दगी को लेकर अनेक बातों के बारे में सोचते रहते हैं जिसका प्रभाव उनके मस्तिष्क पर होने लगता है। मानसिक असंतुलन को अनिद्रा का सबसे अहम कारण माना जाता है।
जो लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं उनको यह समस्या ज़्यादा परेशान करती है।
एक शोध कहती है कि कई लोग रात को ज़्यादा खाना खा लेते हैं जिसके बाद उनको बेचैनी और घबराहट होने लगती है, यह भी अनिद्रा का मुख्य कारण है।
अधिक चिंता और तनाव की वज़ह से मस्तिष्क की अनेक बीमारियां होने का डर बना रहता है जो अनिद्रा का कारण बन सकती हैं।
जो लोग अपनी किसी भी प्रकार की बीमारी को दूर करने के लिए काफ़ी मात्रा में दवाइयों का सेवन कर रहे हैं वह भी अनिद्रा का आसान शिकार बन सकते हैं।
अगर आपकी पाचन क्रिया खराब है तो आप जल्दी इस समस्या से ग्रसित हो सकते हैं।
इन सभी के अलावा अल्जाइमर, थायराइड, अस्थमा रोग, शुगर, हृदय रोग और जोड़ों की किसी भी प्रकार की बीमारी के कारण भी अनिद्रा की समस्या आपको परेशान कर सकती है।

नींद न आने के मुख्य लक्षण: 

जब व्यक्ति को काफ़ी देर तक बिस्तर पर पड़े रहने पर भी नींद नहीं आती।
कई बार लोग रात को जागने के बाद दोबारा सो नहीं पाते।
सुबह नींद से उठने के बाद भी सुस्ती आना।
थका-थका रहना, घबराहट और आलस्य इसके मुख्य लक्षण।
नींद पूरी न होने की वज़ह से चिड़चिड़ापन रहना।

अनिद्रा को दूर करने के घरेलू उपाय

अश्वगंधा लाभदायक—इसके चूर्ण को अगर वैद्य की सलाह के अनुसार दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ सेवन किया जाए तो अनिद्रा की समस्या को जल्दी ख़त्म किया जा सकता है।

सरसों का तेल फायदेमंद—

आयुर्वेद के मुताबिक़ रात को सोने से पहले अगर व्यक्ति रोजाना पैर के तलवों में इस तेल की अच्छे से मालिश करता है तो रात को अच्छी नींद आने में सहायता मिलती है।

दालचीनी चूर्ण उपयोगी—

रात को सोने से पहले एक गिलास देसी गाय के गुनगुने दूध में आधा चम्मच दालचीनी चूर्ण मिलाकर सेवन करने से अनिद्रा में लाभ मिलता है।

जायफल उत्तम औषधि—

रात में अगर एक गिलास दूध में एक चम्मच जायफल चूर्ण मिश्रण करके कम से कम 1 महिना सेवन किया जाए तो अनिद्रा की परेशानी दूर हो सकती है।
ये जड़ी-बूटियां मस्तिष्क के लिए एक टॉनिक के रूप में काम करती हैं जो सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं और तनाव देने वाले हार्मोन को संतुलित करने में सहायता प्रदान करती हैं।
अच्छी और आरामदायक नींद पाने के लिये इन 10 तरीक़ों को अपनाएं।
सोने और जागने का समय निर्धारित करें
लगभग हर रोज़ एक ही समय पर सोने और जागने का एक नियमित समय तय करें, इससे आपके शरीर को अच्छी और बेहतर नींद मिलेगी। सोने के लिए ऐसा समय चुनें जब आपको थकान महसूस हो रही हो और आपको आसानी से नींद आ जाये।
माहौल ऐसा बनाये जिसमे आपको आसानी से नींद आ जाये
आपके आराम करने वाले कमरे का आपके लिये शांतिपूर्ण होना चाहिये। आपके कमरे का तापमान, रोशनी और शोर सभी पूरी तरह नियंत्रित होनी चाहिये, जिससे आपके सोने के कमरे का वातावरण आपके अच्छी नींद लेने मे सहायक बने।
अगर आपके पास कोई पालतू जानवर हैं जो आपके साथ आपके कमरे मे सोता हैं, और आपको रात मे परेशान करता हैं तो ज्यादा अच्छा रहेगा आप इसे दूसरे कमरे मे सुला दे ,ताकि आप आराम से सो सके।

आरामदायक बिस्तर पर सोएँ

ऐसे किसी गद्दे पर आराम से सोना मुश्किल है जो या तो बहुत नरम या बहुत कठोर है, या एक बिस्तर जो बहुत छोटा या पुराना है।

नियमित व्यायाम करे

नियमित रूप से मध्यम शक्ति वाले व्यायाम करना, जैसे तैराकी या पैदल चलना, दिन भर के तनाव को दूर करने में मदद कर सकता है। सुनिश्चित करें कि आप सोते समय जोरदार व्यायाम नहीं करते हैं, जैसे दौड़ना या जिम, क्योंकि यह आपको जागृत रख सकता है।
आप अपनी सुविधा के अनुसार अपने आप को किस तरह तंदुरुस्त रख सकते हैं देखे।

कैफीन वाली चीजों को कम लें

चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स और कोला जैसी चीजों से दूर रहे, ख़ासकर शाम के समय इनचीजों को न ले। कैफीन आपकी नींद मे बाधा उत्पन्न कर सकता है,और आप अच्छी नींद नहीं ले पाते। इसलिये अच्छा रहेगा आप सोने से पहले गर्म दूध या हर्बल चाय पीये।
जरूरत से ज्यादा खाना और शराब, इनका सेवन देर रात को करने से भी, आपकी नींद के नियम मे बाधा उत्पन्न होती हैं। शराब का सेवन करने से आपको पहले से ही नींद आने लगती हैं और जब रात मे सोने का समय होता हैं तब आपकी नींद आने मे परेशानी होती हैं।

धुम्रपान न करें

निकोटीन एक उत्तेजक पदार्थ है। धूम्रपान करने वालों को नींद आने में अधिक समय लगता है, वे बार-बार उठते हैं, और अक्सर उनकी नींद बाधित होती है।

जरूरत से ज्यादा खाना न खायें

जरूरत से ज्यादा खाना और शराब, इनका सेवन देर रात को करने से भी, आपकी नींद के नियम मे बाधा उत्पन्न होती हैं। शराब का सेवन करने से आपको पहले से ही नींद आने लगती हैं और जब रात मे सोने का समय होता हैं तब आपकी नींद आने मे परेशानी होती हैं।
सोने से पहले थोडा रिलैक्स करें
गर्म पानी से नहा लें, शांत संगीत सुनें या मन और शरीर आराम देने वाले व्यायाम करें।
आपके डॉक्टर आपको ऐसे सीडी सुनने का सलाह दे सकते हैं जिन्हें सुनकर आपकी थकान दूर हो और आपको आराम महसूस हो।‌

यदि आपको नींद नहीं आ रही हैं, तो उठ जाएं

अगर आपको नींद नहीं आ रही है, तो लेटे हुए इसपर चिंता करने की जरुरत नहीं हैं। उठ जाइए और ऐसा कुछ कीजिए जिससे आपको आराम मिले और दोबारा नींद आ जाए, तब दोबारा सोने जाएं।

इन ख़ास बातों का रखें ध्यान:

निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर और अपनी दिनचर्या में परिवर्तन करके आप अनिद्रा की समस्या से सुरक्षित रह सकते हैं।अपने भोजन में देसी गाय का दूध, दलिया और बादाम को महत्त्व दें।
दोपहर के भोजन में सलाद का सेवन ज़रूर करें क्योंकि इसमें पाया जाने वाला लैक्टोकैरियम तत्व शरीर में जठराग्नि को मज़बूत बनाए रखता है।
रात को सोने से पहले एक गिलास देसी गाय का दूध नियमित रूप से सेवन करें।
नशीले पदार्थों जैसे शराब, सिगरेट और तम्बाकू के सेवन से बचें।
सूर्योदय से पहले उठकर रोजाना 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलें।
योग, व्यायाम और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में महत्त्वपूर्ण स्थान दें।
तला हुआ भोजन और फ़ास्ट फ़ूड से आज ही दूरी बनाएं।






17.8.24

गठिया संधिवात का सही इलाज क्या है?गठिया रोगी क्या खाएं क्या परहेज करें


                                                 

गठिया को जितना हो सके उतने प्राकृतिक रूप से इलाज करना चाहिए। कैमिकलयुक्त दवाओं से बेहतर है कि आप इसको घरेलू या आयुर्वेदिक रूप से ठीक करें। इसका कारण यह है कि प्राकृतिक रूप से बनी जड़ी बूटियों में किसी प्रकार के साइड इफेक्ट नहीं होता। गठिया को ठीक करने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों का प्रयोग कर सकते हैं।

जितना हो सके उतना ज़्यादा पानी पीएं। इससे आप दिनभर हाइड्रेटिड रहेंगें।
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक माना जाता है। चोट लगने पर हल्दी का प्रयोग किया जाए, तो जल्द राहत मिलती है। इसमें करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है जिससे शरीर में सूजन कम होने लगती है। साथ ही ये आर्थराइटिस के असर को धीरे-धीरे कम करने में सहायक है।
अरंडी का तेल शरीर में लिम्फोसाइट को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें टी सेल यानी श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं जो किसी भी तरह की बीमारी से लड़ने में सहायक होती है।गठिया (Arthritis) एक ऐसी बीमारी है जो जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न पैदा करती है. यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक आम होती है.
 गठिया, जोड़ों में सूजन और दर्द का कारण बनने वाली एक आम बीमारी है. यह अलग-अलग प्रकारों में हो सकती है, जिनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस, रुमेटॉयड गठिया और गाउट शामिल हैं. गठिया के लक्षणों में जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और गति की कमी शामिल हो सकती है.
. गठिया के मरीजों को इन पांच फूड्स से बचना चाहिए.
. चावल
चावल में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो सूजन को बढ़ा सकते हैं. गठिया के मरीजों को भूरे चावल या क्विनोआ जैसे साबुत अनाज का विकल्प चुनना चाहिए.
आइसक्रीम
आइसक्रीम में चीनी और डेयरी उत्पाद होते हैं, जो दोनों ही गठिया के लक्षणों को बदतर बना सकते हैं. गठिया के मरीजों को फल या दही से बनी कम वसा वाली आइसक्रीम का विकल्प चुनना चाहिए.
गठिया के मरीजों को एक हेल्दी और बैलेंस डाइट का सेवन करना चाहिए जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दुबला प्रोटीन शामिल हों. नियमित व्यायाम भी गठिया के लक्षणों को मैनेज करने में मदद कर सकता है
कोल्ड ड्रिंक
कोल्ड ड्रिंक में चीनी और ऑर्टिफिशियल स्वीटनर होते हैं, जो सूजन को बढ़ा सकते हैं. गठिया के मरीजों को पानी, हर्बल चाय या कम चीनी वाले फल पेय का सेवन करना चाहिए.
ठंडा पानी
ठंडा पानी जोड़ों को कठोर बना सकता है और दर्द और अकड़न को बढ़ा सकता है. गठिया के मरीजों को गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए
दही
दही में कैसिइन नामक प्रोटीन होता है, जो कुछ लोगों में सूजन को ट्रिगर कर सकता है. गठिया के मरीजों को दही के बजाय कम वसा वाले दूध या दही का ऑप्शन चुनना चाहिए.
गर्मी का मौसम में कई लोगों के लिए गठिया की समस्या बढ़ जाती है. जोड़ों में अकड़न, दर्द और सूजन की समस्याएं उन्हें परेशान करने लगती हैं. दरअसल, गर्मियों में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे जोड़ों में लुब्रिकेशन कम हो जाता है और दर्द बढ़ जाता है
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान उपायों और खान-पान में बदलाव करके आप गर्मियों में भी गठिया के लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं. आइए जानते हैं गर्मियों में गठिया के लक्षणों को कम करने के कुछ टिप्स और हड्डियों को मजबूत बनाने वाले डेयरी रहित फूड के बारे में.
गर्मियों में गठिया के लक्षणों को कम करने के लिए टिप्स:
पानी भरपूर मात्रा में पिएं: शरीर में पानी की कमी गठिया के दर्द को बढ़ा सकती है. इसलिए, दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है.
अरंडी के तेल की मालिश किसी भी दर्द का रामबाण इलाज है। अगर आपके जोड़ों में भी हमेशा दर्द की शिकायत रहती है तो आप अरंडी के तेल से जोड़ों की मालिश कर सकते हैं।
गठिया के लिए आमलकी, अश्वगंधा और शतावरी को मिलाकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोज़ाना सुबह खाली पेट खाएं।
 नींबू का रस निकालकर जोड़ों की मालिश करें। इससे सूजन व जोड़ों का दर्द खत्म होता है।
 गठिया होने का कारण यूरिक एसिड का बढ़ना है। इसको नियंत्रित करने के लिए आप लहसुन को शहद में डालकर इसका सेवन कर सकते हैं।
 कच्चे आलू का रस निकालकर रोज़ाना खाली पेट पानी के साथ आधा कम पिएं।
 सूर्य की किरणों का हल्का सहारा लें: सुबह की हल्की धूप जोड़ों के लिए फायदेमंद होती है. विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है.
* ठंडे से बचें: एयर कंडीशनर के अत्यधिक प्रयोग से बचें. ठंड जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकती है.
* वजन को कंट्रोल में रखें: ज्यादा वजन जोड़ों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है. हेल्दी वजन बनाए रखने से गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है.
* नियमित व्यायाम करें: हल्के व्यायाम जोड़ों को लचीला बनाते हैं और दर्द को कम करते हैं.
गर्मियों में हड्डियों को मजबूत बनाने वाले डेयरी रहित खाद्य पदार्थ:
* हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, ब्रोकली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम और विटामिन-के भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं.
* सोयाबीन: सोयाबीन प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा सोर्स है. सोया दूध, टोफू और एडामे का सेवन गठिया के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है.
गठिया का नुस्खा 
*आप दौ सौ पचास ग्राम गुड़ जो दो साल पुराना हो।और इतनी ही साबुत हल्दी की गांठें।बीस ग्राम सौंठ।ले सबसे पहले एक लोहे की कड़ाही में। थोड़ी बालू रेत में धिमी आंच पर हल्दी को बीस मिनट तक पकाये फिर तुरन्त उसे कूटकर कपडछानं कर ले यानी बारिक पाउडर बना लें फिर उस कढ़ाई को साफ करने के बाद उसमें गुड़ डाल दें।और उसे पलटे से हिलाते रहें थोड़ा पिघलने पर उसमें हल्दी पाउडर व सौंठ पावडर डाल कर जल्दी से मिक्स कर लें।और फिर उसकी इक्कीस गोली बना लें ।तीन गोली हर रोज सुबह दोपहर और शाम को एक गिलास थोड़ा गर्म दूध के साथ लें।दुध देशी गाय या बकरी का होना जरूरी है। ये सात दिन लें ।परहेज ।चटपटा व तली हुई चीजें आचार व बाय वाली सब्जी ना लें ।  यही विधि दोबारा करें।जब तक सम्पूर्ण ठीक न हो करते रहे।
* अलसी के बीज: अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं.
* अनार का दाना: अनार के दानों में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करते हैं.
* नट्स और बीज: बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज आदि कैल्शियम, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट के अच्छे सोर्स हैं. ये हड्डियों को मजबूत बनाते हैं.
गर्मियों में इन उपायों और फूड को अपनाकर आप गठिया के लक्षणों को कम कर सकते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाए रख सकते हैं
गठिया के इलाज के लिए बाजार में कई तरह की दवाइयां उपलब्ध है लेकिन गठिया के सबसे अच्छे इलाज में घरेलू उपचार इन दवाइयों से ज्यादा फायदेमंद साबित होता है -
पानी -पानी यूरिक एसिड की मात्रा को शरीर में संतुलित रखने में बहुत ही ज्यादा कारगर साबित होता है।
आप गठिया के इलाज के लिए दिन भर में 4 से 5 लीटर पानी का सेवन करें।
हल्दी -गठिया के दौरान सूजन और दर्द की समस्या अत्यधिक बढ़ जाती है।
आप रोजाना सोने से पहले हल्दी वाला दूध का सेवन करें। यह आपके सूजन और दर्द को कम करने में मददगार साबित होगा।
अदरक -अदरक हमारे शरीर में रक्त संचार को बढ़ाने के साथ ही दर्द में भी राहत पहुंचाने का काम करता है।
आप दर्द वाले स्थान पर अदरक के तेल की मालिश करें।
लहसुन -गठिया व जोड़ों का दर्द में लहसुन काफी फायदेमंद साबित होता है।
इसके लिए आप लहसुन की 3-4 कलियां सुबह खाली पेट ले।
एलोवेरा -एलोवेरा का इस्तेमाल भी गठिया के दर्द में आराम पाने के लिए किया जाता है।
इसके लिए आप दर्द वाले स्थान पर ताजा एलोवेरा का जेल लगाएं यह आप के दर्द को बहुत हद तक कम कर देगा।
सौंठ -
गठिया के इलाज में सौंठ का सेवन भी बहुत फायदेमंद साबित होता है।
इससे गठिया के रोग में बहुत ज्यादा आराम मिलता है। आप सौंठ का सेवन किसी भी रूप में कर सकते हैं।
आलू -आलू के रस में कार्बनिक और विभिन्न प्रकार के खनिज के गुण मौजूद होते हैं।
जिस वजह से यह गठिया के इलाज में बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।

1.8.24

सांस फूलना अस्थमा के कारण, लक्षण घरेलू उपचार :Asthma home remedies

 



दुनियाभर में करीब 24 करोड़ लोग अस्थमा से पीडित हैं। वहीं भारत की बात की जाए तो करीब 2 करोड़ लोग इस बीमारी के शिकार हैं। अस्थमा कई कारणों से हो सकता है। कई लोगों को यह बीमारी जेनेटिक मिलती हैं तो कई लोग एलर्जी के कारण इस समस्या का शिकार हो जाते है। शुरुआत में ही अस्थमा का इलाज करा जाए तो इसके अटैक से आप खुद को बचा सकते हैं। अस्थमा के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में आप कुछ घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।
सांस लिए बिना व्यक्ति दो मिनट तक भी नहीं रह सकता, लेकिन फिर भी लोग इसे बेहद सामान्य मानते हैं। आप भले ही सांसों का मोल न समझते हों लेकिन इसकी वास्तविक कीमत एक अस्थमा पीडि़त व्यक्ति ही समझ सकता है। श्वसन संबंधी यह समस्या कभी−कभी जानलेवा भी साबित होती है।

अस्थमा के कारण क्या है

अभी तक अस्थमा के सटीक कारणों का पता नहीं लगा पाया गया है लेकिन इस बीमारी के पीछे अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हो सकते हैं अस्थमा रोग के शिकार अक्सर धूम्रपान करने वाले या फिर तंबाकू खाने वाले होते हैं। इसके अलावा धूल के कण वायु प्रदूषण ठंडी हवा भी इसके कारण हो सकते हैं शारीरिक गतिविधियां, एलर्जिक रिएक्शन और कुछ भोज्य पदार्थों के कारण होता है। इसके अलावा अधिक तनाव और भावनात्मक रूप से कमजोर होने के कारण भी यह बीमारी हो जाती है। पेय पदार्थों जैसे बीयर, वाइन खाद्य पदार्थों जैसे सूखे मेवे भी इस बीमारी का कारण हो सकते हैं

शहद -

अस्थमा के लक्षणों को कम करने में शहद काफी प्रभावी होता है। इसका उपयोग करने से खांसी, जुकाम और गले में खराश जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए आप एक गिलास गुनगुने
पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर इसे घूंट-घूंट करके पिएं। दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करने से आपको जल्द आराम मिल सकता है।
श्वास संबंधी समस्याओं को दूर करने में शहद सबसे पुराना और प्राकृतिक उपचार है। इसके लिए एक गिलास गर्म पानी लेकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसका धीरे−धीरे सेवन करें। इसके अतिरिक्त रात में सोने से पहले भी एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर उसे चाट लें।

अदरक-

अदरक में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह खांसी, गले में खराश और दर्द को दूर करने में मदद कर सकता है। इसके लिए आप अदरक की चाय का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अदरक के टुकड़े को चबा करके भी खा सकते हैं।

कॉफी

आपको शायद जानकर हैरानी हो लेकिन कॉफी भी अस्थमा से राहत दिलाने का एक आसान लेकिन कारगर उपाय है। इसके लिए आप एक कप गर्मागर्म कॉफी का सेवन करें। इससे आपको तुरंत अस्थमा से राहत मिलती है। दरअसल, यह तुरंत वायुमार्ग को खोलता है, जिससे आपको सांस लेने में आसानी होती है।

हल्दी

एक गिलास पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर उसका सेवन करें। करीबन पंद्रह दिनों तक इस उपचार को दिन में तीन बार करें। हल्दी एक बेहतरीन एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट है। साथ ही इसमें कर्क्युमिन भी पाया जाता है, जो अस्थमा से लड़ने में मददगार है।

अदरक और हल्दी-

अदरक और हल्दी को औषधिय गुणों का भंडार माना जाता है। इसका इस्तेमाल कर आप आसानी से अस्थमा को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए एक गिलास दूध में थोड़ी सी अदरक कद्दूकस करके उबाल लें। इसके साथ ही इसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर या थोड़ी कच्ची अदरक कद्दूकस करके डाल लें। इसके बाद इसका सेवन करे। आयुर्वेद के अनुसार दिन में 2 बार इसका सेवन करने से आपको अस्थमा अटैक से काफी लाभ मिलेगा।

लहसुन

लहसुन में एंटी इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं जो अस्थमा की समस्या को कम करने में कारगर होता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए आधा कप अदरक वाली चाय में 2-3 लहसुन की कली पीसकर डाल लें। इसके बाद इसका सेवन करे।जाना।
इसके अलावा कुछ व्यक्तियों में एक्सरसाइज के दौरान अस्थमा (दमा)के लक्षण अधिक दिखाई देते हैं और ठंडी या शुष्क हवा में यह लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं।
फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों में धूल, गैस, धुआं और रसायनों के कारण अस्थमा के लक्षण अधिक बढ़ जाते हैं।

तेज पत्ता

तेज पत्ता अस्थमा की समस्या को कम करने में काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए आधा चम्मच तेज पत्ता पाउडर में एक चौथाई चम्मच पिपली और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में कीन बार इसका सेवन करे। यह क्रोनिक अस्थमा में कारगर साबित हो सकता है।

दालचीनी

दालचीनी में कैल्शियम, मैग्नीशियम आयरन एवं प्रोटीन जैसे गुणकारी तत्व पाए जाते हैं जो अस्थमा के मरीजों के लिए काफी कागर है। इसके साथ ही इसका सेवन शहद के साथ करने से इसके लाभ दोगुना बढ़ जाते हैं। रात को सोने से पहले एक कप गर्म पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर, एक चौथाई चम्मच त्रिकटु चूर्ण और 1 चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें। आप चाहे तो दिन में 2 बार इसका सेवन कर सकते हैं।
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31.7.24

गुर्दे की विफलता के आयुर्वेदिक और जीवन रक्षक हर्बल उपचार



 

क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से दुनियाभर में 80 करोड़ से ज्यादा लोग परेशान हैं। यह मौत की भी बड़ी वजह है। भारत जैसे देश में, जहां लो और मिडल क्लास बहुत ज्यादा है, समस्या और गंभीर है। यहां ज्यादातर लोग इस बीमारी के नतीजे नहीं झेल पाते। डायलिसिस और ट्रांसप्लांटेशन का खर्च भी उनकी कमर तोड़ देता है।
किडनी की परेशानियों को आराम से दूर करना हो, तो आयुर्वेद सटीक तरीका साबित होता है। आयुर्वेद, किडनी के काम करने की ताकत को चमत्कार की तरह सही करता है। इतना कि डायलिसिस और ट्रांसप्लांटेशन जैसे इलाजों की जरूरत ही नहीं पड़ती। चलिए जानते हैं कि आयुर्वेद में किडनी डिजीज का क्या इलाज है।
Ayurvedic herb for kidney: जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी है, उनके लिए किसी भी बीमारी से जुड़ी दवाएं लेना थोड़ा मुश्किल हो जाता है और ऐसे में कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां आपके काफी काम आ सकती है।
  किडनी हमारे शरीर के सबसे ज्यादा हेल्दी अंगों में से एक है और इसका नियमित रूप से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। जब भी हम बीमार पड़ते हैं, तो उसके लिए डॉक्टर हमें दवाएं देते हैं। हमारे द्वारा खाई जाने वाली ये दवाएं हमारे शरीर की बीमारी को ठीक करने में तो मदद करती हैं, लेकिन इन दवाओं को फिल्टर हमारी किडनी को करना पड़ता है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी है, तो उनके लिए किसी भी बीमारी से जुड़ी दवाएं लेना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। दवाओं का असर हमारी किडनी पर जरूर पड़ता है, चाहे वे दवाएं किडनी की किसी बीमारी का इलाज करने के लिए ही क्यों न तैयार की गई हों। ऐसे में कुछ आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स क्रोनिक किडनी डिजीज के मामलों में कुछ खास प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं को इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि सारी ही आयुर्वेदिक दवाएं आपकी किडनी के लिए सुरक्षित हैं। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उत्पाद आपकी किडनी के लिए सुरक्षित हो सकते हैं।




वरुणा (Varuna for kidney)

आयुर्वेद में किडनी के मरीजों को वरुणा से बनी दवाएं दी जाती हैं। साथ ही वरुणा के पाउडर का सेवन क्रोनिक किडनी के मरीजों को दिया जाता है, ताकि उनके लक्षणों को कंट्रोल करके रखा जा सके। कुछ अध्ययनों में भी यह पाया गया है कि किडनी स्टोन को निकालने और उसे फिर से होने के खतरे को कम करने के लिए वरुणा काफी फायदेमंद हो सकती है।

गिलोय बेल (Giloy bel for kidney)

ग्रामीण भारत में घर-घर पाई जाने वाली गिलोय की बेल आयुर्वेद की सबसे प्रभावी जड़ी-बूटियों में से एक है। आयुर्वेद के अनुसार बुखार, गठिया और डेंगू जैसी बीमारियों में गिलोय बेल काफी फायदेमंद है। किडनी से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने और किडनी की क्रोनिक बीमारियों को मैनेज करने के लिए भी आयुर्वेद में गिलोय बेल का इस्तेमाल किया जाता है।

पुनर्नवा (Punarnava for kidney)

किडनी के लिए सुरक्षित जड़ी-बूटियों में किडनी पुनर्नवा का नाम भी आता है। आयुर्वेद के अनुसार नियमित रूप से और समय-समय पर पुनर्नवा का इस्तेमाल करना आपकी किडनी को सुरक्षित रखता है और यहां तक कि जिन्हें पहले से ही किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं, उनके लिए पुनर्नवा फायदेमंद है। सिर्फ आयुर्वेद ही नहीं बल्कि एलोपैथी में भी पुनर्नवा को काफी फायदेमंद बताया गया है, जिनके अनुसार इसमें डाइयुरेटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।

चंदन (Sandalwood for kidney)

आयुर्वेद में स्किन से जुड़ी बीमारियों को दूर करने के लिए चंदन का काफी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है आयुर्वेद में चंदन की मदद से किडनी से जुड़ी कई बीमारियों का इलाज भी किया जाता है। दरअसल, चंदन भी एक डाइयुरेटिक की तरह काम करती है, जो किडनी से जुड़ी बीमारियों को दूर करने मे मदद करता है।

 गोक्षुरा (Gokhru for kidney)

आयुर्वेद में गुर्दे से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए गोखरू का इस्तेमाल भी काफी माना गया है। किडनी के मरीजों को गोखरू चूर्ण लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही कुछ अध्ययनों के अनुसार गोखरू में यूरिक एसिड, क्रिएटिनिन और किडनी स्टोन कम करने के गुण पाए जाते हैं, जो क्रोनिक किडनी डिजीज होने के खतरे को कम करते हैं।

किडनी खराब होने के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

किडनी रातों-रात फेल नहीं होती, धीरे-धीरे इस हाल तक पहुंचती है। लेकिन किडनी फेल्योर के लक्षण बहुत कम और नॉर्मल होने की वजह से इसके बारे में समय से पता नहीं चलता और इलाज देर से शुरू हो पाता है। इलाज समय से शुरू हो, तभी सफल होगा। इसलिए, अलग तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।पेशाब कम आना

हाथ-पैरों में सूजन
थकान महसूस होना
सांस लेने में परेशानी
कई बार, सीरम क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया और यूरिन एल्बुमिन के लेवल्स अबनॉर्मल रेंज तक बढ़ जाते हैं। इससे किडनी फंक्शन में गड़बड़ी का इशारा मिलता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और मेडिसिनल प्रीपरेशंस इन इंडिकेटर्स को नॉर्मल रेंज में लाने का काम करते हैं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले हर्बल फॉर्मुलेशंस में पुनर्नवा, कासनी, वरुण, पलाश और गोक्षुरा का इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेद के ट्रेडिशनल तरीके में नेचरल चीजों का प्रयोग करके बीमारियां ठीक की जाती हैं। इनमें ऐसी परेशानियां भी होती हैं, जहां एलोपैथिक दवाइयां काम नहीं कर पातीं। किडनी फेल्योर को भी आयुर्वेद से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। शरीर में असंतुलन को सही करके और किडनी फंक्शन में सुधार से आयुर्वेद में किडनी डैमेज को ठीक करने की भी ताकत होती है।
किडनी को स्वस्थ रखने और रोगों से बचाने के लिए टिप्स
हाइड्रेटेड रहें
स्वस्थ आहार का पालन करें
नमक का सेवन सीमित करें
धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें
नियमित व्यायाम करें
तनाव का प्रबंधन करें
रक्तचाप को नियंत्रित करें
ब्लड शुगर के स्तर को मॉनिटर करें
पुनर्नवा, पलाश, गोक्षुरा, कासनी और वरुणादि ऐसी कई जड़ी-बूटियाँ हैं जिनका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक किडनी को साफ करने और पोषण देने के लिए करते हैं। ये जड़ी-बूटियाँ सूजन को कम करने में मदद करती हैं, रक्त परिसंचरण में सुधार करती हैं और शरीर से अपशिष्ट को तेजी से बाहर निकालने में मदद करती हैं।
आयुर्वेदिक इलाज हर मरीज की स्थिति के आधार पर तय होता है। इसलिए, किडनी फेल्योर के इलाज के लिए किसी एक दवाई का नाम नहीं लिया जा सकता, जबकि एलोपैथिक इलाज में यही ट्रेंड होता है। मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, कोमोर्बिटीज, लक्षण, बीमारी की स्टेज और सेहत को देखकर ही आयुर्वेदिक इलाज तय किया जा सकता है। इसके अलावा, आयुर्वेद शरीर में असंतुलन (दोष) दूर करने का काम करता है, इसलिए भी हर मरीज के इलाज का तरीका अलग होगा। एक मरीज को जिन दवाइयों से आराम मिले, जरूरी नहीं कि वह दूसरे के लिए भी फायदेमंद हो।
आयुर्वेदिक इलाज का सिद्धांत, केवल लक्षणों के इलाज की बजाय इसकी जड़ तक पहुंचना होता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर, इलाज शुरू करने से पहले बीमारी के मूल कारण का पता लगाते हैं। कई बार, किडनी फेल्योर किसी पुरानी वजह से होता है, जिसमें हाइपरटेंशन, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और किसी दवाई से एलर्जी आदि हो सकते हैं। आयुर्वेदिक इलाज से पहले, किडनी फेल्योर के कारण का पता लगाकर इसे दूर किया जाता है।

क्रोनिक किडनी रोग के लिए कौन सी दवा सबसे अच्छी है?

क्रोनिक किडनी डिजीज में खून के फीकेपन का श्रेष्ठ उपचार दवाई और एरिथ्रोपोएटिन है।
विशिष्ट परामर्श- 

विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता बढ़ाने में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| किडनी ख़राब होने के लक्षण जैसे युरिनरी फंक्शन में बदलाव,शरीर में सूजन आना ,चक्कर आना और कमजोरी,स्किन खुरदुरी हो जाना और खुजली होना,हीमोग्लोबिन की कमी,उल्टियां आना,रक्त में यूरिया बढना आदि लक्षणों  में दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि रामबाण की तरह असरदार सिद्ध होती है|डायलिसिस  पर   आश्रित रोगी भी लाभान्वित हुए हैं| औषधि हेतु  वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है|
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सफेद दाग का मिटेगा नामों निशान ,अचूक उपचार

 



  स्किन के किसी अंग या बालों का सफेद होना विटिलिगो कहलाता है। जिसे सफेद दाग के नाम से भी जानते है। आमतौर पर यह समस्या शरीर में मेलानोसाइट्स की कमी के कारण होते है। जो मेलानिन नामक स्किन के पिगमेंट बनाती है। जिससे स्किन में रंग बनने वाली कोशिकाएं खत्म होने के कारण यह सफेद दाग होते हैं। यह सफेद दाग शरीर में किसी भी जगह हो सकते हैं। समय से पहले सिर के बाल, भौहें, पलकें, दाढ़ी के बालों का रंग उड़ जाता है या सफेद हो जाती है|विटिलिगो किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है, लेकिन विटिलिगो के आधा से ज्यादा मामलों में यह 20 साल की उम्र से पहले ही विकसित हो जाता है, वहीं 95 प्रतिशत मामलों में 40 वर्ष से पहले ही विकसित होता है शुरुआत में छोटा-सा दिखाई देने वाला यह दाग धीरे-धीरे काफी बड़ा हो जाता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति को कोई शारीरिक परेशानी, जलन या खुजली नहीं होती। चेहरे पर या शरीर के अन्य किसी हिस्से में सफेद दाग होने के कारण कई बार व्यक्ति में हीनता की भावना भी पैदा हो जाती है।
मेलेनिन की कमी होने पर त्वचा पर सफेद धब्बे पड़ने लगते हैं। सांवली त्वचा वालों को धब्बे अधिक आसानी से दिखाई दे सकते हैं। पहले छोटे धब्बे, फिर पूरे शरीर पर बड़े धब्बे अंततः विटिलिगो के साथ दिखाई देते हैं। कई व्यक्ति सफेद दाग के घरेलू उपचार को पारंपरिक चिकित्सा देखभाल के विकल्प के रूप में मानते हैं। विटिलिगो नामक इस नाटकीय त्वचा विकार के कारण त्वचा पर छोटे से लेकर बड़े आकार के सफेद धब्बे विकसित हो जाते हैं। इस स्थिति में त्वचा की रंगद्रव्य कोशिकाएं या तो मर जाती हैं या निष्क्रिय हो जाती हैं।
त्वचा मेलेनिन की कमी आम तौर पर मनुष्यों में सफेद दाग का कारण होती है। इसके अतिरिक्त, यह अक्सर देखा गया है कि विटामिन बी12, फोलेट, कॉपर और जिंक की कमी समस्या में योगदान करती है। सफेद धब्बों में आमतौर पर समय के साथ विस्तार करने और एक बड़ा पैच बनाने की प्रवृत्ति होती है। चेहरे या शरीर के अन्य क्षेत्रों पर सफेद दाग के लिए प्राकृतिक घरेलू उपचार का उपयोग करने से सफेद दाग या ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में मदद मिल सकती है।
  कैमॉफ्लाज क्रीम (Camouflage Cream For Vitiligo) की मदद से सफेद दाग को छिपाया जा सकता है। क्‍या
होती है कैमॉफ्लाज क्रीम? कैमॉफ्लाज क्रीम एक तरह का हाई पिग्‍मेंटिड मेकअप होता है, जब इसे स्किन पर लगाया जाता है तो ये स्किन को एक नेचुरल शेड देता है। डर्मकलर कैमॉफ्लाज क्रीम चेहरे और गर्दन पर लगाया जा सकता है। हालांकि अगर आप भी कैमॉफ्लाइ क्रीम लगाना चाहते हैं तो डॉक्‍टर की सलाह पर ही लगाएं।
कुछ लोगों को सफेद दाग और सोरायसिस में कोई अंतर नहीं दिखता है और लगता है कि ये दोनों एक ही हैं। जबकि ऐसा नहीं है, सोरायसिस के दाग पूरी तरह से अलग होते हैं। उनमें धब्बे होने पर सफेद रंग के बुरादे के रूप में डैंड्रफ सा दिखता है जबकि सफेद दाग में ऐसा नहीं होता है। ये केवल सफेद दाग का मिथ है।
सफेद दाग छूने से फैलता है। जिन लोगों को सफेद दाग की समस्या होती है, सामान्य लोग उन्हें नहीं छूनें हैं और उनके साथ किसी तरह का आदान प्रदान करने से भी बचते हैं। लोगों को लगता है कि इन्हें छूने से उन्हें भी सफेद दाग की समस्या हो जाएगी। जबकि यह बिल्कुल गलत है।
सफेद दाग किसी भी तरह से कुष्ठ रोग नहीं है। आम लोगों को सफेद दाग से ग्रसित रोगी से घृणा करने के बजाय उन्हें अपनाना चाहिए और उन्हें मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाना चाहिए।
लोगों के मन में यह धारणा बनी हुई है कि सफेद दाग उन्हीं बच्चों को होता है जिनके माता पिता में से कोई एक इसका शिकार हो। हालांकि ऐसा होने के चांस ज्‍यादा होता है। लेकिन मेडिकल साइंस ऐसा केवल 10 प्रतिशत लोगों में ही देखा जाता है।

कायाकल्प लेप

दिव्य श्वित्रघ्न लेप लगाने से स्किन में फफोले पड़ जाते है। इनसे निजात पाने के लिए कायाकल्प लेप बनता है। इसके लिए एक बाउल में मुल्तानी मिट्टी, गौमूत्र, नीम का पेस्ट, एलोवेरा जेल, हल्दी और अपामार्ग मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे लगातार 1 माह तक लगाए। इससे आपकी स्किन अपने रंग में आ जाएगी।

गोमुत्र अर्क़

माना जाता है कि गोमुत्र में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सफेद दाग को काफी हद तक सही कर देते हैं। इसके लिए रोजाना सुबह थोड़ा सा एक चम्मच गोमुत्र अर्क पिएं।कई बार हमारे खानपान के कारण स्किन एलर्जी का कारण बन जाता है। ऐसे में दूध के साथ नमकीन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे सफेद दाग हो सकते हैं। जैसे चाय, कॉफी के साथ नमकीन, मठरी जैसी चीजें ना खाएं। इसके साथ ही रात को सोने के 1 घंटे पहले दूध का सेवन करे।
ये उपचार भी कारगर होते हैं 
1. पीसी हुई हल्दी गुनगुने दूध में डाल कर पिए। हर रोज 2 बार ये उपाय करने से 5-6 महीने में सफेद दाग साफ़ होने लगेगा।
2. सरसों का तेल 2 चम्मच ले और इसमें 1 चम्मच हल्दी मिलाकर इसका लेप सफेद दागों पर लगाए. फिर 15 मिनट के बाद धो ले। इस घरेलू नुस्खे को कुछ महीने लगातार दिन में 2 से 3 बार लगाए ल्यूकोडर्मा ठीक होने लगेगा।
3. सफेद दाग का अचूक इलाज करने के लिए लहसुन के रस में थोड़ी हरड़ घीस कर मिलाए और सफेद दाग पर इसका लेप लगाए।
4. प्रतिदिन 3 से 4 बादाम और 30 से 50 ग्राम भीगे काले चने खाए।
5. अखरोट का पाउडर 2 चम्मच ले और इसमें थोड़ा सा पानी मिला कर पेस्ट बना ले। अब इस पेस्ट को white spots पर 15 से 20 मिनट के लिए लगा कर छोड़ दे। इस होम रेमेडीज को दिन में 2 से 3 बार प्रयोग करे।
6. सफेद दाग के उपाय में नीम के पत्तों का रस रामबाण इलाज का काम करता है। नीम के पत्तों को पीस कर इसका रस निकाल ले और इसमें 1 चम्मच शहद मिला कर दिन में 2 से 3 बार पिए।

सफेद दाग का इलाज क्या है

   ऐसा कतई नहीं है कि सफेद दाग का कोई इलाज नहीं है। आज के समय में विटिलिगो को पूरी तरह से सही करने के लिए तमाम तरह के इलाज और थेरेपी उपलब्ध हैं। लेजर तकनीक की मदद से डॉक्टर प्रभावित हिस्से से सफेद दाग को दूर करते हैं और उस स्थान पर व्यक्ति की स्किन का जैसा रंग होता है वैसे ही रंगों की कोशिकाओं को छोड़ते हैं। करीब 5 से 6 हफ्ते बाद इसे हटा दिया जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि 3 से 4 महीने में स्किन का रंग काफी हद तक सामान्य हो जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार, पित्त या इसके साथ बाकी वातों की गड़बड़ी से सफेद दाग की समस्या होती है। जो लोग बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार, बेवक्त खाने के अलावा विरुद्ध आहार (मसलन दूध के साथ नमक या मछली आदि) लेता है, उसमें यह समस्या होने की आशंका ज्यादा होती है। आयुर्वेद में पंचकर्म के जरिए शरीर को डिटॉक्सिफाई किया जाता है। इसके अलावा बाकुची बीज, खदिर (कत्था), दारुहरिद्रा, करंज, आरग्वध (अमलतास) आदि सिंगल हर्ब्स के जरिए भी खून को साफ किया जाता है। इसके अलावा कंपाउंड मेडिसिन भी दी जाती है जैसे कि गंधक रसायन, रस माणिक्य, मंजिष्ठादि काढ़ा, खदिरादि वटी आदि है। त्रिफला भी काफी असरदार है।
  -हल्दी और सरसों के तेल को मिलाकर बनाया गया मिश्रण दाग वाली जगह लगाने से दाग कम होने लगता है। इसके लिए आप एक चम्मच हल्दी पाउडर लें। अब इसे दो चम्मच सरसों के तेल में मिलाए। अब इस पेस्ट को सफेद चकतों वाली जगह पर लगाएं और 15 मिनट तक रखने के बाद उस जगह को गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा दिन में तीन से चार बार करें। इससे आराम मिलेगा।-1/2 किलो हल्दी को 8 लीटर पानी में रातभर भिगोकर रखें, रातभर भिगोने के बाद सुबह उस पानी को गर्म करें। तब तक गर्म करें जब तक कि 1 लीटर शेष रह जाएँ। इसमें 1/2 लीटर सरसों का तेल मिला लें, इसके बाद तब तक पकाते रहें जब तक की 1/2 लीटर शेष रह जाएँ इस प्रयोग से शरीर के सफेद दाग में लाभ मिलता है। इस तेल का प्रयोग सुबह-शाम दोनों समय करना चाहिए।
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30.7.24

हड्डियों को मजबूत बनाने वाले भोजन पदार्थ Foods for strong bones



  जब शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य की बात आती है, तो उसमें हड्डियों का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है इसे लेकर और भी सजग होने की जरूरत पड़ने लगती है। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए एक संतुलित आहार लेना सबसे अच्छा होता है, जिसमें कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम और हड्डियों को सहारा देने वाले अन्य पोषक तत्व शामिल हों। इससे हड्डियों के नुकसान को रोकने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इस लेख में हम ऐसे ही फूड आइटम्स के बारे में जानेंगे, जिनके सेवन से हड्डियों को मजबूती मिलती है।
अचानक से घुटनों में दर्द होना या फिर कमर या हाथ-पैरों की हड्डियों का दुखना कमजोर हड्डियों के लक्षण हो सकते हैं. कमजोर हड्डियां शरीर के अलग-अलग हिस्से में दर्द का कारण बनती हैं जिस चलते उठना-बैठना तक मुश्किल होने लगता है. ऐसे में हड्डियों को मजबूत बनाना जरूरी होता है. यहां खानपान की ऐसी ही कुछ चीजें दी गई हैं जिनके सेवन से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है और हड्डियां मजबूत (Strong Bones) होने लगती हैं. यहां जानिए कौनसी हैं ये चीजें जिन्हें डाइट का बनाया जा सकता है हिस्सा.

सूखे मेवे - 

खानपान में सूखे मेवे शामिल करने पर शरीर को अलग-अलग फायदे मिलते हैं और इन ड्राई फूड्स का असर हड्डियों को मजबूत बनाने में भी दिखता है. सूखे मेवे कैल्शियम ही नहीं बल्कि मैग्नीशियम और फॉस्फोरस के भी स्त्रोत होते हैं जोकि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में असरादर हैं. ऐसे में इन मेवों को स्नैक्स की तरह या फिर मिल्क शेक्स और सलाद वगैरह में डालकर खाने पर हड्डियों को फायदा मिलता है.
विटामिन डी कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है, जिसमें मछली और मशरूम शामिल हैं , लेकिन यह मुख्य रूप से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। आपका शरीर इसे तब भी बनाता है जब आपकी त्वचा धूप में रहती है। विटामिन डी कैल्शियम अवशोषण और हड्डियों की वृद्धि में सुधार करता है और आपकी मांसपेशियों, नसों और प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करता है ।

डेयरी प्रोडक्ट्स को बढ़ाएं: 

अगर आप अपनी बोन्स को मजबूत बनाना चाहते हैं तो आपको अपनी डेली रूटीन में डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, पनीर, दही जैसे खाद्य पदार्थों को बढ़ाना होगा. डेयरी प्रोडक्ट में कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा भरपूर होती है. इसके साथ ही डेयरी प्रोडक्ट में प्रोदीन की मात्रा भी अधिक होती है

बादाम – 

ड्राई फ्रूट्स में सबसे ताकतवर माने जाने वाले बादाम का सेवन करना दिमाग ही नहीं, बल्कि हड्डियों के लिए भी चमत्कारी माना जा सकता है. बादाम के साथ बादाम से बने बटर (Almonds & Almond Butter) का सेवन करने से बोन हेल्थ बूस्ट हो सकती है. इनमें पोषक तत्वों का भंडार होता है. आधा कप नट्स में 190 मिलीग्राम कैल्शियम और 2 चम्मच बादाम मक्खन में 111 मिलीग्राम कैल्शियम होता है.

पालक का सेवन करें: 

हड्डियों के लिए सबसे प्रमुख तत्व कैल्शियम होता है. हरी सब्जियों में इसकी मात्रा अच्छी खासी होती है. बोन्स को मजबूत करने के लिए पालक का सेवन किया जा सकता है. पालक के सेवन से हड्डियों को कैल्शियम की डेली जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत कैल्शियम मिल जाता है. फाइबर में उच्च पत्तियों में आयरन और विटामिन ए भी अधिक होता है.

अनानास का सेवन करें:

 अनानास में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें पोटैशियम की मात्रा भरपूर होती है जिससे शरीर को बैलेंस करने में मदद मिलती है. अनानास कैल्शियम की कमी को भी कम करता है. इसमें विटामिन एक की मात्रा भी भरपूर होती है.

सोयाबीन –

हड्डियों के लिए सोयाबीन को सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जा सकता है. इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम के अलावा प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जिससे हड्डियों के साथ मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है. सोयाबीन से बनी चीजें खाने से आपकी हड्डियां लोहे जैसी मजबूत बन सकती हैं. आप हड्डियां को लंबे समय तक बेहतर बनाने के लिए सोयाबीन से बने टोफू का सेवन शुरू कर सकते हैं

फलियां –

हड्डियों की सेहत के लिए सफेद फलियों (White Canned Beans) को बेहद फायदेमंद माना जाता है. इन एक कप फलियों में लगभग 190 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. बीन्स प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत हैं. आप फलियों का सेवन करके हड्डियों को आसानी से मजबूत बना सकते हैं. इसके अलावा हरी सब्जियों में भी कैल्शियम समेत तमाम पोषक तत्व होते हैं, जिनसे हड्डियों को हेल्दी रखा जा सकता है.

अंजीर – 

आपको जानकर हैरानी होगी कि हड्डियों के लिए सूखे अंजीर (Dried Figs) को अमृत समान माना जा सकता है. हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार सूखे अंजीर का सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिल सकती है. दो अंजीर में लगभग 65 मिलीग्राम कैल्शियम होता है और नियमित रूप से इनका सेवन करने से शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होगी. अंजीर को भिगोकर खाने से भी बोन हेल्थ बूस्ट होती है.
आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपको स्वस्थ हड्डियों को बनाए रखने के लिए प्रत्येक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिले। वयस्कों को कैल्शियम और विटामिन डी की निम्नलिखित अनुशंसित मात्रा प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए
50 वर्ष तक के वयस्क : 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम और 600 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट विटामिन डी
51 से 70 वर्ष की आयु के वयस्क : 1,000 से 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम और 600 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट विटामिन डी
71 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्क : 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम और 800 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट विटामिन डी
 व्यायाम और शारीरिक गतिविधि बचपन से लेकर वयस्कता तक हड्डियों को स्वस्थ रख सकती है। बच्चों और किशोरों को प्रतिदिन एक घंटे शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए, जबकि वयस्कों को हर हफ़्ते लगभग दो घंटे और 30 मिनट की ज़रूरत होती है।1
आदर्श रूप से, आप निम्नलिखित व्यायामों को शामिल करेंगे:
भार वहन करना (जैसे, चलना, दौड़ना, नृत्य करना, टीम खेल)
शक्ति प्रशिक्षण (जैसे, मुक्त भार उठाना, शरीर-भार नियम)
बिना वजन उठाए (जैसे, साइकिल चलाना, तैरना)
लचीलेपन, कोर ताकत और संतुलन को बेहतर बनाने के लिए आप योग, पिलेट्स या ताई ची भी पसंद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अगर आपको ऑस्टियोपोरोसिस है तो कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार मदद कर सकता है। भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी लेने से बीमारी धीमी हो सकती है और फ्रैक्चर को रोका जा सकता है।
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14.7.24

बड़ी से बड़ी पथरी को गलाकर बाहर निकालने के लिए आजमाएं हर्बल औषधियाँ, kidney stone herbal medicine


 



किडनी स्टोन या किडनी में पथरी होना एक आम समस्या है। गुर्दे की पथरी से बहुत से लोग पीड़ित होते हैं। किडनी की पथरी की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। यह महिला और पुरुष दोनों पर समान प्रभाव डालती है। किडनी की पथरी अगर छोटी हो तो यह अपने आप बाहर निकल आती है लेकिन मध्यम या बड़ी आकार की पथरी होने पर इलाज की जरुरत पड़ती है। पथरी के दर्द को कम करने के लिए कई घरेलू उपचार मौजूद है। इसके साथ ही किडनी की पथरी को कई घरेलू नुस्खे की मदद से भी तोड़ा भी जा सकता है। अगर गुर्दे की पथरी शुरूआती स्टेज में है तो पथरी के घरेलू उपायों से इसके लक्षणों को दूर किया जा सकता है। आइये जानते हैं किन घरेलू उपायों से अपने आप निकल जाएगी किडनी की पथरी।
गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन क्रिस्टलयुक्त खनिज और लवण होते हैं जो डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण बनते हैं। गुर्दे में पथरी तब बनती है जब मिनरल और साल्ट जैसे कैल्सियम ऑक्जलैट किडनी में क्रिस्टलीकृत होकर जमने लगते हैं और कठोर होकर जमा हो जाते हैं। हालांकि पथरी किडनी में ही बनती है लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट को भी प्रभावित करती है। किडनी स्टोन को कैल्कुली (calculi) या यूरोलिथियासिस भी कहते हैं।

पथरी होने के कारण

गुर्दे में पथरी या किडनी स्टोन आमतौर पर एक नहीं बल्कि कई कारणों से होती है। गुर्दे की पथरी तब होती है जब यूरिन में कैल्शियम, ऑक्जलेट और यूरिक एसिड जैसे पदार्थ जमा होकर अधिक मात्रा में क्रिस्टल का निर्माण करते हैं और यूरिन के फ्लुइड को पतला कर देते हैं। इस दौरान यूरिन में क्रिस्टल को एक दूसरे से जोड़ने से रोकने वाले पदार्थों की कमी हो जाती है जिससे किडनी में पथरी बन जाती है। इसके अलावा यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, रिनल ट्यूबुलर एसिडोसिस, हाइपरथायरॉयडिज्म सहित कई बीमारियों के कारण किडनी की पथरी हो सकती है।

पथरी के लक्षण


आमतौर पर किडनी स्टोन के लक्षण तब तक पता नहीं चल पाते हैं जब तक पथरी किडनी के चारों ओर घूमने नहीं लगती या किडनी और ब्लैडर के बीच स्थित मूत्रवाहिनी में नहीं आ जाती है। उसके बाद किडनी की पथरी के ये लक्षण सामने आते हैं:
पसलियों के नीचे और पीठ में तेज दर्द
पेशाब के दौरान दर्द
गुलाबी, लाल या भूरे रंग की यूरिन
पेशाब से तीक्ष्ण दुर्गंध आना
मितली और उल्टी होना
बार-बार पेशाब लगना
सामान्य से अधिक पेशाब होना
इंफेक्शन
ठंड लगना और बुखार
कम मात्रा में पेशाब होना
इसके साथ ही किडनी स्टोन के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों में हल्का और गंभीर दर्द भी होता रहता है।
गुर्दे की पथरी एक आम समस्या है जिसे घरेलू उपचार से भी काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। घर में ऐसी कई चीजें मौजूद होती हैं जिनमें भरपूर मात्रा में औषधीय गुण पाये जाते हैं और ये वस्तुएं किडनी की पथरी को बढ़ने से रोकने के साथ ही दर्द में भी राहत देती हैं।




पथरी का घरेलू इलाज पानी

किडनी की पथरी का सबसे आसान घरेलू उपचार है पानी। किडनी स्टोन होने पर रोजाना सामान्य रुप से 8 गिलास पानी पीने की बजाय 12 गिलास पानी पीने से पथरी का ग्रोथ रुक जाता है। वास्तव में गुर्दे की पथरी का एक बड़ा कारण डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) है। शरीर में पानी की कमी होने पर यह बीमारी उत्पन्न होती है।
पानी किसी भी बीमारी को दूर करने में कितना मददगार साबित हो सकता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं की केवल पानी पीने से ही पथरी को बाहर किया जा सकता है। इसलिए अधिक से अधिक पानी पीने के साथ ही यूरिन के रंग पर भी ध्यान देना चाहिए। आपके यूरिन का रंग लाइट और कम पीला होना चाहिए। यदि आपका यूरिन का रंग गहरा पीला है तो इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो गई है। अगर गुर्दे की पथरी का आकर छोटा है तो इसे अधिक मात्रा में पानी पीकर बाहर निकाला जा सकता है।
नींबू से पथरी का इलाज किया जा सकता है। नींबू से पथरी का इलाज भी बहुत आसान है और इस घरेलू उपाय को बहुत से लोग आजमाते हैं। नींबू में साइट्रेट नामक रसायन पाया जाता है जो गुर्दे में कैल्शियम स्टोन बनने से रोकता है। इसके साथ ही साइट्रेट किडनी की पथरी को छोटी-छोटी पथरी में ब्रेक करता है और उन्हें बढ़ने से रोकता है। किडनी स्टोन के घरेलू इलाज के रुप में सबसे पहले एक बार सुबह खाली पेट नींबू पानी और रात के खाने के कुछ घंटे पहले नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। यह घरेलू उपाय करने से कई बार किडनी स्टोन को निकालने के लिए ऑपरेशन की जरुरत भी नहीं पड़ती है। अगर आप बिना सर्जरी के किडनी स्टोन को ठीक करना चाहते हैं (Remove Kidney Stones Without Surgery), तो आपको यह नुस्खा रोज करना होगा।

तुलसी का रस


पथरी तोड़ने की दवा के रुप में तुलसी के रस का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह किडनी की पथरी निकालने का घरेलू नुस्खा माना जाता है। जिससे किडनी स्टोन से राहत पाने में मदद मिलती है। तुलसी में एसिटिक एसिड पाया जाता है जो गुर्दे की पथरी को तोड़ता है और दर्द कम करने में मदद करता है। इसके साथ ही तुलसी पोषक तत्वों से भरपूर है।
आमतौर पर तुलसी को पाचन और सूजन की समस्याओं को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होने के कारण तुलसी का रस किडनी की पथरी के घरेलू उपचार में मदद करता है। किडनी की पथरी निकालने के लिए तुलसी की ताजी पत्तियों की चाय दिन में कई बार सेवन करें। इसके साथ ही तुलसी की पत्तियों का जूस पीने से भी गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है। हालांकि छह सप्ताह से ज्यादा तुलसी के रस का सेवन नहीं करना चाहिए।

सेब का सिरका

किडनी की पथरी का देसी इलाज है सेब का सिरका। इसमें पर्याप्त मात्रा में एसिटिक एसिड पाया जाता है जो गुर्दे की पथरी को गलाने में मदद करता है। इसके साथ ही यह पथरी के कारण होने वाले दर्द को भी कम करता है। किडनी स्टोन को गलाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच एपल साइडर विनेगर मिलाकर दिन में कई बार सेवन करें। सेब के सिरके का इस्तेमाल सलाद में भी किया जा सकता है। हालांकि यदि आपको डायबिटीज है या आप इंसुलिन, डिगॉक्सिन या कोई डाइयूरेटिक दवा ले रहे हों तो आपको सेब के सिरके का सेवन नहीं करना चाहिए।

अजवाइन का रस

किडनी की पथरी के लिए अजवाइन का रस बेहद फायदेमंद है। यह विषाक्त पदार्थों को दूर करके किडनी स्टोन बनने से रोकने में मदद करती है। अजवाइन में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है और किडनी स्टोन को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने में प्रभावी तरीके से कार्य करता है। अजवाइन के रस को पानी में मिलाएं और पूरे दिन में कई पानी सेवन करें। लेकिन यदि आपको किसी तरह की ब्लीडिंग होती हो या लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित हों एवं दवाओं का सेवन कर रहे हों तो डॉक्टर से परामर्श लेकर ही अजवाइन के रस का सेवन करना चाहिए।

व्हीटग्रास जूस

व्हीटग्रास जूस पथरी के घरेलू इलाज के काम आता है। व्हीटग्रास जूस में कई तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं जो यूरिन को बढ़ाते हैं और पेशाब के माध्यम से किडनी स्टोन को बाहर निकालने में मदद करते हैं। किडनी स्टोन को निकालने के लिए रोजाना दिन में कई बार व्हीटग्रास जूस का सेवन करना चाहिए। इससे गुर्दे की पथरी बढ़ती भी नहीं है और उससे होने वाले दर्द में भी आराम मिलता है।

अनार का रस

किडनी स्टोन के असहनीय दर्द के इलाज के लिए अनार का रस उपयोगी होता है। किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं के लिए अनार के रस का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। यह सिस्टम से पथरी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। अनार के रस में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो यूरिन के एसिडिक लेवल को कम करता है और गुर्दे की पथरी को बढ़ने से रोकता है। दिन में कई बार अनार का जूस पीने से किडनी स्टोन के असहनीय दर्द से राहत पाया जा सकता है।

ऑलिव ऑयल

एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल किडनी स्टोन का घरेलू इलाज है। यह ऑयल काभी गाढ़ा और पोषक तत्वों से समृद्ध होता है जो मूत्रमार्ग को चिकना करके किडनी स्टोन को बाहर निकालने में मदद करता है। एक गिलास पानी में वर्जिन ऑलिव ऑयल की कुछ बूंदे मिलाकर सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से किडनी स्टोन टूट जाता है और दर्द एवं बेचैनी भी कम हो जाती है।
  किडनी स्टोन का होना आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि आप गुर्दे की पथरी के लक्षण को पहचान कर समय रहते ही इसके लिए इलाज तलाश लें। अक्सर लोग किडनी स्टोन के घरेलू उपाय आजमाते हैं, जो इस्तेमाल में आसान और किडनी स्टोन को घोलकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने में मददगार होते हैं। यदि आप भी किडनी स्टोन की बीमारी से जूझ रहें है तो इस लेख में बताये गए किडनी स्टोन को निकालने के लिए घरेलू इलाज को आजमा सकते हैं। हालांकि यह थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन अपने दम पर गुर्दे की पथरी को बाहर करना संभव है।
पथरी ठीक होने तक उपचार जारी रखना सुनिश्चित करें, और शराब न पियें।
आप इन उपायों को अपने सामान्य आहार में शामिल कर सकते हैं और पथरी की बीमारी ठीक होने के बाद भी इनका उपयोग जारी रख सकते हैं। यह फिर से पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकते है।
विशिष्ट परामर्श-




पथरी के भयंकर दर्द को तुरंत समाप्त करने मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित होती है,जो पथरी- पीड़ा बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज से भी बमुश्किल काबू मे आती है इस औषधि की 2-3 खुराक से आराम लग जाता है| वैध्य श्री दामोदर 9826795656 की जड़ी बूटी - निर्मित दवा से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी पथरी भी आसानी से नष्ट हो जाती है|
गुर्दे की सूजन ,पेशाब मे जलन ,मूत्रकष्ट मे यह औषधि रामबाण की तरह असरदार है| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|
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23.5.24

काली मिर्च के चिकित्सा उपयोग , Kalimich se ilaj




  काली मिर्च को आयुर्वेद (Ayurveda) में विशेष महत्व दिया गया है जो कई औषधिय गुणों (medicinal properties) से भरपूर है। काली मिर्च को लम्बे समय से विभिन्न बीमारियों, स्वास्थ्य समस्याओं और छोटी-मोटी दिक्कतों से आराम दिलाने के लिए घरेलू नुस्खों में भी काली मिर्च का इस्तेमाल किया जाता रहा है। चीन की पारम्परिक चिकित्सा पद्धति (Chinese medicine) में भी काली मिर्च जैसे मसालों (Indian Spices) की मदद से कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जाता रहा है। लेकिन, जिस तरह नमक जैसे फायदेमंद फूड के अधिक सेवन करने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है उसी तरह काली मिर्च का अधिक सेवन भी हेल्थ के लिए बुरा साबित हो सकता है। काली मिर्च के तीखे स्वाद के कारण इसका बहुत ही कम इस्तेमाल किया जाता हैं, लेकिन अनेक प्रकार की बीमारियो में काली मिर्च का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता हैं। पेट, स्किन और हड्डियो से जुड़ी प्रॉब्लम्स को डोर करने में काली मिर्च बहुत ज़्यादा असरदार होती हैं। आज जाँएंगे की इसका कैसे और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करके रोगो को दूर किया जा सकता हैं। यदि आप प्रतिदिन 1 काली मिर्च का सेवन करे तो आपको 56 फायदे होंगे, आइये आज हम आपको बताने जा रहे हैं कालीमिर्च के रामबाण प्रयोग व फायदे।

डायबिटीज-

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आपके लिए काली मिर्च का सेवन फायदेमंद हो सकता है. काली मिर्च में एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक एजेंट होते हैं, जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं.

स्किन-

काली मिर्च सिर्फ स्वाद और सेहत ही नहीं बल्कि सुंदरता को भी बढ़ाने में मददगार है. काली मिर्च के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं.

गठिया रोग

उम्र बढ़ने के साथ ही होने वाला गठिया रोग काली मिर्च का इस्तेमाल बहुत ही फयदेमंद होता हैं। इसे तिल के तेल में जलने तक गरम करे। उसके बाद इस तेल को ठंडा होने पर दर्द वाली जगह आदि पर लगाए आपको बहुत ही आराम मिलेगा।

ब्लड प्रेशर-

ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए भी काली मिर्च का सेवन करना काफी लाभकारी माना जाता है. काली मिर्च को किशमिश के साथ सेवन करने से ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल में रखा जा सकता है.


बालों के लिए काली मिर्च के फायदे

डैंड्रफ की समस्या किसी भी मौसम में हो सकती है। ऐसे में आप काली मिर्च का प्रयोग कर सकती हैं। दरअसल, काली मिर्च में एंटी फंगल गुण होते हैं। आप बालों में दही के साथ काली मिर्च लगा सकती हैं। इसके लिए आपको 1 कप दही में 1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर डालना है।

लो ब्लड प्रेशर 

ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो दिन में दो-तीन बार पांच दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करें।

बवासीर में राहत

जंक फुड के कारण बवासीर की समस्या आजकल ज़्यादातर लोगो को रोग कर रही हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए जीरा, काली मिर्च और चीनी या मिशरी को पीस कर एक साथ मिला ले। सुबह-शाम दो से तीन बार इसे लेने से बवासीर में राहत मिलती हैं

नेत्र ज्योति वर्धक

काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। यह आखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च व चीनी मिलाकर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम खाएं।

मंदाग्रि दूर

काली मिर्च 20 ग्राम, सोंठ पीपल, जीरा व सेंधा नमक सब 10-10 ग्राम मात्रा में पीस कर मिला लें। भोजन के बाद आधा चम्मच चूर्ण थोड़े से जल के साथ फांकने से मंदाग्रि दूर हो जाती है।

जुकाम से राहत

एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च व चुटकी भर हल्दी मिलाकर लें, जुकाम से राहत मिलेगी।

ईम्यूनिटी-

काली मिर्च में विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. काली मिर्च से बने काढ़े का सेवन कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है
काली मिर्च को सुई से छेद कर दीये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी चलना भी बंद हो जाती है।

सावधानी 

दांतों का नुकसान

काली मिर्च का अधिक सेवन करने से दांतों को नुकसान हो सकता है और सड़न की समस्या जन्म ले सकती हैं.

नींद की समस्या

काली मिर्च के सेवन से नींद की समस्या भी हो सकती है, जिससे आपके दिनचर्या पर असर पड़ सकता है.
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