30.11.16

मेथी के दानों से बेहतर होगी सेक्स लाइफ// Fenugreek seeds for better sex life




   मेथी दाना, भारत के घर-घर में मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन मेथीदाना का यह गुण सिर्फ हमारे आयुर्वेद में ही छुपा था कि यह सेक्स लाइफ को बेहतर बनाता है। फिर भी अपनी यौन क्रियाओं को बढ़ाने की इच्छा रखने वाले भारतीय पुरुष अक्सर पश्चिम के उत्पादों की तरफ देखते हैं। किंतु अब इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि इस भारतीय मसाले के बारे में विदेशों में सिद्ध हो गया है कि मेथी इसमें सक्षम है|
गौरतलब है कि भारत में कढ़ी और सब्जियों में इस्तेमाल की जाने वाली मेथी मुख्य तौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में उगाई जाती है। बालों के लिए भी मेथीदाना को गलाकर पेस्ट बनाकर उपयोग किया जाता है। इससे बाल मुलायम, काले और चिकने होते हैं। इसके साथ में ये पुरुषों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

मेथी के बीजों का काढ़ा-
मेथी के बीजों का काढ़ा मधुमेह और ब्लड प्रेशर के रोगियों को लाभ पहुंचाता है।
*कभी-कभी रोगी कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली एलोपैथिक दवाइयां नहीं सहन कर सकते। ऐसे में यदि वे चाय के पानी में थोड़ा-सा मेथी का काढ़ा डाल कर पिएं तो फायदा होगा।
*कहा जाता है कि यदि गर्भावस्था में मेथी के बीज खाएं या इनका काढ़ा दो या तीन बार लें तो बच्चे के जन्म के बाद पर्याप्त मात्रा में शिशु को दूध मिलेगा और आप अपने शिशु को सही मात्रा में दूध पिला सकेंगी व दूध की कमी नहीं होगी। 
मेथी के बीजों का काढ़ा बनाने का एक आसान तरीका- 
चाय के दो चम्मच मेथी के बीज, एक प्याला पानी में उबालें। इसे दस मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें। अब इसे गैस से उतार लें। ठंडा होने के बाद यह काढ़ा दिन में तीन बार लें।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

*यदि आपको पथरी की शिकायत है तो सर्दियों में सुबह सबसे पहले मेथी के काढ़े वाला पानी पिएं। यह पथरी गलाने में मदद करता है।
*ताजा अनुसंधान बताते हैं कि मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है। स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए गुणकारी मेथी का प्रचलन इसे पढ़कर बढ़ तो सकता है लेकिन यह सावधानी जरूरी है कि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन न करें यह गर्म तासीर की वस्तु है। अधिक मात्रा में लेने से यह त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
• शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान करता है-
मेथी शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत मदद करता है। यह शिशु के जन्म के समय गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाकर जन्म की प्रकिया को आसान करने में मदद करता है। इसके कारण यह प्रसव वेदना को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें गर्भधारण के अवस्था में अत्यधिक मात्रा में मेथी न खायें, इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय* 

• स्तन के आकार को बढ़ाता है-
अगर आप स्तन के छोटे आकार को लेकर शर्मिंदा महसूस करते हैं तो मेथी को अपने रोज के आहार में शामिल करें। इसका एस्ट्रोजेन हार्मोन स्तन के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।

27.11.16

मौत को छोड कर हर मर्ज की औषधि है कलौंजी // Benefits of Nigella seeds


मिठाईयों पर लगने वाली काले रंग की कलौंजी तो सबने देखी होंगी। इसका इस्तेमाल मीठी चाशनी में किया जाता है। लेकिन शायद ही किसी ने इस बात की तरफ ध्यान दिया होगा कि यह कलोंजी महज स्वाद के अलावा बहुत से फायदे कराती है। सिवाय मौत से बचने के अलावा कलौंजी हमारे शरीर को हर तरह से ख़राब होने से बचाती है। आइए जानते है काले रंग कि इस कलौंजी के छोटे से बीजों के बड़े फायदे - ये हैं फायदे कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें। पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पीएं। कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है। दूध ब्रेड में ऐसे करें इस्तेमाल दूध में कलौंजी को उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पीएं। कलौंजी को ग्राइंड करें तथा पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें। कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।
 कैसे करें इसका सेवन?
• कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
• पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ।
• दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ।
• कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
• कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
 ये किन-किन रोगों में सहायक है?
1. टाइप-2 डायबिटीज:
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।
2. उच्च रक्तचाप:
100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।
३. गंजापन:
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।
4. त्वचा के विकार:
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।
5. मुँहासे:
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।
6. स्फूर्ति:
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है।
7. गठिया:
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है।
8. जोड़ों का दर्द:
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
9. आँखों के सभी रोग:
आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आँखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आँखों के सभी रोग ठीक होते हैं। आँखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आँखों के रोग समाप्त होते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।
10. स्नायुविक व मानसिक तनाव:
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है।
11. गांठ:
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।
12. मलेरिया का बुखार:
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
13 मिर्गी:
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।
14. स्वप्नदोष:
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष दूर होता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें।
15. पीलिया:
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
16. कैंसर का रोग:
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए।
17. दांत:
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।
18 . नींद:
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।
19. लकवा:
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
20. कान की सूजन, बहरापन:
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।
21. सर्दी-जुकाम:
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।
22. कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
23. छींके:
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।
24. पेट के कीडे़:
दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।
25. प्रसव की पीड़ा:
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है।
26 पोलियों का रोग:
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।
27. मासिकधर्म:
• कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है। इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है।
• जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।
• मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है।
• यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है।
28. कब्ज:
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है।
29. खून की कमी: एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
30. पेट दर्द:
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म  पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
31. सिर दर्द:
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं।
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।
32. उल्टी:
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।
33. हर्निया:
तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है।
34. मिर्गी के दौरें:
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।

35. गर्भवती महिलाओं को वर्जित:
*गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।*
36. स्तनों का आकार:
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।
37. स्तनों में दूध:
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
38. स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।
39. बाल लम्बे व घने:
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने होते हैं।
40. बेरी-बेरी रोग:
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है।
41. भूख का अधिक लगना:
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम होता है।
42. नपुंसकता:
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।
43. खाज-खुजली:
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।
44. नाड़ी का छूटना:
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है। इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें। कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है।
45. हिचकी:
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है। और यदि
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।
46. स्मरण शक्ति:
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
47. पेट की गैस:
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है।
48. पेशाब की जलन:
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



25.11.16

मुहासे ,पिंपल व झाइयों के दाग के निशान हटाने के रामबाण नुस्खे





 *चेहरे को अच्छी तरह धो लें | उसके बाद एक चम्मच मलाई में तीन या चार बादाम पीसकर उसका पेस्ट बना लें | इस पेस्ट से रात को चेहरे की मसाज करके सो जाए और सुबह उठकर बेसन से चेहरे को धो लें और उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लीजिए ऐसा करने से चेहरे की झाइयाँ समाप्त हो जाती है 
 *एक चम्मच मलाई में नीम्बू के रस की पांच से छह बूंदे डाल लेनी है और चेहरे को धोने के बाद इस पेस्ट से चेहरे की मसाज कीजिए ऐसा करने से चेहरे की झाइयाँ जल्द ही समाप्त हो जायेंगी| 

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

* खरबूजे के बीज और उसके छिलके पानी की मदद से पीस लेनें है | इस पेस्ट को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर रखिए और इसके बाद इसे पानी से धो लीजिए इस प्रयोग से झाइयाँ खत्म हो जाती है |
*दो चम्मच बेसन में आधा चम्मच नीम्बू का रस और आधा चम्मच हल्दी मिलाकर उसको दिन में तीन बार 15 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखना है | ऐसा करने से भी आपको लाभ प्राप्त होता है |
*जौ के आटे में शहद मिलाकर उसको चेहरे पर लगा लेना है और जब यह सूख जाए तो इसके उपर दही को लगा ले कुछ देर बाद पानी से इसको धो लें ऐसा करने से त्वचा के सभी प्रकार के दागों को दूर किया जा सकता है |
*उड़द की दाल के पाउडर में गुलाबजल, ग्लिसरीन तथा बादाम रोगन तेल को मिलाकर इसको चेहरे पर लगा लेना है और 15 मिनट के बाद इसको गुनगुने पानी से धो लेना है | ऐसा करने से झाइयाँ समाप्त हो जाती है |
*बरगद से निकलने वाले दूध को चेहरे पर लगाने से लगाने से भी झाइयाँ ख़त्म हो जाती है
*गाजर तथा गाजर के रस से भी झाइयों से बचा जा सकता है |


स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

*पपीते को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर चेहरे पर घिसने से भी चेहरे की झाइयों को दूर किया जा सकता है |
*शहद की मदद से भी चेहरे की झाइयों को खत्म किया जा सकता है |
*तुलसी के पत्तो का रस तथा संतरे के रस को रात को सोते समय चेहरे पर लगा लेना है और सुबह उठकर उसे गुनगुने पानी से धो लेना है | इससे भी झाइयों में आराम मिलता है |
सरसों के तेल को प्रतिदिन नाभि में लगाने से चेहरा तथा होंठ मुलायम बन जाते है


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20.11.16

मेथी , अजवाइन , और काली जीरी का चमत्कारी मिश्रण


जो लोग कब्ज और पेट संबंधी बीमारियों से परेशान हैं, उनके लिए एक नायाब नुस्खा है त्रियोग। यह तीन चीजों का योग है जिसे मैथीदाना, अजवाइन और काली जीरी मिला कर बनाया जाता है। तीनों चीजें सहजता से उपलब्ध हैं और औषधि गुणों से भरपूर हैं। 
मैथीदाना 250 ग्राम,
 अजवाइन 100 ग्राम 
और काली जीरी(Vernonia Anthelmintica) 50 ग्राम लें।'   
तीनों को बारीक पीस कर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण रोज आधा चम्मच मात्रा में रात को सोते समय गर्म पानी के साथ लिया जाए तो पेट के तमाम रोगों में फायदा करता है। कब्ज तो कोसों दूर हो जाता है। इसके साथ पथ्य भी करें तो परिणाम बेहतर मिलते हैं। पथ्य अर्थात तली गुली चीजें, बेसन और मैदे से बनी चीजों से यथा संभव परहेज करें। भोजन में सलाद व रेशे वाले पदार्थ अधिक लें। यह नुस्खा गैस, अपच, भूख न लगना, भोजन के प्रति अरुचि आदि रोगों में बेहद लाभ करता है।
 अन्य फायदे-

*.मधुमेह काबू में रहेगा< स्त्रियों में शादी के बाद होने वाली तकलीफें दूर होंगी
*.नपुंसकता दूर होगी, बच्चा होगा वह भी तेजस्वी होगा

*.त्वचा के रंग में निखार आएगा
*जीवन निरोग, चिंता रहित और स्फूर्तिदायक बनेगा
*.कफ से मुक्ति मिलती है

*हृदय की कार्य क्षमता बढ़ती है
.*थकान नहीं रहेगी, अश्व के समान बल आएगा
.*स्मरण शक्ति बढ़ती है
*शरीर की रक्तवाहिनियां शुद्ध होंगी
 *.गठिया दूर होता है



गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


*.हड्डियां मजबूत होती हैं
*आँखों की रोशनी बढ़ती है
*.बालों का विकास होता है
*शरीर में रक्तसंचार तीव्र होता है
कम से कम दो माह में अपेक्षित परिणाम मिलने लगेंगे।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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7 दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर करने के घरेलु नुस्खे //Home remedies to remove the breasts looseness in 7 days





स्त्री के सौन्दर्य में उसके स्तन विशेष भूमिका निभाते हैं. मगर अनेक कारणों के चलते उनके स्तन ढीले पड़ जाते हैं, और ढीले स्तनों से उसका सौन्दर्य फीका पड़ जाता है. आज हम आपको इसी कड़ी में बताने जा रहें है ऐसा रामबाण घरेलु नुस्खा जिसको एक हफ्ते से तीन महीने इस्तेमाल करने से ऐसा नतीजा मिलेगा जो महंगे से महंगी क्रीम भी ना दे पायेगी|
नोट करलें ये घरेलु नुस्खा.
फिटकरी – 5 ग्राम.
कपूर – 2 ग्राम.
राई – 50 ग्राम.
गज पीपली – 30 ग्राम.
ये सब सामान आपको किसी भी पंसारी से बड़ी आसानी से मिल जायेगा.|
सबसे पहले आप फिटकरी कपूर राई और गज पीपली को थोडा पानी मिलाकर अच्छे से खरल कर लीजिये. (ऊपर खरल की तस्वीर दे रखी है) पानी धीरे धीरे मिलाते रहे जिस से ये अच्छे से गाढ़ा लेप बन जाए. ये लेप अभी तैयार है आपके स्तनों को टाइट करने के लिए.
स्तनों का ढीलापन दूर करने के लिए रामबाण घरेलु नुस्खा बनाने की विधि.-

स्तनों पर लगाने की विधि.-

सुबह नहाने के बाद इस लेप को वक्ष स्थल पर हलके हाथ से मसाज करते हुए लगाये. इसकी इतनी मसाज करें के ये त्वचा के अन्दर अवशोषित हो जाए. इसके बाद ये रात को फिर सोने से पहले स्तन धो कर उन पर लगायें. ऐसा करने से एक हफ्ते से तीन महीने के अन्दर ये चमत्कारी रूप से टाइट हो जायेंगे.

कैसे बनाये स्तनों को सुन्दर और सुडौल-

स्त्री की सौंदर्यता को बनाये रखने में उनके स्तन की अपनी विशेष भूमिका मानी जाती है क्योंकि स्तन मण्डल (वक्षस्थल) यदि ढीले और कमजोर होते हैं, तो उसकी शरीर सौंदर्यता कम होती है इसी प्रकार यदि स्तन आकर्षक, पुष्ट और प्राकृतिक रूप से सुडौल होते हैं तो वह नारी की सौंदर्यता को और अधिक निखार देते हैं।
मुनक्का (द्राक्षा) 50 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर तज 3 ग्राम, तेजपात 3 ग्राम, नागरमोथा 3 ग्राम, सूखा पोदीना 3 ग्राम, पीपल 3 ग्राम, खुरासानी अजवायन 3 ग्राम, छोटी इलायची 3 ग्राम, तालीस के पत्ते 5 ग्राम, वंशलोचन 5 ग्राम, जावित्री 5 ग्राम, खेतचन्दन 5 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम, जायफल 5 ग्राम, सफेद जीरा 7 ग्राम, बिनौला की गिरी 13 ग्राम, लौंग 13 ग्राम, सूखा धनिया 13 ग्राम, पीपल की जड़ 13 ग्राम, खिरनी के बीज 45 ग्राम, बादाम की गिरी 50 ग्राम, पिस्ता 50 ग्राम, सुपारी एक किलो, शहद और चीनी 1-1 किलो और गाय का देशी घी आधा किलो आदि लें। इसके बाद 50 ग्राम पिसा हुआ मुनक्का और सुपारी चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर धीमी आग पर भूने, चीनी और शहद को छोड़कर सभी पदार्थो (द्रव्यों) को डाल दें, उसके बाद चीनी और शहद की चाशनी बनाकर मिला दें, फिर उसके बाद सभी चीजों को अच्छी तरह पकाकर उतारकर ठंडा करके सुबह-शाम पिलाने से नारी के स्तनों की सौंदर्यता बढ़ती है और योनि की बीमारियों का नाश और योनि को टाईट करती है।
*असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं।
 *कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं।

एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार

*जैतून के तेल की स्तनों पर धीरे-धीरे मालिश करने से करने से स्तनों की सुन्दरता बढ़ जाती है।गंभारी की 2 किलोग्राम छाल को पीसकर 16 लीटर पानी में मिलाकर चतुर्थांश काढा बना लें। गम्भारी की 250 ग्राम छाल को पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें। गम्भारी के कल्क यानी लई और काढ़े में 1 लीटर तिल का तेल मिलाकर रख लें। इस तेल को रूई में भिगोकर स्तनों पर रखने से, ढीले और लटके हुए स्तन टाईट और सुन्दर हो जाते हैं।
*कमल के बीजों को पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में थोड़ी मिश्री मिलाकर बराबर रूप से 4-6 हफ्ते तक सेवन करने से स्तन कस जाते हैं और वे कठोर बन जाएंगे।

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13.11.16

तोरी के स्वास्थवर्धक फायदे



सब्जी के रूप में तोरी हर जगह खाई जाती है। तुरूई को अंग्रजी में लुफफा एक्युटंगुला कहा जाता है। यह कई तरह की बीमारियों के उपचार में काम आती है। बहुत ही कम लोग तुरई के फायदों के बारे में जानते हैं। आदिवासी क्षेत्रों में तुरई को बहुत अच्छे तरह से खाने के लिए बनाया जाता है। आजकल हम लोगों के खान-पान में बदलाव आ गया है जिसकी वजह से शरीर को कई तरह की बीमारियां लगना भी आसान हो गया है। ऐसे में जरूरी है कि जहां हम एक तरफ फास्ट फूड का सेवन अधिक करते हैं उनकी जगह प्राकृतिक सब्जीयों को प्रयोग करके हम कई तरह के बीमारियों से बच सकते हैं। 

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अब जानते हैं तुरई के स्वास्थवर्धक फायदे -

डायबिटीज रोग में तुरई-
मधुमेह यानि डायबिटीज में तुरई एक कारगर औषधि का काम करती है। इसमें इंसुलीन की तरह पेपटाइडस होता है। इसलिए जो लोग शुगर से परेशान हैं वे तुरई की खूब सब्जी खाएं।
लीवर की समस्य में तोरी-
तुरई की सब्जी खाने से लीवर की समस्याएं ठीक होती हैं। इसके अलावा तोरी लीवर में खून को साफ करती है। लीवर के लिए यह किसी गुणकारी औषधि से कम नहीं होती है।

किडनी फेल्योर(गुर्दे खराब) रोगी घबराएँ नहीं,ये है अनुपम औषधि.

पथरी निकाले-पथरी को ठीक करने के लिए और इसके दर्द से बचने के लिए आप तुरई के बेल को पानी या फिर दूध के साथ घिसकर एक सप्ताह तक सेवन करें।

पीलिया की बीमारी-
यदि किसी कारणवश पीलिया रोग हो जाए तो आप तोरी के फल के रस की कम से कम दो बूंदे रोगी के नाक में डालें। इस उपाय से नाक से पीले रंग का पदार्थ बाहर आ जाता है और पीलिया जल्दी ठीक हो जाता है।
बालों को काला करने के लिए -

यदि बाल समय से पहले सफेद हो गए हों तो आप तुरई के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर इसे सुखा लें और इसके सुखे हुए टुुकड़ों को नारियल तेल में मिला लें और कम से कम पांच दिनों तक इसे रखे रहें। और इस तेल को हल्का गरम करने के बाद बालों पर लगाएं । इस तेल कि नियमित मालिश करने से बाल जल्दी काले हो जाते हैं।

*गठिया रोग के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार*

पेट दर्द में-
यदि पेट में दर्द हो रहा हो तो आप तुरई की सब्जी का सेवन करें। यह पेट दर्द दूर करने का आसान उपाय है। पेट दर्द की मुख्य वजह है अपच है। तुरूई अपच को खत्म कर देती है। जो लोग लंबे समय से तोरी की सब्जी खाते हैं उन्हें कब्ज और पेट दर्द नहीं होता है।
दाद, खुजली और खाज -
दाद, खाज और खुजली की समस्या से यदि आप परेशान हैं तो तुरई के बीजों और पत्तों को पानी के साथ पीसकर इसका पेस्ट बनाएं और इसका लेप त्वचा पर लगाएं। यह खुजली और दाद से तुरंत राहत देती है। इसके अलावा आप तुरई के इस पेस्ट को कुष्ठ रोग पर भी लगा सकते हो।

12.11.16

जीरा और केले के इस अद्भुत मिश्रण से 10 गुना तेज़ी से पेट की चर्बी पिघलेगी






जीरा और केले का अद्भुत मिश्रण :
आज कल की लाइफस्टाइल के कारण हर दूसरा व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है। जिससे निजात पाने के लिए वह हर उपाय को अपना रहा है। जो कि संभव है। भागदौड़ भरी लाइफ से वह खुद का वजन कम करने के लिए डाइटिंग, एक्सरसाइज, जिम आदि में अपना पसीना बहाकर इस समस्या से निजात पाना चाहते हैं।
इतना ही नहीं वह वजन को कम करने के लिए दवाओं का भी सहारा ले रहे है। लेकिन आप जानते है कि दवा खाने से आपको बाद में इसके साइड इफेक्ट भी नजर आएगे। मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण अनियमित खानपान, दिनचर्या है। जिसके कारण हमारा वजन दिनो-दिन बढ़ता जाता है।

थकान दूर करने के उपाय

आजकल के हेल्दी नहीं सिर्फ टेस्टी खाना खाने के चक्कर में लोगों का वज़न बढ़ता जा रहा है। अगर आप सच में इस समस्या से निजात पाना चाहते है, तो हम अपनी खबर में एक ऐसे घरेलू उपाय के बारें में बता रहे है। जिससे आप आसानी से कुछ ही दिनो में पेट की चर्बी से निजात पा सकते है।
केले और जीरे के इस अनोखे उपाय से आप अपने पेट की चर्बी आसानी से कम कर सकते है। आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है कि जीरा पेट में जाकर पेट की चर्बी से निजात दिलाता है। वही केला पाचन तंत्र को सही रखता है। साथ ही पेट में होने वाले अल्सर से आपकी रक्षा करता है। इसलिए इसका सेवन करने से आपका वजन आसानी से कम हो जाता है।

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जीरा और केले का अद्भुत मिश्रण बनाने की विधि :
इस मिश्रण को बनाने के लिए पका हुआ केला लेकर एक बाउल में मैश कर लें। इसके बाद इसमें भूना हुआ जीरा डालकर अच्छी तरह मिला लें। दिन में कम से कम दो बार इसका सेवन करें। इसकी सेवन करने से कुछ ही दिनों में आपको पेट की चर्बी से निजात मिल जाएगा।

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7.11.16

भोजन कब,कैसे,कितना खाएं ?: Food when, how, how much to eat?



भोजन से केवल भूख ही शांत नहीं होती बल्कि इसका प्रभाव तन, मन एवं मस्तिष्क पर पड़ता है। अनीति (पाप) से कमाए पैसे के भोजन से मन दूषित होता है (जैसा खाओ अन्न वैसा बने मन) वहीं तले हुए, मसालेदार, बासी, रूखे एवं गरिष्ठ भोजन से मस्तिष्क में काम, क्रोध, तनाव जैसी वृत्तियां जन्म लेती हैं। भूख से अधिक या कम मात्रा में भोजन करने से तन रोगग्रस्त बनता है।

दिव्य औषधि कस्तुरी के अनुपम प्रयोग 


*भोजन से ऊर्जा के साथ-साथ सप्त धातुएं (रक्त, मांस, मज्जा, अस्थि आदि) पुष्ट होती हैं। केवल खाना खाने से ऊर्जा नहीं मिलती, खाना खाकर उसे पचाने से ऊर्जा प्राप्त होती है। परंतु भागदौड़ एवं व्यस्तता के कारण.मनुष्य शरीर की मुख्य आवश्यकता भोजन पर ध्यान नहीं देता।   \
*एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है,'सुबह का खाना स्वयं खाओ, दोपहर का खाना दूसरों को दो और रात का भोजन दुश्मन को दो।' वास्तव में हमें सुबह 10 से 11 बजे के बीच भोजन कर लेना चाहिए ताकि दिनभर कार्य करने के लिए ऊर्जा मिल सके |

 

*अच्छी भूख लगने पर ही खाना खाये|
 *बिना भूख लगे खाना बीमारियो को बुलावा देने के समान है|
 *चिन्ता,गुस्सा, डर ,जल्दी इस प्रकार की स्थिति में भोजन न करे |
*दोपहर में भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम अवश्य करे|
 *पहले से भरे पेट को और ठूँस-ठूँसकर न भरे|


किडनी फेल्योर(गुर्दे खराब) रोगी घबराएँ नहीं,ये है अनुपम औषधि.


* दिन में अन्न का भोजन एक बार या ज्यादा से ज्यादा 2 बार करे |
* अपनी पाचन तंत्र शक्ति से थोड़ा कम ही खाए.||
 *भोजन को अच्छी तरह चबा चबाकर खाए|
* फलो या सलाद में नमक का प्रयोग न करे|.
 

**फलो को हमेशा धोकर काटे क्योकि काटने के बाद धोने से पोषण तत्व पानी में ही निकल जाते है|
*इसी तरह काट कर रखने से इनके पोषण तत्व वायु के द्वारा निकल जाते है|
*ज्यादा गर्म जयादा ठंडा खाना न खाए|


प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

*टीवी देखते या अखबार पढ़ते हुए खाना नहीं खाना चाहिए। स्वाद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए भोजन करना चाहिए।   
*कुछ लोग सुबह चाय-नाश्ता करके रात्रि में भोजन करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता।  
*दिन का भोजन शारीरिक श्रम के अनुसार एवं रात का भोजन हल्का व सुपाच्य होना चाहिए। रात्रि का भोजन *सोने से दो या तीन घंटे पूर्व करना चाहिए। तीव्र भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। । नियत समय पर भोजन करने से पाचन अच्छा होता है।
*स्वादलोलुपता में भूख से अधिक खाना बीमारियों को आमंत्रण देना है। भोजन हमेशा शांत एवं प्रसन्नाचित्त होकर करना चाहिए  
*भोजन करते समय मौन रहना चाहिए। इससे भोजन में लार मिलने से भोजन का पाचन अच्छा होता है।   

क्या-क्या न खाएं -

रात्रि को दही, सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, मछली, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।