28.3.17

कलमी शोरा (पोटाशियम नाईटेरेट) के गुण उपयोग




विभिन्न रोगों मे कलमी शोरा के के उपयोग

बवासीर -


*कलमी शोरा और रसोंत बराबर मात्रा में लेकर मूली के रस में पीस लें,यह पेस्ट बवासिर के मस्सो पर लगाने से
तुरंत राहत मिलती है।
*घोड़े के बाल से मस्से को काटकर  उस पर कलमी शोरा नींबू के रस मे मिलाकर लगाने से  मस्सा समाप्त हो जाता है| और घाव भी नहीं बनता है|

स्त्रियॉं मे सफ़ेद पानी जाना -

  आधा ग्राम कलमी शोरा और एक ग्राम का चौथा भाग  फिटकरी का चूर्ण दिन मे तीन बार पानी के साथ लेने से श्वेत प्रदर  काबू मे आ जाता है|

पेशाब बंद हो जाने मे-

अगर उल्टी दस्त और पेशाब बंद हो जाये तो कलमी शोरा को पीसकर उसमे कपड़ा भिगोकर रोगी के पेडू(नाभि) पर रखने से पेशाब खुल कर आने लगता है|

पथरी मे-

कलमी शोरा, बड़ी इलायची के दाने, मलाई रहित ठंडा दूध व पानी। कलमी शोरा व बड़ी इलायची के दाने महीन पीसकर दोनों चूर्ण समान मात्रा में लाकर मिलाकर शीशी में भर लें।एक भाग दूध व एक भाग ठंडा पानी मिलाकर फेंट लें, इसकी मात्रा 300 एमएल होनी चाहिए। एक चम्मच चूर्ण फांककर यह फेंटा हुआ दूध पी लें। यह पहली खुराक हुई। दूसरी खुराक दोपहर में व तीसरी खुराक शाम को लें।दोदिन तक यह प्रयोग करने से पेशाब की जलन दूर होती है व मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

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26.3.17

कुलथी के गुण और पथरी नाशक प्रयोग


     पथरी की समस्या अब हर घर की समस्या बनती जा रही है। ये रोग कष्टदायी रोग है। जिसमें रोगी को भंयकर दर्द से गुजरना पड़ता है। पहले यह समस्या 30 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में पाई जाती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों को भी पथरी की समस्या होने लगी है। जिसके कई कारण हैं। महिलाओं की उपेक्षा पुरूषों में पथरी की समस्या अधिक होती है। वैसे तो इस रोग में कई आयुवेर्दिक उपाय हैं लेकिन सबसे ज्यादा कारगर उपाय है कुलथी की दाल जिसे गैथ भी कहा जाता है। उत्तराखंड में इस दाल का काफी प्रचलन है। यह दाल पथरी को खत्म करने का एक कारगर औषधि है।कई लोगो को अक्सर ही (पत्थरी) स्टोन की समस्या आम ही रहती हैं। बार बार ऑपरेशन करवाने के बाद भी उनको ये समस्या दोबारा हो जाती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्युकी उनका शरीर भोजन द्वारा ग्रहण किये हुए कैल्शियम को पचा नहीं पाता। और किडनी भी शरीर की गंदगी की सफाई करते समय इसको साफ़ करने में असक्षम हो जाती हैं और यही से ये हमारे मूत्राशय को भी प्रभावित करती हैं।
कुलथी दाल क्या है?
यह दाल पथरीनाशक है। कथुली की दाल में विटामिन ए पाया जाता है जो शरीर में पथरी को गलाने में सहायक है। गुर्दे की पथरी और पित्ताशय की पथरी को खत्म करने में फायदेमंद होती है।
कुथली की दाल आपको किसी भी दुकान में मिल जाती है। यदि नहीं मिलती है तो यह दाल आप किसी उत्तराखंड निवासी से मंगवा सकते हैं। पहाड़ों में यह दाल काफी मात्रा में पाई जाती है।
कैसे करें कुथली का इस्तेमाल
कुथली की दाल को 250 ग्राम मात्रा में लें और इसे अच्छे से साफ कर लें। और रात को 3 लीटर पानी में भिगों कर रख दें। सुबह होते ही इस भीगी हुई दाल को पानी सहित हल्की आग में 4 घंटे तक पकाएं। और जब पानी 1 लीटर रह जाए तब उसमें 30 ग्राम देशी घी का छोंक लगा दें। और उसमें काली मिर्च, सेंधा नमक, जीरा और हल्दी डाल सकते हो।
कब करें कुलथी का सेवन
कुथली के पानी को दिन में दोपहर के खाने की जगह ले सकते हो। इसे सूप की तरह पीएं। 1 से 2 सप्ताह तक नियमित एैसा करने से मूत्राशय और गुर्दे की पथरी गल कर बाहर आ जाती है।
गुर्दे में यदि सूजन हो तो कुथली के इस पानी को अधिक से अधिक पीएं।
सूप के साथ रोटी का सेवन भी कर सकते हो।
कुथली की दाल का सेवन करने से कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
पथरी में और क्या खांए
पथरी में कुल्थी के अलावा आप खरबूजे के बीज, मूली, आंवला, जौ, मूंग की दाल और चोलाई की सब्जी भी खा सकते हो। साथ ही रोज 5 से 8 गिलास सादा पानी रोज पीएं।
किस चीज से परहेज करें
पथरी के रोगी को उड़द की दाल, मेवे, चाकलेट, मांसाहार, चाय, बैगन, टमाटर और चावल नहीं खाने चाहिए।
कुथली का पानी बनाने का तरीका
250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुथली की दाल को डालें। और रात में ढक कर रख लें। सुबह इस पानी को अच्छे से मिलाकर खाली पेट पी लें।
जिस इंसान को पथरी एक बार हो जाती है, उसे दोबारा होने का खतरा होता है । इसलिए पथरी निकालने के बाद भी रोगी को कुथली का कभी-कभी सेवन करते रहना चाहिए । कुलथी पथरी में औषधि के समान है।
गुर्दे से जुड़ी कई समस्याएं हैं, मसलन गुर्दे में दर्द, मूत्र में जलन या मूत्र का अधिक या कम आना आदि।
इन्हीं समस्याओं में से एक समस्या, जिसके पीडि़तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वह है किडनी में पथरी।
आयुर्वेद व घरेलू चिकित्सा में किडनी की पथरी में कुलथी को फायदेमंद माना गया है। गुणों की दृष्टि से कुल्थी पथरी एवं शर्करानाशक है। वात एवं कफ का शमन करती है और शरीर में उसका संचय रोकती है। कुल्थी में पथरी का भेदन तथा मूत्रल दोनों गुण होने से यह पथरी बनने की प्रवृत्ति और पुनरावृत्ति रोकती है। इसके अतिरिक्त यह यकृत व पलीहा के दोष में लाभदायक है। मोटापा भी दूर होता है।
250 ग्राम कुल्थी कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ कर लें। रात में तीन लिटर पानी में भिगो दें। सवेरे भीगी हुई कुल्थी उसी पानी सहित धीमी आग पर चार घंटे पकाएं। जब एक लिटर पानी रह जाए (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब नीचे उतार लें। फिर तीस ग्राम से पचास ग्राम (पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का उसमें छोंक लगाएं। छोंक में थोड़ा-सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। पथरीनाशक औषधि तैयार है।
आप दिन में कम-से-कम एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर यह सारा सूप पी जाएं। 250 ग्राम पानी अवश्य पिएं।
एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है, लगातार सेवन करते रहना राहत देता है।
यदि भोजन के बिना कोई व्यक्ति रह न सके तो सूप के साथ एकाध रोटी लेने में कोई हानि नहीं है।
गुर्दे में सूजन की स्थिति में जितना पानी पी सकें, पीने से दस दिन में गुर्दे का प्रदाह ठीक होता है।
यह कमर-दर्द की भी रामबाण दवा है। कुल्थी की दाल साधारण दालों की तरह पका कर रोटी के साथ प्रतिदिन खाने से भी पथरी पेशाब के रास्ते टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है। यह दाल मज्जा (हड्डियों के अंदर की चिकनाई) बढ़ाने वाली है।
पथरी में ये खाएं
कुल्थी के अलावा खीरा, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, चौलाई का साग, मूली, आंवला, अनन्नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल, गोखरु आदि खाएं। कुल्थी के सेवन के साथ दिन में 6 से 8 गिलास सादा पानी पीना, खासकर गुर्दे की बीमारियों में बहुत हितकारी सिद्ध होता है।

ये न खाएं

पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि। मूत्र को रोकना नहीं चाहिए। लगातार एक घंटे से अधिक एक आसन पर न बैठें।
कुल्थी का पानी भी लाभदायक
कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है। किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें। किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या कांच के मर्तबान में सुरक्षित रख लें।
कुल्थी का पानी बनाने की विधि:
किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें। प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें। फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें, जिसे दोपहर में पी लें। दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें।
इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं। महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है।
कुलथी को कई रोगों के इलाज में प्रयोग में लाया जाता है और कुछ का विवरण नीचे दिया गया है –
श्वेत प्रदर– थोड़ी सी कुल्थी लेकर उसका दस गुना पानी लेकर उसमें कुल्थी उबाले। उसे छानकर आवश्यकतानुसार यह पानी पीना लाभकारी है।

मोटापा-
100 ग्राम कुल्थी की दाल प्रतिदिन खाने से मोटापा घटता है।
वात ज्वर-
 लगभग 50-60 ग्राम कुल्थी लगभग 1 किलो जल में चैथाई (250 ग्राम) पानी रहने तक उबालें। फिर उसे छान लें और आवश्यकतानुसार सेंधा नमक व लगभग 1/2 चम्मच पिसी सौंठ लें। इसे पीने से वात ज्वर में लाभ होगा।
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 विशिष्ट  परामर्श- 
      
वैध्य श्री दामोदर 9826795656  की जड़ी बूटी - निर्मित औषधि से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी  पथरी  भी  आसानी से नष्ट हो जाती है|  पथरी के भयंकर दर्द और गुर्दे की सूजन,पेशाब मे दिक्कत,जलन को तुरंत समाप्त करने मे यह  औषधि  रामबाण की तरह असरदार है|जो पथरी का दर्द महंगे इंजेक्शन से भी काबू मे नहीं आता ,इस औषधि की कुछ ही खुराक लेने से आराम लग जाता है|  आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|औषधि मनी बेक गारंटी युक्त है|




जवानी कायम रखने का आयुर्वेदिक नुस्खा


   

    यौवन एक एसा विषय है जिसे कौन नही पाना चाहता है और फिर बात अगर सदाबहार यौवन की की जाए तो मै समझता हूँ कि वृद्ध भी सोचने लगेंगे कि भाई अगर यह मिल जाए तो है वैद्य तुम्हारा अति भला हो।लैकिन सौभाग्य से भारत में ऐसे योगों की कमी नही है कमी हो रही है तो जानने बालों की जिसके चलते आज आयुर्वेद का ज्ञान क्षीण प्राय हो चला है।और सबसे ज्यादा चिन्ता इस बात की है कि सरकारी स्तर से आयुर्वेद सीखे हुये बी.ए.एम.एस डाक्टर्स आज एलोपैथ चिकित्सा करते हुए आयुर्वेदिक ज्ञान को फैला तो रहै ही नही हैं अपितु खुद भी उस ज्ञान का प्रयोग न करके भूलते चले जा रहै हैं।लैकिन भारत भूमि उर्वरा है उसमें ज्ञान की न तो कमी ही है न ही नये लोगो का इस ज्ञान में आना बंद हो रहा है हाँ इतना जरुर है।संख्या कम जरुर है।खैर इस बात को यही विराम देते हुये अब आते हैं मुद्दे की बात पर तो भाईयो आयुर्वेद ऐसा चिकित्सा भण्डार है जो अकेला आपकी चिकित्सा की ही नही आपको निरोगी बनाने की गारंटी भी लेता है।और जब निरोग रहैंगे तो चिकित्सा की जरुरत भी नही होगी तो मुझे यह कहते हुये गर्व होता है कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन का ज्ञान है।
आज मैं बता रहा हूँ एक ऐसा योग जो आपको हमेशा युवा बनाए रखेगा।यह योग चिकित्सा ज्ञान का आयुर्वेदिक रत्न रस तरंगिणी का है याद रखे यह एक ऐसा आयुर्वेदिक ग्रंथ है जहाँ ऐलौपेथ के सारे नुस्खे बौने सावित हो जाते हैं या यो कहैं कि आयुर्वेदिक त्वरित चिकित्सा सूत्र है यह ग्रंथ...................
अब इस योग की सामग्री लिखें -
  आंवलसार गंधक व सूखा आंवला 50-50 ग्राम अलग अलग चूर्ण ले तथा मिला लें।आजकल आंवले आ रहे है तो ताजा आंवलों का रस तथा सेमल की मूसली को लेकर उसका भी रस निकाल लें तथा पहले बताऐ गये चूर्ण को इनमे अलग अलग भिगोकर 7-7 बार सुखा लें या आयुर्वेदिक भाषा में कहें तो भावना दे लें।बस बन गया आपका आयुर्वेदिक सदाबहार यौवन दाता योग जो आपके शरीर को पुनर्यौवन प्रदान करने की शक्ति रखता है।कम से कम तीन महिने इस योग को केवल एक ग्राम की मात्रा में लेकर मिश्री के साथ सेवन करने से वृद्ध व्यक्ति भी यौवन से झरझरा उठेगा।यह योग अत्यन्त यौवन शक्ति दाता योग है।
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रोग के अनुसार आयुर्वेदिक औषधि// Ayurvedic medicine according to the disease


आयुर्वेद के चमत्कार के लिए चित्र परिणाम
शरद ऋतु में विशेष रूप से सेवन योग्य (पौष्टिक) :
 बादाम पाक, बसंत, कुसुमाकर रस, च्यवनप्राश अवलेह (स्पेशल) दयाल तेल, दशमूलारिष्ट।
विषम ज्वर (मलेरिया) :
. विषम ज्वरांतक लौह, सुदर्शन चूर्ण, महासुदर्शन काढ़ा, अमृतारिष्ट, ज्वरांकुश रस, सत्व गिलोय।
वात श्लेष्मिक ज्वर (एन्फ्लूएन्जा) : त्रिभुवन कीर्ति रस, लक्ष्मी विलास रस, संजीवनी वटी, पीपल 64 प्रहरी, अमृतारिष्ट।
श्लीपद (हाथी पाँव) :
 नित्यनंद रस, मल्ल सिंदूर।
जीर्ण ज्वर व अन्य : 
स्वर्ण वसंत मालती, सितोपलादि चूर्ण, अमृतराष्टि, मत्युंजय रस, आनंद भैरव, गोदंती भस्म, सर्वज्वरहर लौह, संजीवनी, 
ज्वरांकुश रस ,महालाक्षादि तेल।
पार्श्व शूल (प्लूरिसरी, फेफेड़ों में पानी भरना) :
 नारदीय लक्ष्मी विलास रस, स्वर्ण वसंत मालती, मृगश्रृंग भस्म, रस सिंदूर।
खालित्य (बालों का गिरना, गंजापन) :
 महाभृंगराज तेल, हस्तिदंतमसी, च्यवनप्राश अवलेह।
विचर्चिका (छाजन, एग्जिमा) : 
चर्म रोगांतक मरहम, गुडुच्यादि तेल, रस माणिक्य, महामरिचादि तेल गंधक रसायन, त्रिफला चूर्ण, पुभष्पांजन, रक्त शोध, खदिरादिष्ट, महामंजिष्ठादि काढ़ा।
पालित्य (बाल सफेद होना) :
 महाभृंगराज तेल, भृंगराजसव, च्यवनप्राश।
हिक्का रोग (हिचकी आना) : 
सूतशेखर स्वर्णयुक्त, मयूर चन्द्रिका भस्म, एलादि वटी, एलादि चूर्ण।
तमक श्वास (दवा)
कफकेयर, च्यवनप्राश अवलेह, सितोपलादि चूर्ण, श्वासकास, चिंतामणि कनकासव, शर्बत वासा, वासारिष्ट, वासावलेह, मयूर चन्द्रिका भस्म, अभ्रक भस्म तेल।
कास रोग (कफ खांसी) : 
कफकेयर शर्बत वासा, वासावलेह, वासारिष्ट खदिरादि वटी, मरिचादि वटी, लवंगादि वटी, त्रिकुट चूर्ण, द्राक्षारिष्ट, एलादि वटी, कालीसादि चूर्ण, कफकेतु रस, अभ्रक भस्म, श्रृंगारभ्र रस बबूलारिष्ट।
राजयक्षमा (टीबी) : स्वर्ण वसंत मालती, लक्ष्मी विलास रस, मृगांक रस, वृहत्‌ श्रृंगारभ्र रस, राजमृगांक रस, वासावलेह, द्राक्षासव, च्यवनप्राश अवलेह, महालक्ष्मी विलास रस।
उर्ध्व रक्तपित्त (कफ के साथ अणवा उल्टी में खून आना)
कफकेयर, शर्बत वासा, कामदुधा रस मौ.यु. कहरवा पिष्टी, वासावलेह, प्रवाल पिष्टी, वासारिष्ट, बोलबद्ध चूर्ण, बोल पर्पटी, रक्त पित्तांतक लौह कुष्माण्ड अवलेह।

दद्रु (दाद, रिंगवर्म) :
 सोमराजी तेल, गंधक रसायन।

पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

शीत पित्त (पित्ती) : 
हरिद्राखंड, कामदुधा रस, आरोग्यवर्द्धिनी वटी, सूतशेखर रस।
पिदक (गर्मी की मरोरी, पसीना) : खमीरा संदल, प्रवालयुक्त, गुलकन्द, प्रवाल पिष्टी, जहर मोहरा पिष्टी, सारिवाद्यासव।
खाज-खुजली, फोड़े-फुंसी, रक्त विकार : 
रक्त शोधक, खदिराष्टि, महामंजिष्ठादि काढ़ा, सारिवाद्यासव, महामरिचादि तेल, रोगन नीम, गंधक रसायन, केशर गूगल, आरोग्यवर्द्धनी, जात्यादि तेल, चर्मरोगांतक मरहम,पुष्पांजन।
कुष्ठ (सफेद दाग) : 
सोगन बावची, खदिरादिष्ट, आरोग्यवर्द्धिनी वटी, रस माणिक्य, गंधक रसायन, चालमोगरा तेल, महामंजिष्ठादि क्वाथ।
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25.3.17

मकोय के आयुर्वेदिक गुण फायदे उपयोग :पीलिया की दवा



  मकोय एक प्राकृतिक औषधि है जिसे कामोनी भी कहा जाता है। यह अलग.अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। जैसे काकमाची, मको, गुड़ कामाई, कचमच, पीलूड़ी, चरगोटी और गजचेट्टू आदि। इसका फल सफेद रंग का होता है और पकने के बाद यह काला हो जाता है। मकोय फल बाग-बगीचों, नदी नालो के किनारे आदि जगहों पर अपने आप उगता है। बहुत ही कम लोग जानते होगें आखिर यह फल हमें क्या फायदे दे सकता है। मकोय का फल एक चमत्कारिक औषधि है जो कई खतरनाक बीमारियों को खत्म कर सकती है।
मौसम बदलने के साथ ही पीलिया (जॉन्डिस) का प्रकोप बढ़ रहा है। पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है।        आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
मकोय के गुण
मकोय भूख को बढ़ाने वाला होता है इसके अलावा यह फल …
गठिया,
बवासीर,
सूजन,
कोढ़,
दिल के रोग के अलावा आंखों की बीमारी, खांसी उल्टी और कफ आदि रोगों को ठीक करता है। जितनी भी भारत में स्वदेशी चिकित्सा हैं उनमें सूजन की समस्या को दूर करने में मकोय का प्रयोग होता है। लीवर की बीमारी, चर्म रोग और दस्त में मकोय का प्रयोग होता है। आइये जानते हैं आप कैसे मकोय का इस्तेमाल करके बच सकते हैं इन रोगों से ।
*त्वचा संबंधी रोग जैसे चर्म रोग और खुजली होने पर मकोय की पत्तियों को पीसकर इसके पेस्ट का लेप लगाने से फायदा मिलता है। साथ ही आप मकोय के डंठलों की सब्जी भी खा सकते हैं।
पीलिया रोग में
पीलिया में मकोय का क्वाथ रोज पीने से यह रोग ठीक हो जाता है।
     चिकित्सक कहते हैं कि जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है। इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है। 
   पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसा युक्त खाद्य पदार्थों से बचे क्योंकि यह पीलिया के स्तर को और बढ़ाते हैं। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है। 
   कई रोगी जिन्हें कब्ज की शिकायत रहती हो उनके लिए सलाह है कि वे अमलतास के गूदे को प्रतिदिन रात में एक से दो चम्मच सेवन करें कब्ज से राहत मिलती है। चिकित्सकों की राय है कि मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि इससे कई बीमारियों की रोकथाम होती है।
त्वचा पर लाल चकते होना
त्वचा पर लाल चकते दूर करने के लिए मकोय के पत्तों का रस लगाना चाहिए।
खराब दांत बिना दर्द के निकालना
खराब दांतों को बिना दर्द के बाहर निकालने के लिए किसी भी तेल या घी में मकोय के पत्तों का रस मिलाकर मूसड़ों और दांतों पर लगाने से खराब दांत बाहर निकल जाता है।
कुत्ते के काटने पर
कुत्ते के काटने के विष को खत्म करने के लिए मकोय का रस पी लेना चाहिए। इससे कुत्ते का विष उतर जाता है और घाव भी जल्दी भर जाता है।
*यदि मुंह में छाले हो गए हों तो आप परेशान न हों। मकोय के चार पत्ते लें और उन्हें मुंह में चबाएं। इससे जल्दी ही आपके छाले ठीक हो जाते हैं।
चर्म रोग में
चर्म रोग की समस्या होने पर मकोय के रस को निकालें और उसकी अपनी त्वचा में मालिश करें।
खूनी बवासीर होने पर
खूनी बवासीर में मकोय के पत्तों का एकदम ताजा रस कम से कम दस ग्राम की मात्रा में पीयें।
मूत्राशय और गुरदे की सूजन
रोज मकोय के पत्तों से बना रस दस मि ली पीने से गुरदे और मूत्राशय की सूजन ठीक होती है।
उल्टी की समस्या
यदि उल्टी लगातार हो रही हो तो सुहागा को मकोय के रस में मिलाकर सेवन करें। उल्टी बंद हो जाएगी।
बुखार होने पर
बुखार होने पर आप मकोय का काड़ा बनाकर पीयें। इससे आपका बुखार जल्दी ठीक हो जाएगा।
चेचक रोग में
चेचक होने से चेहरे पर दाने निकल जाते हैं। यदि समय पर उपचार न मिलें तो यह चेहरे पर दाग छोड़ देते हैं। इसके उपचार के लिए मकोय से निकलने वाले क्वाथ को पीने से चेचक निकल जाती है।
नींद न आने की समस्या
जिन लोगों को नींद न आने की समस्या हो वे गुड़ के साथ मकोय की जड़ का रस मिलाकर रात को सोने से पहले सेवन करें।
चूहे का विष
चूहे का विष बहुत खतरनाक होता है। इस विष को खत्म करने में मकोय एक मात्र आयुवेर्दिक उपचार है। मकोय का रस निकालकर मालिश करने से चूहे का विष उतर जाता है।
पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

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21.3.17

पीलिया रोग की जानकारी और घरेलू उपचार

    पीलिया ( jaundice ) अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि ये शरीर में होने वाली गलत हलचल का एक संकेत है। यह रोग सूक्ष्म वायरस के कारण होता है। ये वायरस मुख्यतः वायरल हेपेटाइटिस ए , हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी होते है। इनमें से हेपेटाइटिस बी के प्रभाव सबसे अधिक घातक हो सकते है। शुरू में जब ये रोग मामूली होता है तो पता नहीं चलता। जब ये उग्र रूप धारण कर लेता है तब इस रोग का शरीर पर प्रत्यक्ष प्रभाव नजर आने लगता है । त्वचा का रंग पीला हो जाता है। आँखें पीली दिखती है। नाखून पीले नजर आते है। पेशाब गहरा पीला आता है। इसी से इसकी पहली पहचान हो जाती है। इन सब लक्षणों का कारण खून में बिलरुबिन की मात्रा का बढ़ जाना होता है।
लाल रक्त कणो के टूटने से बिलरुबिन बनता है जिसका निस्तारण लिवर द्वारा और मल व पेशाब द्वारा होता रहता है। पीलिया होने पर बिलरुबिन का निस्तारण सही तरीके से नहीं हो पाता तो खून में इसकी मात्रा बढ़ जाती है इसलिए शरीर में पीलापन दिखाई देता है।
खून की जाँच कराने से निश्चय हो जाता है।

सहवास अवधि  बढ़ाने के नुस्खे 

जाँच और परीक्षण
डॉक्टर रोग का निर्धारण रोगी के शारीरिक परीक्षण और चिकित्सीय इतिहास के आधार पर करता है। पीलिया की गंभीरता कई जाँचों से पता चलती है: लिवर फंक्शन टेस्ट
रक्त परीक्षण जिसमें बिलीरुबिन की जाँच, सम्पूर्ण रक्त परीक्षण (सीबीसी), हेपेटाइटिस ए, बी, सी की जाँच।
आकृति आधारित जाँचें-पेट का अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, और/या मैग्नेटिक रेजोनेंस कोलेंजियोपेन्क्रिएटोग्राफी (एमआरसीपी) जाँचें।

बिलीरुबिन क्या है?
बिलीरुबिन (जिसे पहले हीमेटोइडिन कहा जाता था), हीम के विखंडन मेटाबोलिस्म से उत्पन्न पीले रंग का पदार्थ है। हीम, हेमोग्लोबिन में पाया जाता है, जो कि लाल रक्त कणिकाओं का मुख्य घटक है। आमतौर पर पुरानी और क्षतिग्रस्त आरबीसी तिल्ली में विखंडित होती हैं और इस प्रकार उत्पन्न हुआ हीम बिलीरुबिन में बदल जाता है।
पीलिया का सर्वव्यापी लक्षण है त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से (स्क्लेरा) पर पीलापन होना। आमतौर पर इस पीलेपन की शुरुआत सिर से होती है और पूरे शरीर पर फ़ैल जाती है। पीलिया के अन्य लक्षणों में हैं: खुजली होना (प्रुराइटस), थकावट, पेट में दर्द, वजन में गिरावट, उल्टी, बुखार, सामान्य से अधिक पीला मल और गहरे रंग का मूत्र।

प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

आँखों का सफ़ेद हिस्सा (स्क्लेरा) पीला क्यों हो जाता है?
सीरम बिलीरुबिन का आँख के स्क्लेरा में अधिक मात्रा में उपस्थित इलास्टिन नामक प्रोटीन के प्रति आकर्षण होता है। स्क्लेरा में इक्टेरस की उपस्थिति कम से कम (3 ग्राम/डेसीलिटर) मात्रा के सीरम बिलीरुबिन को सूचित करती है।
कौन से आहारों को पूरी तरह त्याग देना चाहिए?
   तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें तथा सभी प्रकार की वसा जैसे घी, क्रीम और तेल का त्याग करना चाहिए क्योंकि इनमें कोलेस्ट्रॉल और फैटी एसिड होते हैं जिनका चयापचय लिवर में होता है। 
*चूंकि पीलिया के दौरान लिवर पर दबाव या जोर होता है, इसलिए रेशेयुक्त आहार, फलों का रस और सादा भोजन ही लिया जाना चाहिए।


भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार


लक्षण
पीलिया का सर्वव्यापी लक्षण है त्वचा और आँखों के सफ़ेद हिस्से (स्क्लेरा) पर पीलापन होना। आमतौर पर इस पीलेपन की शुरुआत सिर से होती है और पूरे शरीर पर फ़ैल जाती है।
पीलिया के अन्य लक्षणों में हैं:
खुजली होना (प्रुराइटस)।
थकावट
पेटदर्द
वजन में कमी।
उल्टी
बुखार
सामान्य से अधिक पीला मल।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

गहरे रंग का मूत्र।
पीलिया के कारण
यह रोग गन्दगी के कारण फैलता है। मल के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था ना होने वाली जगहों पर पर अधिक फैलता है। मक्खी इसे फैलाने में मदद करती है। खुले में बिकने वाले सामान पर मक्खियां बैठती है तो उनके साथ इस रोग के वायरस खाने पीने के सामान पर फेल जाते है।ऐसे सामान को खाने पर पीलिया हो जाता है। अगस्त , सितम्बर महीने में इसीलिये ये रोग अधिक होता है। पीलिया ग्रस्त रोगी के झूठे भोजन ,
पानी आदि के कारण भी ये हो सकता है। 


*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

रोग ग्रस्त व्यक्ति का रक्त दुसरे व्यक्ति को चढ़ जाने से हेपेटाइटिस बी नामक पीलिया हो जाता है। रोगग्रस्त व्यक्ति को लगी सीरिंज , ब्लेड या ऐसे व्यक्ति के साथ यौन क्रिया करने से भी ये हो सकता है।
पीलिया तब होता है जब सामान्य मेटाबोलिज्म की कार्यक्षमता में अवरोध हो या बिलीरुबिन का उत्सर्जन हो।
वयस्कों का पीलिया अक्सर निम्न का सूचक होता है:

    अत्यधिक शराब पीना।
    संक्रमण।
    लिवर का कैंसर।
    सिरोसिस (लिवर पर घाव होना)।
    पित्ताशय की पथरी (सख्त वसा से निर्मित कोलेस्ट्रॉल की पथरी या बिलीरुबिन द्वारा निर्मित पिगमेंट की पथरी)।
    हेपेटाइटिस (लिवर की सूजन जो इसकी कार्यक्षमता घटाती है)।
    पैंक्रियास का कैंसर।
    लिवर में परजीवियों की उपस्थिति।
    रक्त विकार, जैसे कि हीमोलायटिक एनीमिया (शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की कम हुई मात्रा, जो थकावट और कमजोरी उत्पन्न करती है)।
    किसी औषधि या उसकी अधिक मात्रा से विपरीत प्रतिक्रिया, जैसे कि एसिटामिनोफेन।
    परहेज और आहार 


    *वात रोगों के प्राकृतिक ,आयुर्वेदिक घरेलू उपचार*
    सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।
    *ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।
    *पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।
    *नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।
    *पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।
    *आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।
    *अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।
    पीलिया होने पर क्या नहीं खाएं
    *चिकनाई ( घी , तेल ) , तेज मिर्च मसाले , उड़द व चने की दाल , बेसन , तिल , हींग , राई *, मैदा से बने सामान , तली वस्तु आदि।
    *अशुद्ध व बासी खाना , मांस , शराब , चाय कॉफी भी न लें। तेज गर्मी से और अधिक शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए।

    छोटे वक्ष को उन्नत और सूडोल बनाएँ

    पीलिया होने पर क्या खाएं
    *साफ सुथरा गन्ने का रस , नारियल पानी , नारंगी या संतरे का रस , मीठे अनार का रस ,फालसे का जूस , फलों में चीकू , पपीता , खरबूजा , आलूबुखारा , पतली छाछ । चपाती बिना घी लगी खा सकते है। दलिया , जौ की चपाती या सत्तू , मूंग की दाल का पानी थोड़ा सा काला नमक व काली मिर्च डालकर ले सकते है। सब्जी में लौकी तोरई , टिण्डे , करेला , परवल , पालक आदि ले सकते है।
    *रोज सात दिनों तक जौ का सत्तू खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीने से Piliya ठीक हो जाता है।
    * नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।
    * मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।
    * करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।
    * रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।
    * रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।

    * दही में हल्दी मिलाकर खाने से पीलिया में आराम मिलता है।
    .*  थोड़ा सा खाने का चूना ( चने बराबर ) पके हुए केले के साथ सुबह खाली पेट चार पांच 
    दिन खाने से ठीक होता है।

    स्वप्न दोष के  अचूक उपचार 

    * टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।
    * तीन चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से आराम मिलता है।
    * एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
    * लौकी को भून ले। इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर खाएँ। साथ ही लौकी का रस आधा कप मिश्री मिलाकर पीएं। दिन में तीन बार पांच सात दिन लेने से पीलिया ठीक हो जाता है।
    * धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।
    *संतरे का रस सुबह खाली पेट रोज पीने से पीलिया में आराम मिलता है।
    * एक गिलास गन्ने के रस में चौथाई कप आंवले का रस मिलाकर पीने से पीलिया ठीक होता है।
    * पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि





                                                             मकोय की पत्तियों 
    को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
    *मूली का वो हिस्सा जहाँ से पत्ते शुरू होते है यानि टहनी और पत्ते दोनों को पीसकर रस निकाल लें। आधा कप इस रस में एक चम्मच मिश्री मिलाकर सुबह खाली पेट पांच सात दिन पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
    *दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।


    शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

    *पीपल के कोमल पत्ते पीलिया में बहुत फायदेमंद साबित होते है। चार पांच पीपल के नए पत्ते ( कोंपल ) एक चम्मच मिश्री या शक्कर के साथ बारीक पीस लें इसे एक गिलास पानी में डालकर हिला लें। बारीक चलनी से छान ले। ये शरबत सुबह और शाम को दो बार पिएं। चार पांच दिन पीने से जरूर फायदा नजर आएगा। सात दिन तक पी सकते है।
    * इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।
    *जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।
    * पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।

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    14.3.17

    मशरूम खाने के औषधीय गुण उपचार फायदे


      

      मशरूम एक पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाध पदार्थ है। चीन के लोग इसे महौषधि एवं रसायन सदृश्य मानते हैं जो जीवन में अदभुत शकित का संचार करती है। रोम निवासी मशरूम को र्इश्वर का आहार मानते हैं । यह पोषक गुणों से भरपूर शाकाहारी जनसंख्या के लिये महत्वपूर्ण विकल्प है तथा पौष्टिकता की दृष्टि से शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के बीच का स्थान रखता है। मशरूम का 21वीं सदी में उत्तम स्वास्थ्य के लिये भोजन में प्रमुख स्थान होगा। सब्जियों को उगाने से लेकर आकर्षक रंग-रूप तक लाने में रासायनिक खाद, कीटनाशी, फफूँदनाशी या जल्दी बढ़ाने वाले हार्मोन आदि का असन्तुलित मात्रा में प्रयोग किया जाता है जोकि मानव स्वस्थ्य के लिये हानिकारक होती हैं । इन सब्जियों के साथ रासायनिक तत्व हमारे शरीर में पहुँचकर धीरे-धीरे रोगरोधी तन्त्र को कमजोर बनाते हैं। अत: इस सन्दर्भ में मशरूम की उपयोगिता बढ़ती जा रही है
    सब्जी के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाले मशरूम के खाने से शरीर को कई तरह के फायदे होते हैं। जिन लोगों को मशरूम सब्जी के तौर पर पसंद नहीं है। वो मशरूम को आचार, सूप पाउडर, केंडी, बिस्कुट, बड़िया, मुरब्बा के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं। देश के कई इलाकों में मशरूम को कुकरमुत्ते के नाम से भी जाना है। इस नाम के साथ ही लोगों को भ्रम होता है कि यह कुत्ते के मूत्र से पैदा होता है। वहीं कई लोग इसे मांशाहारी बताते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। मशरूम एक शाकाहारी भोजन है। इसे कोई भी खा सकता है। इसके साथ ही मशरूम बाकायदा खेती होती है। जिसे कम तापमान पर उगाया जाता है। वैसे तो मशरूम बाजार में पूरे साल मौजूद रहता है। लेकिन मैदानी इलाकों में ठंड के मौसम में इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है. साथ ही ये फाइबर का भी एक अच्छा माध्यम है. कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है. हेल्थ कॉन्शस लोगों के लिए भी यह अच्छा होता है, क्योंकि इसमें कैलोरीज ज्यादा नहीं होतीं.

    पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

        मशरूम में कई महत्वपूर्ण खनिज और विटामिन पाए जाते हैं. इनमें विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम की पर्याप्त होती है. इसके अलावा, मशरूम में choline नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है.
       *मशरूम या कुकुरमुत्ता को एक प्रकार का कवक माना जाता है जो बरसात के दिनों में सड़े-गले कार्बनिक पदार्थ पर अनायास ही दिखने लगता है। मशरूम खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करने के साथ ही ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमारियों से दूर रखता है। मशरूम खाने से मोटापा कम होन के साथ ही बॉडी की इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
       
    *मशरूम में एंटी-ऑक्सीडेंट भूरपूर होते हैं. इनमें से खास है ergothioneine, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने और वजन घटाने में सहायक होता है.
    *. मशरूम में मौजूद तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां जल्दी-जल्दी नहीं होतीं. मशरूम में मौजद सेलेनियम इम्यून सिस्टम के रिस्पॉन्स को बेहतर करता है.
    *मशरूम में बहुत कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है और इसके सेवन से काफी वक्त तक भूख नहीं लगती.

    *कैंसर में फायदेमंद Beneficial In Cancer

    यह प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाता है। इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। यह कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।

    *हीमोग्लोबिन रखे ठीक, खून की कमी को दूर करने में लाभकारी Beneficial In Removing Blood Loss

    मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।के अलावा मशरूम को बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. वहीं कुछ स्टडीज में मशरूम के सेवन से कैंसर होने की आशंका कम होने की बात तक कही गई है.

    *हृदय रोग में फायदेमंद Beneficial In Heart Disease

    Mushroom Ke Fayde मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं इसलिये ये दिल के लिये अच्‍छे होते हैं। इसमें कुछ तरह के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो कि कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।
     
    *मोटापा कम करे मोटापा कम करने के घरेलू उपाय Motapa Rokne Me Madad Karta Hai.
    *इसमें लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में बडा़ कारगर होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट पर रहने को बोला जाता है, जिसमें मशरूम खाना अच्‍छा माना जाता है।

    *हीमोग्लोबिन रखे ठीक

    मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।
    Mushroom में विटामिन बी होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी2 और बी3 इस कार्य के लिये उत्‍तम हैं।

    हड्डियों को मिलेगी मजबूती 

    *Mushroom विटामिन डी का भी एक बहुत अच्छा माध्यम है। यह विटामिन हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है। नियमित तौर पर मशरूम खाने पर हमारी आवश्यकता का 20 प्रतिशत विटामिन डी हमें मिल जाता है।

    पेट के विकार करे दूर
     
    *ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।
    * मशरूम विटामिन डी का भी एक बहुत अच्छा माध्यम है. यह विटामिन हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है. नियमित तौर पर मशरूम खाने पर हमारी आवश्यकता का 20 प्रतिशत विटामिन डी हमें मिल जाता है.

    *ट्यूमर को रोके

    मशरूम में कालवासिन, क्यूनाइड, लेंटीनिन, क्षारीय एवं अम्लीय प्रोटीन की उपस्थिति मानव शरीर में टयूमर बनने से रोकती है। साथ ही इसमें लगभग 22-35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। जो पौधों से प्राप्त प्रोटीन से कही अधिक होती है तथा यह शाकभाजी व जन्तु प्रोटीन के मध्यस्थ का दर्जा रखता है।
    *इसमें प्यूरीन, पायरीमिडीन, क्यूनान, टरपेनाइड इत्यादि तत्व भी होते है जो जीवाणुरोधी क्षमता प्रदान करते

    *मधुमेह का घरेलू उपचार 


    मधुमेह का घरेलू उपचार मशरूम वह सब कुछ देगा जो मधुमेह रोगी को चाहिये। इसमें विटामिन, मिनरल और फाइबर होता है। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन को बनाती है।

    किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

    प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

    सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

    आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




    पर्याप्त नींद मधुमेह रोग मे फायदेमंद


    Image result for पर्याप्त नींद  मधुमेह रोग मे फायदेमंद
       आपको जानकार झटका लग सकता है कि कम सोने से पुरूषों को मधुमेह यानि डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है।
       हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह पता चला है कि जो पुरूष, कम सोते हैं वो उनके शरीर में शुगर की मात्रा असंतुलित हो जाती है और उनमें मधुमेह की समस्या होने की संभावना रहती है। इसलिए, हर पुरूष को कम से कम 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक होता है।
       ऐसा अध्ययन के निष्कर्ष से स्पष्ट हुआ है कि जो पुरूष पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं उनके शरीर का ब्लड सुगर लेवल हाई हो जाता है जबकि जो महिलाएं कम सोती हैं वो सामान्य नींद लेने वाली महिलाओं की अपेक्षा हारमोन इंसुलिन के लिए कम उत्तरदायी होती हैं।

    *किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

     खूब खाने और सोने वाले लोगों के मोटे होने की बात कही जाती थी अब पता चला है कम सोने और रात में जगने वाले लोग ना सिर्फ मोटे होते हैं बल्कि डायबिटिज के शिकार भी|
    रात की पालियों में काम करने वाले और लगातार विमान में सफर करने वालों को डायबिटिज का ज्यादा खतरा है. अमेरिका में हुई एक रिसर्च से इस बात का पता चला है. बोस्टन के ब्रिघम एंड वीमेन्स हॉस्पीटल का कहना है कि कम सोना या अनियमित तरीके से सोना किसी भी इंसान के सर्केडियन रिदम या बायलॉजिकल क्लॉक बिगाड़ देता हैं. इसकी वजह से पेनक्रियास से निकलने वाली इंसुलिन की मात्रा पर असर पड़ता है और खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. खून में शुगर की बढ़ी मात्रा डायबिटिज का कारण बन सकती है. रिसर्च में शामिल लोगों के मेटाबॉलिज्म की दर में भी फर्क देखा गया, यह कम हो गया. कम मेटाबोलिज्म से मोटापे की समस्या भी हो सकती है


    शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

       रिसर्च करने वाली टीम का नेतृत्व न्यूरोसाइंटिस्ट और नींद पर रिसर्च कर रहे ओरफ्यू बक्सटॉन कर रहे थे. इस टीम ने अस्पताल में 21 लोगों पर छह हफ्ते तक निगाह बनाए रखी. इन लोगों ने इस दौरान इस बात की छानबीन की कि ये लोग कब और कितनी देर तक सोते हैं, इसके साथ ही उन्होंने खाया क्या है. शुरूआत में रिसर्च करने वालों ने इन लोगों को हर रात 10 घंटे तक सोने दिया. बाद में हर 24 घंटे के लिए इसे घटा कर 5-6 घंटे कर दिया गया और वो भी दिन और रात के अलग अलग समय में बांट कर. तीन हफ्ते तक इस तरह से चला.


    पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

       नींद में कमी और सर्केडियन रिदम की गड़बड़ी वाले मरीजों की मेटाबॉलिज्म की दर में कमी का साफ मतलब है कि निष्क्रिय रहने के दौरान उनके शरीर में सामान्य की तुलना में कम कैलोरी खर्च हुई. रिसर्च करने वालों के मुताबिक यह कमी जितनी है उसके कारण एक साल में छह किलो तक वजन बढ़ सकता है. डॉक्टरों ने यह भी देखा कि इन लोगों के खून में खाना खाने के बाद शुगर की मात्रा भी बढ़ गई थी. जाहिर है कि इसका सीधा संबंध पेंक्रियाज से निकलने वाले इंसुलिन से है. कुछ मामलों में तो शुगर की मात्रा डायबिटिज के ठीक पहले मौजूद रहने वाली मात्रा के करीब पहुंच गई थी.
      रिसर्च के आखिरी चरण में नौ दिनों तक जब इन लोगों को सामान्य तरीके से सोने दिया गया तो सारी गड़बड़ियां खुद ही ठीक हो गईं. यह रिसर्च साइंस जरनल में छपी है इसके साथ ही पहले भी कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि रात को काम करने वाले लोगों के डायबिटिज का शिकार होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है. बक्सटॉन का कहना है, "सबूत सामने है कि पर्याप्त रूप से सोना सेहत के लिए बेहद जरूरी है और पूरी तरह से इसके कारगर होने के लिए पहली कोशिश रात में सोने की होनी चाहिए." तो स्वस्थ और सेहतमंद रहना है तो घोड़े बेच कर सोइये और वो भी रात में|


    हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

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    पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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    13.3.17

    कमर दर्द (कटि शूल) के रामबाण उपचार //Treatment of Waist Pain



        हमारे शरीर के विभिन्न भागों में अनेक प्रकार की बीमारियां होती रहती हैं. जिसके परिणाम स्वरूप कई बार शरीर में दर्द भी हो जाता हैं. शरीर के किसी भी भाग में दर्द होने पर हमारे शरीर में बेचैनी हो जाती हैं. शरीर के किसी भी भाग में दर्द होने पर हम अक्सर दर्द से राहत पाने के लिए दर्द की टेबलेट का सेवन करते हैं. जिनका सेवन करने से कभी – कभी हमारे शरीर पर इन दवाइयों का अवांछित प्रभाव भी पड़ जाता हैं. अधिक पेनकिलर का सेवन करने से हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिल, लीवर व किडनी में रोग उत्पन्न होने की आशंका रहती हैं. आधुनिक चिकित्सा की दवाइयों को खाने से दर्द तो आराम हो जाता हैं. लेकिन एक दर्द को ठीक करने के चक्कर में शरीर में अनेक रोग उपज जाते हैं. जिससे नुकसान हमारे शरीर का ही होता हैं. इसलिए जरूरत से ज्यादा दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए . अगर आपके शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द हो तो आप उसे ठीक करने के लिए घरेलू उपायों को अपना सकते हैं.

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       लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का असंतुलित उपयोग करने से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है।सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।
       अधिकतर कमर दर्द की समस्या दिन भर काम करने वाली ग्रहणियों को होती हैं. लेकिन हम यह बिल्कुल निश्चित होकर नहीं कह सकते. कमर के दर्द की समस्या से आजकल हर उम्र का व्यक्ति परेशान रहता हैं. आजकल बच्चों से लेकर बड़े – बूढों को भी कमर दर्द की शिकायत होती हैं.

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    कमर में दर्द होने के कारण

       कमर में दर्द होने का कारण अधिक देर तक एक ही अवस्था में बैठकर काम करना भी हो सकता हैं. भारी वजन उठाने के कारण मांसपेशियों में अधिक खिचावं आ जाता हैं. जिससे कमर में दर्द हो जाता हैं. हमेशा ऊँची ऐडी की सेंडिल या जूतों को पहनने के कारण भी कमर में दर्द हो जाता हैं. कभी - कभी अधिक नर्म गद्दों पर सोने से भी कमर में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं. अधिक देर तक ड्राइव करने के कारण भी लोगों को कमर में दर्द की शिकायत हो जाती हैं. बुजुर्गों के कमर में दर्द बढ़ती उम्र के कारण हो जाता हैं. जैसे – जैसे वृद्ध लोगों की उम्र बढती जाती हैं. वैसे ही उनके जोड़ों में दर्द, कमर में दर्द तथा पीठ के दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं.
    कमर के दर्द के लक्षण
      ज्यादातर लोगों की कमर के निचले तथा मध्य हिस्से में ज्यादा दर्द होता हैं. कमर का दर्द कई लोगों के कमर के दोनों ओर तथा कूल्हों में भी होता हैं. जिससे किसी भी काम को करने में बहुत ही परेशानी होती हैं.
      * शरीर के अंगों जैसे गुर्दे में इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग और कब्ज की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।

    *किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

    कमर दर्द में लाभकारी घरेलू उपचार किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। 
    कमर दर्द के सरल उपचार -
    *नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहिले अपने घुटने मोडें फ़िर उस वस्तु को उठाएं।
    कमर दर्द के लिए आप आईसक्यूब ले सकते हैं। बर्फ के टुकड़े को एक साफ कपड़े में रखें और कमर के जिस हिस्से में दर्द है, वहां बर्फ से सेक करें।कमर पर बर्फ 20 मिनट से ज्यादा न रखें। आप अधिक समय तक रखेंगे, तो हो सकता है कि दर्द ठीक होने की बजाय बढ़ जाए।
    *अगर आपको लगता है कि बर्फ रखने के बावजूद आपको कमर दर्द से राहत नहीं मिली है, तो आप एक घंटे बाद फिर कमर पर बर्फ लगाएं। अगर दर्द कुछ कम हो रहा है, तो आप यह प्रोसेस अगले दो दिनों तक दोहराएं। इससे आपको कमर दर्द में राहत जरूर मिलेगी।
    *कमर पर बर्फ रखते समय ध्यान रखें कि बर्फ कमर से न फिसले। बर्फ पेट पर आसानी से रखी जा सकती है, मगर कमर पर रखने के लिए सपोर्ट की आवश्यकता होती है।
    *भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है।
    *गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

    शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

    *चाय बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग पीसकर और थौडा सा सूखे अदरक का पावडर डालें। दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।
    * सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।
    कमर के दर्द को दूर करने के लिए 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का रस लें. 15 ग्राम अफीम लें. *ग्राम सेंधा नमक लें. अब इन तीनों को मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लें. कमर के दर्द को दूर करने के लिए इस मिश्रण से दिन में 4 या 5 बार मालिश करें. आपको कमर के दर्द से आराम मिलेगा.
    * २ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।
    * कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।
    *कमर के दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप खजूर और मेथी के दानों का प्रयोग कर सकते हैं. कमर के दर्द को दूर करने के लिए 10 ग्राम खजूर को पानी में डालकर उबाल लें. अब 4 ग्राम मेथी लें और उसे पीस लें. उबले हुए खजूर के पानी में मेथी के चुर्ण को मिलाकर इसका सेवन करें. खजूर और मेथी के मिश्रण को पीने से कमर दर्द ठीक हो जायेगा.


    गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 


    * दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम आते हैं।
    *कमर के दर्द से राहत पाने के लिए आप कमल ककड़ी के चुर्ण का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए 100 ग्राम कमल ककड़ी का चुर्ण लें. अब एक बर्तन में दूध डाले और उसे उबालने के लिए रख दे. अब कमल ककड़ी के चुर्ण को दूध में डालकर थोड़ी देर पका लें. अब दूध का सेवन करें. इस दूध का सेवन करने से कमर के दर्द में काफी राहत मिलेगी.
    * भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।
    *अजवायन और गुड़ का उपयोग करके भी कमर के दर्द से राहत पाई जा सकती हैं. इसके लिए 200 ग्राम अजवायन लें और उसे पीस लें. अब 200 ग्राम गुड़ लें और उसे भी पीस लें. अब एक डिब्बा ले और उसमें इन दोनों के चुर्ण को डालकर रख दें. रोजाना एक चम्मच चुर्ण का सेवन करें. कमर के दर्द को जल्दी दूर करने के लिए इस चुर्ण का दिन में दो बार सेवन करें.
    * नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

    प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

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    *सोंठ और गोखरू का प्रयोग करने से भी कमर का दर्द ठीक हो जाता हैं. कमर के दर्द को ठीक करने के लिए गोखरू और सोंठ की बराबर – बराबर मात्रा लें और इनका क्वाथ बना लें. अब इस क्वाथ का सेवन करें. सोंठ और गोखरू से बने क्वाथ को दिन में दो बार पीने से कमर का दर्द ठीक हो जायेगा.
    *रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ कमर में मालिश करें।
    *सोंठ और अरंड मूल का क्वाथ बनाकर पीने से भी कमर का दर्द ठीक हो जाता हैं. कमर के दर्द को ठीक करने के लिए सोंठ और अरंड मूल का क्वाथ बना लें. फिर इसमें पीसी हुई हिंग और काला नमक डालें और इन्हें अच्छी तरह मिला लें. अब इसका सेवन करें. सोंठ और अरंड मूल के क्वाथ का सेवन करने से आपको कमर के दर्द से छुटकारा मिलेगा.


    पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

    * कढ़ाई में दो तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।
    *सुबह शाम दिन में दो बार दो-दो छुहारे खाते रहें एैसा नियमित कुछ दिनों तक करने से कमर दर्द में राहत मिलती है।
    *देशी घी में अदरक का रस मिलाकर पीते रहें, कुछ दिनों तक सेवन करने से कमर दर्द की शिकायत दूर हो जाती है।
    *गरम पट्टी को कमर पर बांधने से कमर दर्द मे राहत मिलती है, आप गरम पानी में थोड़ा सेंधा नमक डालकर नहाने से भी कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है ।
    *कमर दर्द में कच्चे आलू की पुल्टिस बांधने से कमर से संबंधित दर्द समाप्त हो जाता है। लेकिन नियमित इस का प्रयोग करेगें तभी।
    *तिल के तेल की कमर पर मालिश करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है। तिल के तेल को हल्की आंच में गरम करें और फिर इस तेल को कमर दर्द वाली जगह पर हल्के हाथों से मालिश करें। कमर दर्द में जल्द ही राहत मिलेगी।
    *गेहूं की बनी रोटी जो एक ओर से नहीं सिकी हो उस पर तिल के तेल को चुपड़कर कमर दर्द वाली जगह पर रखने से कमर दर्द जल्दी ठीक होता है।
    *मेथी का प्रयोग खाने में करते रहने से भी कमर दर्द में राहत मिलती है। मेथी के लडुओं को सेवन नियमित करते रहने से कमर दर्द नहीं होता।
    *यदि कमर में दर्द अधिक है तो आप मेथी के तेल की मालिश कमर पर जरूर करें लाभ मिलेगा।
    *200 ग्राम दूध में 5 ग्राम एरंड की गिरी को पकाकर, दिन में दो बार सेवन करने से कमर दर्द की पीड़ा जल्दी ठीक हो जाती है।

    पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

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    विशिष्ट परामर्श-  



    संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 



        




    8.3.17

    मोटापा घटाने और पेट कम करने के घरेलू उपाय//Home remedies for reducing obesity and reducing belly fat


      

       अनियमित और मसालेदार भोजन के अलावा आरामपूर्ण जीवनशैली के चलते तोंद एक वैश्विक समस्या बन गई है जिसके चलते डायबिटीज और हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है। तोंद कई अन्य रोगों को भी जन्म देती है। इसके चलते.
       मोटापा शरीर के लिए बीमारी का घर होता है। मोटापा शरीर में जमा होनेवाली अतिरिक्त चर्बी होती है जिससे वजन बढ़ जाता है और यही मोटापा कई बीमारियों का घर बनता है। मोटापे का मतलब है, शरीर में बहुत ज्यादा चर्बी होना। जबकि ज्यादा वजनदार होने का मतलब है, वजन का सामान्य से ज्यादा होना

    गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

        *वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं , जिनमें खाघ पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है। कुछ घरेलू उपायों से आप इस चर्बी तथा टॉक्‍सिन को अपने शरीर से निकाल सकते हैं। जब आप शरीर से इस फैट को निकालेगें तो आपके शरीर की सफाई भी होगी, जिससे पेट साफ रहेगा और त्‍वचा दमकने लगेगी।
      *कमर और पेट के आसपास इकट्ठा हुई अतिरिक्त चर्बी से किडनी और मूत्राशय में भी दिक्कतें होना शुरू हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जिसके चलते आए दिन कमर दर्द और साइड दर्द होता रहता है।
    *भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।

    प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

      सैर करें फिट रहे-
     कमर और पेट के आसपास की चर्बी को दूर करने के लिए रोजाना सुबह सैर पर जाएं और रात के खाने के बाद भी सैर करना ना भूलें। इससे पेट और कमर की अतिरिक्त कैलोरी कम करने में मदद मिलेगी। क्‍योंकि नियमित रूप से सैर पर जाने से 25 फीसदी कैलोरीज बर्न होती है। पेट जल्दी कम करना है तो तीस मिनट के वॉक सेशन रखें। स्पीड से चलें। लगातार स्पीड से ना चल सके तो बीच में इंटरवल लें। थोड़ी देर तेजी से चलें और फिर स्पीड कम कर लें।
    *प्रातः एक गिलास ठंडे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है। दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी। पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रख कर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।

    *ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।

    गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

    *तनाव मोटापे की एक बड़ी वजह है। आधुनिक समय में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे तनाव न हो क्योंकि तनाव आज के लाइफस्टाइल की देन है। अक्सर तनाव व चिंताग्रस्त होने की वजह से लोगों को ज्यादा भूख लगती है। शरीर की चयापचय प्रक्रिया धीमी हो जाती है नतीजतन शरीर में एकत्र कैलोरी का नष्ट होना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से मोटापा बढ़ता है।
    *ग्रीन टी जरूर पिये-
     आप चाय पीने के बहुत शौकीन हैं, तो आप दूध की चाय पीने के बजाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, लेमन टी या फिर ब्लैक टी पिये।
    पेट कम करने के लिए संतुलित आहार का सेवन जरूरी है। खाने में विटामिन-सी युक्त आहार जैसे नींबू, अंगूर, बेर और संतरे को शामिल करें क्योंकि यह फैट को जल्द से जल्द बर्न करके शरीर को शेप में लाने में मदद करते हैं। साथ ही गाजर, पत्ता गोभी, ब्रोकली, सेब और तरबूज
    *केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।

    पेट मे गेस के अनुपम नुस्खे 

    *सप्ताह में एक दिन उपवास करें-
    यदि आप खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं और अपनी इस आदत से भी परेशान हैं, तो इसका सबसे आसान तरीका ये है कि आप सप्ताह में कम से कम एक बार उपवास जरूर करें। आप चाहें तो सप्ताह में एक दिन तरल पदार्थों पर भी रह सकते हैं, जैसे- पानी, नींबू पानी, दूध, जूस, सूप इत्यादि या किसी दिन सिर्फ सलाद या फल भी ले सकते हैं।

    *मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है
    *सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। *केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।

    पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

    खान-पान संतुलित रखें-
    यदि आप जंकफूड खूब खाते हैं या फिर आपको तला खाना बहुत पसंद है तो जनाब अब इनसे परहेज करना शुरू कर दें। खाने में खासतौर पर सामान्य आटे के बजाय जौ और चने के आटे को मिलाकर चपाती खांए, इससे आप जल्द ही स्लिम ट्रि‍म होंगे। रोजाना कुछ ग्राम बादाम खाने से कमर की साइज 24 सप्ताह में साढ़े छह इंच कम हो सकती है। तो आज से ही तय करें कि रोजाना सौ ग्राम नट्स अपनी डाइट में जरूर से शामिल करेंगे। यह कैलोरी से भरपूर होने के साथ ही फाइबर युक्त भी होते हैं। भोजन में संतुलित कैलोरीज लें। आपको दिनभर में कम से कम 2000 कैलोरी जरूर ले।
    *रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
    *सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
    भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पांच बार करें तो पांच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे।

    *किडनी फेल रोग का अचूक इलाज*

    *पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है।
    *छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है। *आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
    *बादाम का सेवन :
    रोज बादाम का सेवन आपका वजन घटा सकता है। पुरड्यू यूनिव‌र्सिटी के शोध की मानें तो बादाम में मौजूद विटामिन ई और मोनोसैचुरेटेड फैट्स न सिर्फ शरीर में मौजूद सैचुरेटेड फैट्स को कम करने में मदद करता है बल्कि ओवर डाइटिंग से भी बचाता है। रोज हल्के भुने बादाम का सेवन बेहतरीन नाश्ता है जिसे लेने के बाद दिनभर स्नैक्स खाने का मन नहीं करता है वहीं यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
    *खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।

    शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

    पूरी नींद ले-
    सोने संतुलित खाना और नियमित रूप से एक्सरसाइज से पेट की चर्बी कम होती है, लेकिन ऎसा तभी होता है जब आप अच्छी नींद भी ले। सोने के मामले में लापरवाही से तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स रिलीज होते हैं और पेट पर चर्बी भी बढ़ती है। रात में 6 से 7 घंटे सोने वाले लोगों में पेट का फैट कम होता है। इससे ज्यादा या कम नींद लेने वाले लोगों को तोंद की समस्या ज्‍यादा होती है।
    *गरम पानी में नींबू का रस और शहद घोलकर रोज सुबह खाली पेट पिएं। इससे पेट सही रहेगा और मोटापा दूर होगा।
    *भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा कम होता है। भूख से थोड़ा कम ही खाए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता।

    शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

    *लौकी जूस 
        यह एक पौष्टिक सब्‍जी है। इसे पीने से पेट भर जाता है, इसमें फाइबर होता है और यह पेट को ठंडक पहुंचाती है। इसे पीने से घंटो तक पेट भरा रहता है और मोटापा भी कंट्रोल होता है।
    *धनिया जूस 
    इस जूस को पीने से किडनी सही रहती है और मोटापा भी कंट्रोल रहता है। इसे पीने से पेट देर तक भरा रहता है और यह शरीर की शुद्धी करती है।
    *लाल मिर्च और अदरक 
    ताजी अदरक को कूट कर उसमें लाल मिर्च मिला दें और इसका सेवन करें। यह दोनों मसाले मोटाप घटाने के लिये सबसे उत्‍तम उपचार हैं। यह फेफड़ों को भी साफ करते हैं और मोटापा भी घटाते हैं।
    पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

    किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

    प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

    सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि